AIN NEWS 1: बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई ऊंचाई देने वाला ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग अब बिहार पहुंच चुका है। यह भव्य शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से एक लंबी और जटिल यात्रा पूरी कर बिहार के गोपालगंज जिले में लाया गया है। इसकी लंबाई 33 फीट और वजन लगभग 210 टन बताया जा रहा है, जो इसे विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग बनाता है।
इस ऐतिहासिक शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को गोपालगंज स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की जाएगी। इस अवसर पर देशभर से संत, महंत, धर्माचार्य और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
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🚩 महाबलीपुरम से बिहार तक की कठिन यात्रा
यह शिवलिंग तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्प केंद्र महाबलीपुरम में विशेष ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया है। इसे तैयार करने में कुशल कारीगरों ने महीनों तक मेहनत की। आकार और वजन इतना अधिक होने के कारण इसे बिहार तक लाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती थी।
विशेष ट्रेलरों, भारी वाहनों और सुरक्षा व्यवस्था के साथ इस शिवलिंग को हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर बिहार लाया गया। रास्ते में कई राज्यों से होकर गुजरते समय श्रद्धालुओं ने जगह-जगह रुककर शिवलिंग के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की।
🕉️ गोपालगंज में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
जैसे ही यह विशाल शिवलिंग गोपालगंज पहुंचा, पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने फूल, बेलपत्र, दूध और जल से शिवलिंग की पूजा की। स्थानीय लोगों के लिए यह क्षण भावनात्मक और गौरव से भरा रहा।
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने जीवन में इतना विशाल और भव्य शिवलिंग पहले कभी नहीं देखा। लोगों का विश्वास है कि इस शिवलिंग की स्थापना से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ेगी और बिहार धार्मिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।
🛕 विराट रामायण मंदिर का महत्व
जिस विराट रामायण मंदिर में इस शिवलिंग की स्थापना हो रही है, वह पहले से ही देश के सबसे भव्य धार्मिक परियोजनाओं में शामिल है। यह मंदिर अपने विशाल आकार, रामायण आधारित स्थापत्य कला और आध्यात्मिक दृष्टि से खास माना जाता है।
अब विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना से यह मंदिर न केवल रामभक्तों बल्कि शिवभक्तों के लिए भी एक प्रमुख आस्था केंद्र बन जाएगा। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थल भविष्य में काशी और उज्जैन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की श्रेणी में आ सकता है।
📅 17 जनवरी को होगा भव्य स्थापना समारोह
17 जनवरी को शिवलिंग की स्थापना के दिन विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, हवन, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन और मंदिर समिति मिलकर व्यवस्थाएं कर रही हैं। अनुमान है कि स्थापना समारोह में लाखों श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं।
🌍 बिहार के धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
इस शिवलिंग की स्थापना से बिहार के धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अभी तक बिहार मुख्य रूप से बोधगया, राजगीर और वैशाली के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब गोपालगंज भी धार्मिक मानचित्र पर एक अहम स्थान बना सकता है।
स्थानीय व्यापारियों, होटल उद्योग और परिवहन सेवाओं को भी इससे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
🙏 श्रद्धालुओं की आस्था और भावनाएं
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह शिवलिंग केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। कई लोगों ने इसे “बिहार के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद” बताया।
स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि इस शिवलिंग की स्थापना से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि आएगी।
विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार पहुंचना केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पर्यटन पहचान को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक क्षण है। 17 जनवरी को होने वाली स्थापना के साथ ही गोपालगंज और विराट रामायण मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक नया प्रमुख तीर्थ स्थल बनकर उभरेगा।
The arrival of the world’s largest Shivling in Bihar marks a significant moment in India’s religious and cultural landscape. Crafted in Mahabalipuram, Tamil Nadu, this 33 feet long and 210-ton Shivling will be installed at the Virat Ramayan Temple in Gopalganj on January 17. The grand installation ceremony is expected to attract devotees from across the country, boosting religious tourism in Bihar and strengthening its spiritual identity.






