AIN NEWS 1: पश्चिम बंगाल में चल रहे उपचुनावों के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सख्त चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी गलत और भ्रामक सूचनाओं को फैलाना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा। आयोग का कहना है कि यह न केवल चुनावों की निष्पक्षता को प्रभावित करता है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी कमजोर करता है।

यह विवाद उस समय और गहरा हो गया जब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा और उन्होंने State Information Report (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। इस शिकायत के तुरंत बाद चुनाव आयोग की ओर से बयान जारी किया गया, जिसमें दो टूक शब्दों में कहा गया कि “राजनीतिक बयानबाजी करना किसी भी पार्टी का अधिकार है, लेकिन जब चुनावी मशीनरी, EVM या प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गलत जानकारी फैलाई जाती है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक अविश्वास पैदा करता है।”
TMC की शिकायत क्या थी?
TMC ने दावा किया था कि SIR रिपोर्ट में कई विसंगतियां हैं और कुछ जानकारी सही तरीके से दर्ज नहीं की गई। पार्टी का कहना था कि यह चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। उनके अनुसार कुछ मतदान केंद्रों पर EVM की कार्यप्रणाली को लेकर भी संदेहजनक स्थिति बनाई गई, जिसके चलते उन्होंने विस्तृत जांच की मांग की।
TMC नेताओं का आरोप था कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए चुनावी प्रक्रियाओं से छेड़छाड़ की जा रही है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में न तो ठोस सबूत दिए गए और न ही कोई वीडियो या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत किया गया।
चुनाव आयोग का कड़ा रुख
इन आरोपों के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने अत्यंत सख्त लहजा अपनाया और TMC को चेतावनी दी कि बिना प्रमाण किसी भी तरह के सार्वजनिक बयान, पोस्ट या प्रोपेगेंडा को साझा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
आयोग ने कहा:
चुनावों से संबंधित हर प्रक्रिया को तकनीकी और कानूनी तौर पर सुरक्षित बनाया गया है।
लगातार गलत बयानबाजी से जनता के बीच भ्रम फैलता है।
यदि TMC या अन्य कोई दल भविष्य में भी बिना प्रमाण भ्रामक दावे करेगा, तो आयोग कड़ी कार्रवाई करेगा।
इस चेतावनी को राजनीतिक हलकों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर चुनाव आयोग बेहद संतुलित और औपचारिक तरीके से प्रतिक्रिया देता है। लेकिन उपचुनावों के दौरान बार-बार उठ रहे सवालों को देखते हुए आयोग का धैर्य भी टूटता दिखा।
EVM पर विवाद क्यों बार-बार होता है?
भारत में Electronic Voting Machine (EVM) को लेकर हमेशा राजनीतिक विवाद बना रहता है। विपक्षी दल अक्सर EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग बार-बार यह स्पष्ट करता रहा है कि:
EVM इंटरनेट से नहीं जुड़ती
इसके डेटा को किसी भी तरह से रिमोटली बदला नहीं जा सकता
हर मशीन कई स्तर की जांच और सीलिंग प्रक्रिया से गुजरती है
VVPAT से सत्यापन का विकल्प भी उपलब्ध है
इसके बावजूद हर चुनाव में अलग-अलग पार्टियां EVM पर संदेह जताती रही हैं।
इस बार चुनाव आयोग नाराज़ क्यों हुआ?
यह पहली बार नहीं है जब TMC ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हों, लेकिन इस बार आयोग को लगा कि मामला सीमाओं से बाहर जा रहा है। आयोग का मानना है कि बिना किसी तथ्यात्मक आधार के सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं, जिससे उपचुनाव की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आती है।
साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी तरह की शिकायत या अनियमितता का समाधान संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है, न कि मीडिया के माध्यम से दबाव बनाकर।
चुनाव आयोग की चेतावनी के बाद अब TMC को अपनी रणनीति को लेकर सतर्क रहना पड़ सकता है। अगर पार्टी भविष्य में भी इसी तरह के आरोप लगाती है, तो आयोग कानूनी कदम भी उठा सकता है। वहीं TMC का कहना है कि वह सिर्फ अनियमितताओं की ओर ध्यान दिला रही है और चुनाव आयोग को पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में और भी गरमा सकता है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में संघर्ष, बयानबाजी और शिकायतें लंबे समय से एक प्रमुख हिस्सा रही हैं।
लोकतंत्र में भरोसे की लड़ाई
यह पूरा विवाद एक सवाल जरूर खड़ा करता है—क्या भारत की चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है, या यह सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है?
चुनाव आयोग का कहना है कि गलत सूचनाओं का प्रसार लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की है कि चुनावी संस्थानों पर अनावश्यक अविश्वास न फैलाएं और हर शिकायत को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाएं।
During the West Bengal bypolls, the Election Commission of India (ECI) issued a strong warning to the Trinamool Congress (TMC) for allegedly spreading misinformation related to EVMs and the electoral process. This EVM controversy has raised concerns about political misinformation and its impact on democratic institutions. The ECI clarified that while political parties have full freedom to express their opinions, misleading claims regarding EVM functioning or bypoll procedures will not be tolerated. This West Bengal bypolls dispute highlights the growing tension between the ECI and TMC over electoral transparency and accountability.


















