AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ भाई ने अपनी ही अनपढ़ बहन के भरोसे का फायदा उठाकर उसकी मेहनत की कमाई से खरीदी गई संपत्ति अपने नाम करवा ली। बहन को यह समझ भी नहीं आया कि जिस दस्तावेज़ पर वह हस्ताक्षर कर रही है, वही उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ठगी बन जाएगा।

हरियाणा की रहने वाली सरताज खानम मूल रूप से पढ़ी-लिखी नहीं हैं। लंबे समय से वह गुरुग्राम में सिलाई मशीन चलाकर अपना गुजर-बसर कर रही थीं। मेहनत से पैसा जोड़कर उन्होंने फिरोजाबाद के रसूलपुर से नालबंद चौराहा के बीच एक मकान और दुकान खरीदी थी। यह संपत्ति उनके भविष्य का सहारा थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका अपना ही भाई आज़ाद इस सपने को उनसे छीन लेगा।
भाई का ‘SIR’ वाला बहाना
सरताज खानम ने बताया कि एक दिन उनके भाई आज़ाद का फोन आया। उसने घबराते हुए कहा कि “SIR का पुनरीक्षण चल रहा है। कागजात चेक हो रहे हैं। अगर तुरंत आगरा नहीं आईं और कागज पूरे नहीं किए, तो सरकार देश से बाहर निकाल देगी।”
अनपढ़ और सरकारी प्रक्रियाओं से अनजान सरताज डर गईं। उन्हें लगा कि सच में सरकार कोई कार्रवाई कर सकती है। भाई पर भरोसा करते हुए वह तुरंत गुरुग्राम से आगरा पहुँच गईं।
यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि ‘SIR’ एक सरकारी समीक्षा प्रक्रिया जैसी चीज़ नहीं थी, बल्कि यह सिर्फ एक बहाना था — एक ऐसा बहाना जिसका इस्तेमाल उनके भाई ने उनको दबाव में लाने और भ्रमित करने के लिए किया।
तहसील में क्या हुआ?
सरताज जब आज़ाद के साथ तहसील पहुँचीं, तो उन्हें बिना समझाए कुछ दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। तहसील के कर्मचारियों ने उनसे सिर्फ इतना पूछा कि क्या वह ये मकान–दुकान ‘गिफ्ट’ में दे रही हैं?
गिफ्ट’ शब्द का मतलब सरताज नहीं समझ पाईं। उन्हें लगा कि यह कोई औपचारिकता है, शायद सरकारी प्रक्रिया का एक हिस्सा। भाई के कहने पर उन्होंने बिना एक शब्द पूछे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर दिए।
लेकिन कुछ ही मिनटों में उनकी सारी ज़िंदगी की सबसे कीमती संपत्ति उनके भाई के नाम ट्रांसफर हो चुकी थी।
बैनामा अपने नाम करा लिया भाई ने
सरताज खानम को इस ट्रांसफर की जानकारी काफी समय बाद लगी। जब उन्हें शक हुआ और उन्होंने कागजात निकलवाए, तो पता चला कि जिस मकान और दुकान पर उन्होंने सालों की मेहनत लगाई, वह अब उनके भाई आज़ाद के नाम हो चुका था।
यह सुनते ही सरताज के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें कभी नहीं लगा था कि उनका सगा भाई उन्हें ऐसे धोखे में रखकर उनकी पूरी संपत्ति हड़प लेगा।
अब दर–दर न्याय की तलाश में पीड़िता
संपत्ति के कागजात भाई के नाम हो जाने के बाद सरताज खानम अब दर–दर न्याय की गुहार लगा रही हैं।
वह अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं
शिकायत दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं
लोगों से सहायता मांग रही हैं कि उनके साथ न्याय हो
उनका कहना है कि वह अनपढ़ हैं और धोखे की शिकार हुई हैं। अगर उन्हें ‘गिफ्ट’ का मतलब समझाया जाता या किसी ने चेतावनी दी होती, तो वह अपनी संपत्ति कभी किसी को नहीं सौंपतीं।
अकेली महिला, बड़ा संघर्ष
इस पूरे मामले में सबसे दुखद बात यह है कि सरताज खानम एक अकेली महिला हैं, जो गरीबी और संघर्ष के बीच अपनी जिंदगी चला रही हैं। भाई के धोखे ने न सिर्फ उनकी संपत्ति छीनी, बल्कि उनका भरोसा और आत्मविश्वास भी तोड़ दिया।
सरताज का कहना है,
“मैंने अपने भाई पर विश्वास किया था, लेकिन उसी ने मेरी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी।”
कानूनी लड़ाई की कोशिश जारी
सरताज अब कानूनी रास्ता अपनाने की कोशिश कर रही हैं। वह चाहती हैं कि उनके साथ हुए धोखे की जांच हो और उनकी संपत्ति उन्हें वापस मिले।
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी उनके समर्थन में आवाज उठाई है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और ऐसे मामलों में जागरूकता बढ़े।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना सिर्फ एक परिवार का विवाद नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे अनपढ़, गरीब और अकेली महिलाएँ अक्सर ऐसे धोखों का शिकार बन जाती हैं।
सरकारी प्रक्रियाओं की जानकारी न होना
परिवार पर अधिक भरोसा
डर फैलाकर दबाव डालना
कागजों को पढ़कर समझाने वाला कोई न होना
ये सभी बातें मिलकर बड़ी ठगी का रूप ले लेती हैं।
In a shocking property fraud case from Firozabad, Uttar Pradesh, an illiterate woman from Haryana was manipulated by her own brother using a fake SIR review excuse. The victim was tricked into signing documents that transferred her house and shop to her brother’s name. This incident highlights rising property fraud cases in India, especially involving illiterate individuals, and emphasizes the need for awareness, legal protection, and public education.


















