AIN NEWS 1: फिरोजाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जलेसर रोड स्थित ब्रह्मलाल ट्रेडर्स आटा फैक्ट्री को सील कर दिया। इस फैक्ट्री में घटिया गेहूं के आटे में सफेद पाउडर मिलाने की आशंका जताई गई थी। अधिकारियों को मौके पर बड़े पैमाने पर संदिग्ध सामग्री मिली, जिसके बाद लगभग 20 लाख रुपये का माल जब्त कर लिया गया। फैक्ट्री का मालिक कार्रवाई के दौरान मौके से भाग निकला, जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

कैसे सामने आया मामला?
कुछ दिनों से विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ब्रह्मलाल आटा फैक्ट्री में खराब गुणवत्ता वाले गेहूं और चावल के आटे को मिलाकर नया आटा तैयार किया जाता है। इतना ही नहीं, आटे को ज्यादा सफेद दिखाने के लिए उसमें किसी तरह का सफेद पाउडर मिलाया जा रहा है।
इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त चंदन पांडेय के नेतृत्व में एक टीम ने शनिवार शाम फैक्ट्री पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या मिला?
टीम जब फैक्ट्री पहुंची, उस समय वहां आटा तैयार किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को 30 क्विंटल तैयार आटा मिला। इसके अलावा फैक्ट्री में सात बोरियां सफेद पाउडर भी मिलीं। प्राथमिक तौर पर यह पाउडर सेलखड़ी (कैल्शियम) जैसा लग रहा था, जिसे खाद्य पदार्थों में मिलाना खतरनाक माना जाता है।
इसके साथ ही लगभग 750 क्विंटल गेहूं का भंडार भी जब्त किया गया।
फैक्ट्री मालिक संजय गुप्ता मौके पर मौजूद तो थे, लेकिन सफेद पाउडर के बारे में पूछे जाने पर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और कुछ ही देर बाद वहां से फरार हो गए।
नमूने जांच के लिए भेजे गए
टीम ने गेहूं और आटे के दो-दो नमूने, और सफेद पाउडर का एक नमूना लिया। ये सभी नमूने जिला प्रशासन की अनुमति लेकर आगरा की लैब में भेजे जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट जल्द ही प्राप्त कर ली जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
घटिया आटे की पहचान क्यों मुश्किल है?
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, गेहूं के आटे में मिलावट पकड़ना आसान नहीं होता।
आटे में अगर चावल का आटा या इसी तरह की चीजें मिलाई जाएं, तो इसकी पहचान कभी-कभी स्वाद या बनावट से हो जाती है। लेकिन इस तरह के सफेद पाउडर को पहचानने के लिए लैब टेस्ट जरूरी होता है।
इसी वजह से आटे के नमूने कम ही लिए जाते हैं और मिलावट करने वाले इसका फायदा उठाते हैं।
क्या हो सकती है सजा?
सहायक आयुक्त ने बताया कि यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि आटे में अखाद्य चीजें मिलाई गई हैं, तो फैक्ट्री मालिक को भारी सजा हो सकती है।
कानून के मुताबिक इसमें:
तीन साल तक की जेल,
10 लाख रुपये तक का जुर्माना,
और फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबन – शामिल है।
विभाग ने फैक्ट्री का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चक्की फ्रेश नाम से बेचते थे आटा
स्थानीय बाजार में यह आटा “चक्की फ्रेश” नाम से बेचा जाता था। केवल फिरोजाबाद ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों में भी सप्लाई की जाती थी।
लोगों को लगता था कि उन्हें ताजा आटा मिल रहा है, लेकिन वास्तव में इसमें निम्न गुणवत्ता का गेहूं और संदिग्ध पाउडर मिलाया जा रहा था।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश यादव का कहना है कि यदि कैल्शियम जैसा पाउडर लंबे समय तक शरीर में जाता रहे, तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इससे:
हृदय की धड़कन प्रभावित हो सकती है
लिवर और किडनी पर तनाव बढ़ सकता है
किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है
बच्चों और बुजुर्गों में जोखिम और बढ़ जाता है
आटा रोजाना उपयोग होने वाली चीज है, इसलिए मिलावट का खतरा बेहद गंभीर माना जाता है।
फैक्ट्री मालिक पर मुकदमा दर्ज
रात में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश चंद्र ने फैक्ट्री मालिक संजय गुप्ता के खिलाफ मिलावटखोरी का केस दर्ज करा दिया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अधिकारियों ने कहा कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी, क्योंकि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।
Authorities in Firozabad sealed a flour factory after discovering suspected white powder mixed with low-quality wheat flour. During the raid, officials seized goods worth over ₹20 lakh, including wheat stock and adulterated flour. Samples were immediately sent to the Agra lab for testing. This incident highlights rising concerns over flour adulteration in India and the serious health risks associated with contaminated food products.


















