AIN NEWS 1: दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने हाल ही में एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है जो मशहूर वेब सीरीज़ ‘मनी हाइस्ट’ से प्रेरित होकर हाई-टेक ठगी कर रहा था। इस गैंग ने निवेश के नाम पर देशभर के लोगों से करीब 150 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने इस गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो खुद को ‘प्रोफेसर’, ‘फ्रेडी’ और ‘अमांडा’ नाम से पहचानते थे।
यह मामला तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट को बड़ी संख्या में ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतें मिलने लगीं। पीड़ितों ने बताया कि उन्हें एक प्राइवेट व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़कर ऑनलाइन निवेश के लिए लुभावने ऑफर दिए गए। जब लोगों ने निवेश किया, तो शुरुआती दिनों में उन्हें छोटे-छोटे मुनाफे भी दिखाए गए ताकि वे भरोसा कर लें। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद अचानक सभी ग्रुप बंद कर दिए गए और ठग फरार हो गए।
‘मनी हाइस्ट’ से ली गई प्रेरणा
पुलिस जांच में पता चला कि ये आरोपी नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय सीरीज़ “मनी हाइस्ट” के फैन थे। उन्होंने उसी स्टाइल में अपने किरदारों के नाम रखे — जैसे “प्रोफेसर” (गैंग लीडर), “फ्रेडी” (टेक एक्सपर्ट) और “अमांडा” (सोशल हैंडलर)। उनका काम बेहद प्रोफेशनल तरीके से संगठित था।
वे सीक्रेट टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में काम करते थे ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। पुलिस के अनुसार, इनके पास विदेशी बैंकों में बने अकाउंट्स और क्रिप्टो वॉलेट्स भी पाए गए हैं, जिनके जरिए पैसा विदेश भेजा जा रहा था।
दिल्ली पुलिस की स्मार्ट ट्रैकिंग से खुला राज़
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने जब ट्रांजैक्शन डेटा और मोबाइल लोकेशन की जांच की, तो कुछ आईपी एड्रेस दिल्ली और नोएडा से जुड़े मिले। इसके बाद तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई।
पुलिस टीम ने करीब दो महीने तक डिजिटल ट्रैकिंग की, तब जाकर यह गिरोह पकड़ा गया।
जांच में सामने आया कि ये लोग डार्क वेब का इस्तेमाल करके फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाते थे। वे विदेशी स्टॉक मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देते थे।
निवेश का जाल कैसे बिछाया गया?
आरोपी पहले कुछ भरोसेमंद लोगों को टारगेट करते थे और उन्हें निवेश पर “गैरकानूनी रूप से अधिक रिटर्न” का लालच देते थे। शुरुआत में छोटे निवेशों पर नकली मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीतते थे।
जब ग्रुप में कई लोग जुड़ जाते, तो अचानक कंपनी की वेबसाइट और ग्रुप बंद कर दिए जाते। इस तरह उन्होंने देशभर में सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये वसूले।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि –
“गिरफ्तार आरोपी खुद को सीरिज के किरदारों की तरह पेश करते थे और उसी स्टाइल में बात करते थे। उनके पास से कई विदेशी मोबाइल सिम, लैपटॉप, नकली दस्तावेज़ और ई-वॉलेट डिटेल्स बरामद किए गए हैं।”
‘प्रोफेसर’ था मास्टरमाइंड
जांच में यह सामने आया कि इस गैंग का लीडर खुद को ‘प्रोफेसर’ कहता था। वह पहले एक आईटी कंपनी में काम कर चुका था और उसे नेटवर्क सिक्योरिटी और क्रिप्टो ट्रेडिंग की गहरी जानकारी थी। उसने अपने दो साथियों – ‘फ्रेडी’ और ‘अमांडा’ – के साथ मिलकर यह स्कीम तैयार की।
‘फ्रेडी’ तकनीकी हिस्से को संभालता था, जबकि ‘अमांडा’ सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ग्रुप में जोड़ने का काम करती थी।
गिरफ्तारियां और आगे की जांच
दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों को राजधानी से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक कार्ड, और नकली डॉक्युमेंट्स बरामद किए हैं।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इस गैंग के विदेशी नेटवर्क से भी संबंध हैं और पैसे को कहां ट्रांसफर किया गया।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केस एक बड़े साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड का हिस्सा हो सकता है।
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में निवेश न करें। अगर कोई अत्यधिक मुनाफे का वादा करे, तो तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
साथ ही, किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करें।
यह मामला बताता है कि कैसे वेब सीरीज़ और फिल्मों से प्रेरित होकर अपराधी नई-नई ठगी की योजनाएं बना रहे हैं। ‘मनी हाइस्ट’ जैसी कहानी को इन ठगों ने असल ज़िंदगी में उतारने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार कानून के शिकंजे से बच नहीं पाए।
दिल्ली पुलिस की तकनीकी समझ और तेज़ी से की गई कार्रवाई ने इस 150 करोड़ के बड़े साइबर फ्रॉड को उजागर किया है।
In a shocking cybercrime inspired by the Netflix series Money Heist, Delhi Police arrested three fraudsters known as ‘Professor’, ‘Freddy’, and ‘Amanda’. The gang operated secret WhatsApp and Telegram groups to lure people into fake investment schemes, cheating them of over ₹150 crore. This Delhi cyber scam reveals how online investment fraud is evolving with cinematic influence, making it one of the biggest cyber crime cases in India.



















