AIN NEWS 1: पुणे का ऐतिहासिक शनिवार वाडा एक बार फिर चर्चा में है। पेशवा काल की इस विरासत में हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें कुछ मुस्लिम महिलाएं परिसर के भीतर नमाज अदा करती नजर आ रही हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद शहर के कई हिंदू संगठनों ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया है।

शनिवार वाडा, जो मराठा साम्राज्य के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक माना जाता है, में इस तरह की धार्मिक गतिविधि को कई लोगों ने “ऐतिहासिक धरोहर का अपमान” बताया है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के बाद पुणे नगर निगम और पुरातत्व विभाग तक मामला पहुंच गया है।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और कुछ स्थानीय संगठनों ने इस घटना पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि शनिवार वाडा केवल एक पर्यटक स्थल और ऐतिहासिक धरोहर है, यहां किसी भी धर्म विशेष की पूजा या नमाज जैसी गतिविधियां नहीं की जानी चाहिए।
कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि “शनिवार वाडा मराठा इतिहास की आत्मा है। यह वह जगह है जहां पेशवा शासन का गौरव लिखा गया था। यहां किसी भी धार्मिक रिवाज़ की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, खासकर जब वह अनुमति के बिना हो।”
प्रशासन की जांच
वायरल वीडियो पर पुणे पुलिस और पुरातत्व विभाग (ASI) ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अगर बिना अनुमति किसी धार्मिक गतिविधि का आयोजन किया गया है, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एक अधिकारी ने बताया, “शनिवार वाडा एक संरक्षित स्मारक है। यहां किसी भी धार्मिक आयोजन या अनधिकृत सभा की अनुमति नहीं है। मामले की जांच की जा रही है कि वीडियो कब और कैसे शूट किया गया।”
सोशल मीडिया पर गरम माहौल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे “धरोहर का अपमान” बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जबकि कुछ ने कहा कि धार्मिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है और किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
कुछ लोगों ने लिखा, “अगर मंदिरों या अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर पूजा पर प्रतिबंध है, तो यहां नमाज कैसे अनुमति दी जा सकती है?”
दूसरी ओर कुछ उपयोगकर्ताओं ने कहा कि “अगर किसी ने शांति से प्रार्थना की है, तो इसे विवाद का रूप देना ठीक नहीं है।”
शनिवार वाडा का ऐतिहासिक महत्व
शनिवार वाडा का निर्माण 1732 में पेशवा बाजीराव प्रथम द्वारा कराया गया था। यह मराठा साम्राज्य की राजधानी का प्रतीक रहा है। इस किले का नाम शनिवार वाडा इसलिए पड़ा क्योंकि इसका शिलान्यास शनिवार के दिन हुआ था।
यह स्थान न केवल स्थापत्य कला का उदाहरण है, बल्कि मराठा वीरता, गौरव और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी माना जाता है।
हर साल हजारों पर्यटक इस वाडा को देखने आते हैं। यहां आयोजित ‘लाइट एंड साउंड शो’ में मराठा इतिहास को जीवंत किया जाता है। ऐसे में धार्मिक गतिविधि के वायरल वीडियो ने स्थानीय लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया है।
प्रशासन की अपील
पुणे पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि “किसी भी अफवाह या भड़काऊ संदेश पर ध्यान न दें। घटना की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।”
पुरातत्व विभाग ने भी साफ कहा है कि शनिवार वाडा केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक उद्देश्य के लिए खुला है, न कि किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए। आने वाले समय में यहां सुरक्षा बढ़ाने और निगरानी कैमरे लगाए जाने की भी योजना है।
नागरिकों की राय
पुणे के नागरिकों में भी इस घटना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह घटना अनजाने में हुई होगी और इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।
वहीं, कुछ का कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से हो।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम सबको अपनी आस्था का सम्मान है, लेकिन सार्वजनिक धरोहरों पर धार्मिक कार्य करना सही नहीं। इससे विवाद बढ़ते हैं।”
शनिवार वाडा में नमाज पढ़ने के इस वीडियो ने पुणे में धार्मिक और सांस्कृतिक बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक पक्ष इसे धरोहर का अपमान मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है।
प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जल्द ही स्पष्ट करेगा कि घटना के पीछे की सच्चाई क्या है। फिलहाल सभी से यही अपील की जा रही है कि शांति, आपसी सद्भाव और पुणे की सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखें।
A viral video from Pune’s historic Shaniwar Wada showing a group of Muslim women offering namaz has sparked a major controversy. Hindu organizations have termed it an insult to the city’s heritage, while the Archaeological Survey of India (ASI) and Pune Police have launched an investigation. The Shaniwar Wada namaz controversy has reignited discussions on religious harmony, heritage preservation, and community respect in India.


















