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प्रयागराज मेला विवाद: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से टकराव खत्म करने की केशव मौर्य की अपील!

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AIN NEWS 1: प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच उपजा विवाद अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह मामला अब केवल प्रशासनिक मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सार्वजनिक रूप से इस विवाद को समाप्त करने की अपील की है।

डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि संत समाज का सम्मान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और किसी भी तरह का टकराव न तो समाज के हित में है और न ही परंपराओं के अनुकूल। उन्होंने बेहद विनम्र शब्दों में शंकराचार्य से आग्रह किया कि वे विवाद को विराम दें और संगम में स्नान कर शांति व सौहार्द का संदेश दें।

“मैं प्रार्थना कर सकता हूं, निवेदन कर सकता हूं” – केशव मौर्य

केशव प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में कहा,

“जब मुझे बात करने के लिए कहा जाएगा, मैं जरूर संवाद करूंगा। एक सेवक के रूप में मैं केवल प्रार्थना कर सकता हूं, उनके चरणों में शीश झुका सकता हूं और निवेदन कर सकता हूं। मैंने यह निवेदन किया है और आगे भी करता रहूंगा कि जो भी विरोध है, उसे समाप्त कर संगम में स्नान कर समाज को सकारात्मक संदेश देने की कृपा करें।”

उनके इस बयान को एक राजनीतिक नेता के बजाय एक श्रद्धालु की भावनात्मक अपील के रूप में देखा जा रहा है। मौर्य के शब्दों में टकराव नहीं, बल्कि सम्मान और समर्पण झलकता है।

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शंकराचार्य के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बयान में यह इच्छा जताई थी कि उत्तर प्रदेश को एक “समझदार मुख्यमंत्री” मिलना चाहिए। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केशव मौर्य ने कहा कि शंकराचार्य कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक संत हैं और उनके विचारों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई संत किसी व्यक्ति को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहता है, तो यह उसकी भावना हो सकती है और उस भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।

केशव मौर्य ने यह भी जोड़ा कि सरकार संतों के विचारों को हमेशा आदर के साथ सुनती है और उनका सम्मान करती रहेगी।

शिविर प्रभारी की शिकायत से बढ़ी चिंता

विवाद के बीच एक और गंभीर पहलू सामने आया, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर प्रभारी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ असामाजिक तत्व लाठी-डंडों और झंडों के साथ शिविर में पहुंचे थे।

शिविर प्रभारी के अनुसार, ये लोग जबरन शिविर में घुसने की कोशिश कर रहे थे और वहां मौजूद सेवकों के साथ मारपीट पर उतारू हो गए थे। हालांकि शिविर में मौजूद लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए उन्हें समझाकर बाहर निकाल दिया, लेकिन हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।

“बड़ी घटना हो सकती थी” – शिविर प्रभारी

शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला जाता, तो कोई बड़ी और गंभीर घटना हो सकती थी। शिविर प्रभारी ने प्रशासन से मांग की है कि शंकराचार्य की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।

इस घटनाक्रम ने प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन और संत समाज के बीच संतुलन की जरूरत

प्रयागराज माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में संत समाज और प्रशासन के बीच किसी भी तरह का टकराव सीधे तौर पर आम श्रद्धालुओं को प्रभावित करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद और आपसी सम्मान ही इस विवाद का स्थायी समाधान हो सकता है। सरकार की ओर से जिस तरह संयमित भाषा में अपील की जा रही है, उससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन टकराव नहीं, समाधान चाहता है।

आगे क्या?

फिलहाल सभी की नजरें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यह विवाद बातचीत से सुलझेगा या और लंबा खिंचेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

हालांकि डिप्टी सीएम केशव मौर्य की अपील ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार संतों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर है और किसी भी स्थिति में सौहार्द बिगड़ने नहीं देना चाहती।

The Prayagraj Mela dispute involving Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand and the mela administration has entered its seventh day, drawing attention across Uttar Pradesh. Deputy Chief Minister Keshav Prasad Maurya has appealed for peace and resolution, emphasizing respect for saints and religious traditions. The issue, linked to Magh Mela 2026, also raised security concerns after reports of alleged miscreants entering the Shankaracharya’s camp. The Uttar Pradesh government has assured dialogue, safety, and a peaceful environment at Prayagraj Sangam.

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