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पटना में तेज प्रताप यादव के निजी मकान पर तीन साल से बिजली बिल बकाया: कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल!

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AIN NEWS 1: पटना के बेउर इलाके में स्थित राजद नेता और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के निजी मकान से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, इस मकान का बिजली बिल पिछले तीन वर्षों से जमा नहीं किया गया है। कुल बकाया राशि 3.6 लाख रुपये के करीब पहुंच चुकी है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है—न सिर्फ बकाया भुगतान पर, बल्कि बिजली कंपनी की कार्रवाई और नियमों के पालन को लेकर भी।

तीन साल से भुगतान नहीं, फिर भी कनेक्शन चालू

रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई 2022 के बाद से इस बिजली कनेक्शन पर कोई भुगतान नहीं किया गया। आम उपभोक्ता के लिए ऐसी स्थिति में कनेक्शन काट दिया जाता है, लेकिन तेज प्रताप यादव के नाम दर्ज इस कनेक्शन पर यह कदम नहीं उठाया गया। यही वजह है कि मामले ने तूल पकड़ लिया है और लोग पूछ रहे हैं—क्या नियम सबके लिए समान हैं?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब आम उपभोक्ता थोड़ी-सी देरी करता है तो कंपनी नोटिस भेजने लगती है और कुछ समय बाद कनेक्शन भी काट दिया जाता है। ऐसे में एक वीआईपी परिवार से जुड़े बिल का तीन साल तक बकाया रहने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना लोगों के मन में संदेह पैदा करता है।

बिजली कंपनी अब कर रही है रिकवरी की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद बिजली कंपनी हरकत में आई है। अब कंपनी रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वे नियमों के तहत कार्रवाई करेंगे और बकाया राशि को वसूला जाएगा।

हालांकि, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि यदि मामला सुर्खियों में नहीं आता तो क्या कंपनी कोई कदम उठाती? क्या कार्रवाई में देरी सिर्फ लापरवाही थी, या फिर प्रभावशाली परिवार होने का असर?

क्यों उठ रहे हैं बिजली विभाग की भूमिका पर सवाल?

यह घटना बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है:

1. क्या सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार होता है?

इस मामले को देखकर लगता है कि आम उपभोक्ता और राजनैतिक परिवारों के लिए नियमों के पालन में फर्क किया जाता है।

2. नियमों के बावजूद कनेक्शन क्यों नहीं हटाया गया?

बिजली विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, लंबे समय तक भुगतान न होने पर कनेक्शन काटना अनिवार्य होता है। फिर भी कार्रवाई न होना विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

3. क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है?

कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सीधे-सीधे विभाग की लापरवाही को दिखाता है, क्योंकि तीन साल तक किसी बिल की अनदेखी होना सामान्य बात नहीं है।

तेज प्रताप यादव क्या कहते हैं?

अब तक तेज प्रताप यादव की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला जल्द ही उनके द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है, क्योंकि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

जनता की प्रतिक्रिया क्या है?

सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। बहुत से लोग बिजली विभाग की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आम नागरिक की बिजली मामूली राशि पर भी काट दी जाती है तो तीन साल का बकाया कैसे चल गया?

दूसरी ओर, कुछ लोग इसे सिर्फ सिस्टम की कमज़ोरी बता रहे हैं और सुझाव दे रहे हैं कि इस तरह के मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।

राजनीतिक तापमान भी बढ़ा

इस खबर के सामने आते ही विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। वे सरकार और बिजली विभाग पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जब नेताओं या संपन्न लोगों की बात आती है तो विभाग के नियम ढीले पड़ जाते हैं।

बीजेपी नेताओं ने तो बयान तक दे दिया कि यह मामला सरकार के दोहरे मानदंड का उदाहरण है। वहीं, राजद समर्थक इसे सिर्फ विभागीय लापरवाही बता रहे हैं और कह रहे हैं कि इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

क्या आगे हो सकती है कार्रवाई?

बिजली विभाग की ओर से संकेत मिले हैं कि रिकवरी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी और अगर भुगतान नहीं होता है, तो कनेक्शन काटा भी जा सकता है। इसके अलावा, विभाग आंतरिक जांच भी कर सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तीन साल तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

पारदर्शिता जरूरी है

यह मामला सिर्फ एक बकाया बिल का नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और समानता के सिद्धांतों से भी जुड़ा है। जनता यह चाहती है कि नियम सबके लिए समान हों—चाहे वह आम नागरिक हो या कोई नेता। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बिजली विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में सिस्टम में सुधार होगा।

Tej Pratap Yadav’s Patna house electricity bill controversy has sparked debate over transparency and fairness in Bihar’s power department. With electricity dues exceeding ₹3.6 lakh and no payment recorded since July 2022, questions are being raised about why the connection was not disconnected despite long-pending bills. This incident highlights issues of accountability, electricity bill rules, VIP treatment, and the functioning of the Bihar electricity board, making the matter a significant topic in Patna and across the state.

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