AIN NEWS 1: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की शुद्धि अभियान के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। निर्वाचन आयोग की ओर से चल रही एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया में राज्य के विभिन्न जिलों में 21 लाख से अधिक ऐसे नाम मिले हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन फिर भी वोटर लिस्ट में शामिल थे। आयोग ने इन मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है और सभी जिलों को जल्द से जल्द सही सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस बार की समीक्षा प्रक्रिया में कई अहम बातें सामने आई हैं। कुछ बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ने यह शिकायत की है कि उन पर स्थानीय प्रशासन का दबाव बनाया जा रहा था, जिसके कारण फॉर्म अपलोड करने में देरी हुई। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि तय समय में मतदाता सूची को अपडेट किया जा सके।
किस जिले में सबसे ज्यादा मृत मतदाता मिले?
इस पूरी प्रक्रिया में उत्तर 24 परगना जिला सबसे ऊपर रहा। यहां अब तक 2.75 लाख से ज्यादा मृत मतदाताओं की पहचान हुई है, जो पूरे राज्य में सबसे बड़ी संख्या है। यह संख्या इस बात की ओर इशारा करती है कि वर्षों से अपडेट न होने के कारण वोटर लिस्ट में कई नाम बिना सत्यापन के जुड़े रह गए।
इसके बाद पश्चिम बर्धमान जिले का स्थान है, जहां लगभग 1.57 लाख मृत मतदाताओं के नाम सूची में मिले। यह आंकड़ा भी चौंकाने वाला है। इसी तरह दक्षिण 24 परगना जिले में 1.39 लाख ऐसे नाम मिले, जिन्हें अब सूची से हटाया जा रहा है। इन तीन जिलों के आंकड़े ही मिलकर करीब 5.7 लाख मृत मतदाता दिखाते हैं।
चुनाव से पहले क्यों जरूरी थी यह प्रक्रिया?
पश्चिम बंगाल में अगले चुनाव की तैयारियों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदाता सूची की विशेष समीक्षा पर जोर दिया है। मृत मतदाताओं के नाम रहने से फर्जी मतदान और राजनीतिक विवादों की संभावना बढ़ जाती है। कई बार राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं कि वोटिंग में अनियमितताएं होती हैं। इसलिए आयोग ने समय रहते तथ्यात्मक और पारदर्शी सूची तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य सिर्फ मृत मतदाताओं के नाम हटाना ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी सूची में जोड़ना है, जिन्होंने 18 वर्ष पूरे कर लिए हैं या किसी नए इलाके में शिफ्ट हुए हैं। इससे सुनिश्चित होता है कि हर पात्र नागरिक को वोट देने का अधिकार मिले और चुनाव शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष माहौल में हो।
बीएलओ पर दबाव की शिकायतें—आयोग का रुख सख्त
बीएलओ की यह जिम्मेदारी होती है कि वे घर-घर जाकर जानकारी सत्यापित करें और सही रिपोर्ट अपलोड करें। लेकिन आयोग को यह रिपोर्ट मिली है कि कुछ बीएलओ ने स्थानीय प्रशासन द्वारा दबाव का सामना किया, जिससे वे अपनी ड्यूटी प्रभावी रूप से नहीं कर पाए। कहा जा रहा है कि कई जगहों पर राजनैतिक प्रभाव के कारण काम में देरी हुई और फॉर्म समय पर अपडेट नहीं हो सके।
निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की लापरवाही या बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। आयोग ने चेतावनी दी है कि अगर किसी भी अधिकारी को काम में बाधा पहुँचाते पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
21 लाख से अधिक मृत मतदाताओं की पहचान—यह संख्या क्यों मायने रखती है?
21 लाख मृत मतदाताओं की पहचान होना अपने आप में बेहद बड़ा आंकड़ा है। यह साफ दिखाता है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में कई वर्षों से ढिलाई बरती गई। राज्य के विशाल आकार और बड़ी जनसंख्या के कारण नियमित सत्यापन न होने से यह अंतर काफी बढ़ गया।
इतनी बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं का वोटर लिस्ट में रहना न केवल चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को भी प्रभावित करता है। यह समस्या सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में रहने वाले राज्यों में धीरे-धीरे सामने आ रही है।
आगे की प्रक्रिया: कब तक पूरी होगी सफाई अभियान?
चुनाव आयोग की योजना है कि आगामी कुछ हफ्तों में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बीएलओ की टीमों को सक्रिय रखें और लगातार समीक्षा करते रहें। सभी फॉर्म डिजिटल रूप से अपलोड किए जा रहे हैं, ताकि पारदर्शिता और गति दोनों बनी रहें।
सूत्रों के मुताबिक आयोग अतिरिक्त निगरानी टीम भी तैनात कर सकता है ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को तत्काल रोका जा सके। आयोग ने यह भी तय किया है कि जहां बीएलओ काम में देरी करेंगे, वहां उन्हें बदलकर नए कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
इतनी बड़ी संख्या में मृत मतदाताओं की पहचान होने के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल भी बढ़ना तय है। विपक्षी दल अक्सर सत्ताधारी दल पर मतदाता सूची में गड़बड़ी कर लाभ लेने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई को एक सख्त और जरूरी कदम माना जा रहा है।
वहीं ruling party का कहना है कि आयोग का निर्णय चुनावी पारदर्शिता को मजबूत करेगा, और सच्ची लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की इस व्यापक समीक्षा ने चुनावी प्रणाली में छुपी कई खामियों को उजागर किया है। 21 लाख से अधिक मृत मतदाताओं की पहचान एक ऐसा विषय है, जिसे गंभीरता से देखना आवश्यक है। आयोग की यह कार्रवाई न केवल भविष्य के चुनावों को अधिक पारदर्शी बनाएगी, बल्कि मतदाताओं में भरोसा भी बढ़ाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि यह पूरी प्रक्रिया कब तक सटीक और निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है।
The Election Commission of India has launched a major voter list cleanup in West Bengal under the Special Intensive Revision (SIR) process, identifying over 2.1 million dead voters across districts such as North 24 Parganas, Paschim Bardhaman, and South 24 Parganas. This large-scale voter list revision aims to improve transparency, eliminate fake entries, and ensure accurate voter verification before upcoming elections. The initiative strengthens trust in the electoral process and highlights the importance of maintaining an updated and authentic voter list in India.


















