ममता बनर्जी का केंद्र पर बड़ा हमला: “चुनाव से तीन महीने पहले ही SIR क्यों लागू किया?”

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AIN NEWS 1: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में मुर्शिदाबाद में आयोजित एक बड़ी जनसभा में केंद्र सरकार और बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले SIR (Social Impact Rating) जैसे सिस्टम को लागू किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र सरकार चुनाव के नज़दीक आते ही नए-नए नियम और योजनाएँ क्यों लागू करती है? क्या इन योजनाओं का उद्देश्य सिर्फ चुनावी फायदे लेना है?

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उनके भाषण का मुख्य फोकस था—केंद्र की नीतियों पर सवाल, राज्य सरकार की योजनाओं का भरोसा, और जनता को “बाहरी लालच” से बचने की अपील।

चुनाव से पहले SIR लागू करने पर उठे सवाल

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अचानक ही SIR को लागू कर दिया, वह भी तब जब राष्ट्रीय चुनाव बस तीन महीने दूर हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से यह योजना केवल कागज़ों में थी, लेकिन जैसे ही चुनाव करीब आए, इसे तुरंत लागू कर दिया गया। ममता के अनुसार, यह जनता की भलाई के लिए कम और राजनीतिक लाभ के लिए ज्यादा किया गया कदम है।

उन्होंने कहा—

“जनता को समझना चाहिए कि चुनाव के समय अचानक लागू होने वाली योजनाओं के पीछे राजनीतिक मंशा ज्यादा होती है, न कि जनहित।”

“बिहार में 10 हजार दिए और चुनाव के बाद बुलडोजर चला दिया”

ममता बनर्जी ने अपनी बात में बिहार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में “गोदी सरकार” ने कुछ लोगों को चुनाव से पहले 10 हजार रुपये दिए, लेकिन चुनाव के बाद उन पर कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाए गए। उनके अनुसार, यह तरीका वोट खरीदने और फिर जनता को डराने का है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कदम लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक हैं, क्योंकि मतदाता को आकर्षित करने के लिए पैसे दिए जाते हैं और बाद में उन पर दबाव बनाया जाता है।

“केंद्र की सब्सिडी पर निर्भर न रहें, राज्य की योजनाओं पर भरोसा करें”

ममता ने जनता से अपील की कि वे केंद्र की सब्सिडी या योजनाओं पर पूरी तरह निर्भर न हों। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सामाजिक कल्याण की कई मजबूत योजनाएँ चल रही हैं—जैसे:

लक्ष्मी भंडार

स्वास्थ्य साथी

कन्याश्री

रूपाश्री

फरिश्ता योजना

इन योजनाओं से राज्य के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है। ममता ने कहा कि केंद्र हर बार चुनाव के समय कुछ न कुछ आर्थिक प्रलोभन सामने लाता है, लेकिन असली सुरक्षा और स्थायी मदद राज्य सरकार की नीतियों से मिलती है।

मुर्शिदाबाद में क्यों बढ़ी यह राजनीतिक गर्मी?

मुर्शिदाबाद हमेशा से राजनीतिक रूप से सक्रिय जिला माना जाता है। यहां विभिन्न पार्टियां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में रहती हैं। ममता बनर्जी की इस सभा को भी एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि आगामी चुनावों में मुर्शिदाबाद की सीटें बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

इस बार उनका भाषण पहले से ज्यादा तीखा और सीधा था, जिससे यह साफ दिखता है कि TMC आने वाले चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है और केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए लोगों का भरोसा जीतना चाहती है।

चुनावों के समय योजनाएँ लागू करने पर पुराना विवाद

चुनाव आयोग कई बार कह चुका है कि चुनाव घोषणा पत्र से पहले कोई भी सरकार ऐसी योजनाएँ लागू न करे, जो सीधे मतदाताओं को प्रभावित करें। हालांकि केंद्र सरकार का दावा होता है कि ये “राष्ट्रीय स्तर पर चल रही योजनाएँ” हैं, इसलिए इन्हें चुनावी नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

लेकिन विपक्षी पार्टियां, खासकर ममता बनर्जी, इसे “चुनावी स्टंट” बताती रही हैं।

इस बार भी SIR योजना को लेकर वही विवाद फिर उठ खड़ा हुआ है।

ममता बनर्जी का संदेश—“अपनी ताकत पहचानें”

अपने भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने लोगों को यह भी समझाया कि लोकतंत्र में जनता की शक्ति सबसे ऊपर होती है। उन्होंने कहा कि अगर लोग जागरूक होंगे, तो उन्हें न तो पैसे से खरीदा जा सकता है और न ही उन्हें प्रलोभन देकर दिशा बदली जा सकती है।

उन्होंने कहा—

“केंद्र चाहे जितनी योजनाएँ लागू करे, असली ताकत आपके वोट में है। आपका निर्णय देश का भविष्य तय करेगा।”

क्या SIR राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बनेगा?

SIR की घोषणा के बाद विपक्षी पार्टियों ने इसे लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। ममता बनर्जी के बयान ने इसे और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमाने की पूरी संभावना है।

चुनाव करीब हैं, राजनीतिक माहौल गर्म है, और ऐसे में हर कदम, हर बयान, और हर नई योजना चर्चा का विषय बन रही है।

Mamata Banerjee has strongly criticized the Centre for implementing the SIR scheme just three months before the elections, alleging that the timing reveals political intentions rather than public welfare. Her speech in Murshidabad highlighted concerns surrounding the SIR rollout, BJP’s election strategies, central subsidies, and voter influence. This article covers the full controversy, political reactions, and the broader impact of SIR on upcoming Indian elections.

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