AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में विधवा पेंशन योजना के नाम पर चल रहा बड़ा फर्जीवाड़ा अब तेजी से सामने आ रहा है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जांच की गति बढ़ा दी है। पहली ही जांच में बड़ा खुलासा हुआ—कम से कम 25 विवाहित महिलाएं, जो अपने पति के जीवित होने पर भी खुद को विधवा बताकर पेंशन ले रही थीं।

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद कार्रवाई तेज
जिलाधिकारी ने इस घोटाले की शिकायत मिलते ही संबंधित विभागों को तुरंत जांच का आदेश दिया था। जांच टीम ने जब रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि कई लाभार्थी वर्षों से गलत जानकारी देकर सरकारी पैसा उठा रही थीं।
इसके बाद डीएम ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए एसएसपी को कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।
एसएसपी ने गठित की SIT
घोटाले का दायरा बढ़ता देख, एसएसपी ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खोलने में लगी है। SIT का सबसे पहला काम—उन महिलाओं की पहचान करना था जिन्होंने गलत दस्तावेज दिए और पेंशन हासिल की।
सबसे पहले 25 विवाहित महिलाओं के नाम सामने आए, जिन पर अब धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे धाराओं में FIR दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
कैसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा?
जांच में पता चला कि कई महिलाएं अपनी शादी के वर्षों बाद तक खुद को विधवा बताए बैठी थीं। कुछ महिलाएं तो अपने पति के साथ ही रहती थीं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में वे विधवा दर्ज थीं।
सत्यापन प्रक्रिया में हुई लापरवाहियों ने इस गड़बड़ी को सालों तक छिपाए रखा।
अधिकारियों ने बताया कि—
• कई महिलाओं ने फर्जी हलफनामे दिए
• कुछ ने गलत फोटो और पुराने दस्तावेज लगाकर लाभ लिया
• कई मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान कर्मचारियों ने जांच ठीक से नहीं की
अब बिचौलियों और कर्मचारियों पर भी गिरेगा डंडा
इस घोटाले में सिर्फ लाभार्थी महिलाएं ही शामिल नहीं थीं। SIT को शक है कि यह पूरा खेल बिचौलियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा था।
कई बिचौलिये महिलाओं को फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करते थे और बदले में कमीशन लेते थे।
SIT अब निम्न पर ध्यान दे रही है—
1. कौन-कौन से बिचौलिये इस काम में शामिल थे?
2. कौन कर्मचारी लाभार्थियों के दस्तावेज सत्यापित करते थे?
3. किस स्तर पर गड़बड़ी की गई थी?
4. क्या पेंशन मंजूरी देने वाले अधिकारियों की भी भूमिका थी?
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि सबूत मिलने पर कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार को लाखों का हुआ नुकसान
प्रारंभिक अनुमान यह है कि इन 25 महिलाओं ने कई वर्षों तक पेंशन ली है, जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
अगर जांच में और नाम सामने आते हैं, तो यह रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है।
DM का सख्त संदेश—ऐसी धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी योजनाओं में होने वाली धोखाधड़ी पर अब कड़ी नजर रखी जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी—
“जो भी सरकारी धन का दुरुपयोग करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।”
आम लोगों के लिए संदेश
सरकार की विधवा पेंशन योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को सहारा देना है।
लेकिन ऐसे फर्जीवाड़े के कारण—
• वास्तविक पात्र महिलाएं लाभ से वंचित होती हैं
• सरकारी धन का दुरुपयोग होता है
• भ्रष्टाचार बढ़ता है
अधिकारी अब जिलेभर में लाभार्थियों का नया सत्यापन अभियान चलाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।
The Bareilly widow pension scam has triggered a major administrative response in Uttar Pradesh. A Special Investigation Team (SIT) has been formed to probe how 25 married women illegally availed widow pensions through fraudulent documents. The district administration has ordered strict action against brokers, verification staff, and anyone involved in this government pension fraud. As the SIT expands its investigation, more cases of social welfare scam and pension mismanagement are expected to surface, making this one of the most significant UP news developments.


















