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फर्जी डीएसपी बनकर 72 लाख की ठगी: आदिवासी महिला से नौकरियों का झांसा देकर पैसे उड़ाए!

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AIN NEWS 1: छत्तीसगढ़ की एक आदिवासी महिला से पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 72 लाख रुपये ठगने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस ठगी के पीछे ऐसा व्यक्ति था, जिसने खुद को मध्य प्रदेश पुलिस का डीएसपी बताकर महिला का भरोसा जीता। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि जिस नाम का इस्तेमाल आरोपी ने किया, वही नाम असली सोशल मीडिया स्टार डीएसपी का भी है—जिनके यूट्यूब पर 35 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स, इंस्टाग्राम पर 36 लाख फॉलोअर्स, फेसबुक पर 22 लाख फॉलोअर्स और ट्विटर पर हजारों फॉलोअर्स हैं।

लेकिन जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने सबको हैरान कर दिया। ठगी करने वाला व्यक्ति असली डीएसपी नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के सीधी जिले का रहने वाला एक 29 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर निकला।

कैसे शुरू हुई ठगी की कहानी

यह कहानी 2016 से शुरू होती है, जब सड़क निर्माण का काम चल रहा था। इस काम में आरोपी संतोष पटेल जेसीबी ऑपरेटर के रूप में काम करता था। उसी दौरान उसकी मुलाकात कंजिया गांव की रहने वाली आदिवासी महिला—ललकी बाई—से हुई, जो रोज जंगल में बकरियां चराने जाती थी।

एक दिन बातचीत के दौरान आरोपी ने महिला से उसका मोबाइल नंबर ले लिया। कुछ समय बाद उसने फोन कर बताया कि वह “मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी बन गया” है। इतना ही नहीं, उसने महिला को भरोसा दिलाया कि वह उसके दोनों बेटों को भी पुलिस में भर्ती करवा सकता है।

उसने यह भी कहा कि उसकी खुद की नौकरी पैसे देकर लगी है और यदि महिला पैसा देगी तो उसके दोनों बेटों की भी नौकरी पक्की करवा देगा। यहीं से धोखे का सिलसिला शुरू हुआ।

2018 से 2025 तक चलता रहा ठगी का खेल

महिला अपने बेटों की नौकरी के लालच में आरोपी के झांसे में आ गई। उसने रिश्तेदारों से उधार लिया, अपनी जमीन तक बेच दी और 7 सालों में PhonePe व अन्य माध्यमों से कुल 72 लाख रुपये आरोपी के खाते में भेज दिए।

महिला को लगा कि उसके बेटे जल्द ही पुलिस में भर्ती हो जाएंगे। लेकिन जब सालों बीत गए और कोई नियुक्ति नहीं हुई, तब उसे शक हुआ।

छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच और बड़ा खुलासा

महिला ने पूरी घटना की शिकायत छत्तीसगढ़ पुलिस से की। पुलिस तुरंत हरकत में आई और मध्य प्रदेश के असली डीएसपी संतोष पटेल से संपर्क किया। असली अधिकारी ने यह सुनकर खुद भी आश्चर्य जताया क्योंकि उन्होंने महिला को कभी देखा या जाना तक नहीं था।

पुलिस ने महिला से वीडियो कॉल करवाया। महिला ने वीडियो में असली डीएसपी को देखकर कहा—“तुम ही हो, तुमने ही पैसे लिए हैं।”

यही देखकर असली डीएसपी भी हैरान रह गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मामला क्या है।

इसके बाद पुलिस ने जांच को और आगे बढ़ाया। बैंक खातों, फोन नंबर, लेन-देन और कॉल विवरण की जांच हुई। तभी खुलासा हुआ कि पैसे जिस व्यक्ति ने लिए, वह असली डीएसपी नहीं, बल्कि सीधी के चुरहट थाना क्षेत्र का रहने वाला एक जेसीबी ऑपरेटर संतोष पटेल है—जिसका नाम संयोग से असली अधिकारी के जैसा ही है।

असली DSP का नाम इस्तेमाल कर बनाई फर्जी पहचान

JCB ऑपरेटर संतोष पटेल ने असली डीएसपी की सोशल मीडिया पॉपुलैरिटी का फायदा उठाया। उसने अपने मोबाइल और सोशल मीडिया प्रोफाइल पर असली डीएसपी की वर्दी वाली तस्वीर लगाई और खुद को वही अधिकारी बताकर महिला को विश्वास दिलाया।

महिला को ना तो असली अधिकारी की जानकारी थी और ना ही वह असली-नकली की पहचान कर सकी। सात वर्षों तक वह इसी भ्रम में रही कि वह एक पुलिस अधिकारी से बात कर रही है जो उसके बेटों का भविष्य सुरक्षित कर देगा।

गिरफ्तारी और राहत

छत्तीसगढ़ पुलिस ने आरोपी जेसीबी ऑपरेटर को सीधी जिले से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद असली डीएसपी ने राहत की सांस ली क्योंकि उनका नाम इस धोखाधड़ी से जुड़ रहा था।

अब आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने जैसे गंभीर आरोपों में केस दर्ज हुआ है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या उसने किसी और को भी इसी तरह ठगा है।

महिला की आर्थिक बर्बादी

यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक गरीब आदिवासी महिला की त्रासदी भी है। महिला ने—

जमीन बेची

रिश्तेदारों से कर्ज लिया

अपनी सारी जमा-पूंजी गंवा दी

सब सिर्फ इस उम्मीद में कि उसके बेटे सरकारी नौकरी पा जाएंगे। लेकिन उसके सपने ठग के कारण पूरी तरह टूट गए।

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा

यह मामला एक बड़ा सबक देता है कि डिजिटल तरीकों से होने वाली ठगी अब किस स्तर पर पहुंच चुकी है। फर्जी पहचान, फोटो, प्रोफाइल और सोशल मीडिया का उपयोग कर धोखेबाज आसानी से किसी का भरोसा जीत लेते हैं।

पुलिस ने जनता से अपील की है कि—

नौकरी, पोस्टिंग या ट्रांसफर के नाम पर किसी को पैसा न दें

किसी अधिकारी की पहचान हमेशा सत्यापित करें

सोशल मीडिया प्रोफाइल या फोटो देखकर विश्वास न करें

The fake DSP Santosh Patel scam, where a tribal woman was cheated of ₹72 lakh in the name of police job recruitment, highlights the rising threat of digital impersonation and online fraud in India. This detailed article explains how a JCB operator used a fake police identity, social media photos, and false promises of government jobs to trick the victim over seven years. Keywords like fake DSP scam, police job fraud, Chhattisgarh tribal woman, and ₹72 lakh cheating are essential to understand the seriousness and increasing frequency of such cybercrimes across India.

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