AIN NEWS 1: मुंबई जैसे महानगर में हर दिन लाखों लोग शेयर बाजार में किस्मत आज़माते हैं। कोई छोटी कमाई करता है, कोई बड़ा नुकसान झेलता है, और कोई सालों की मेहनत के बाद थोड़ा-बहुत मुनाफा कमा पाता है। लेकिन बहुत कम लोगों की ज़िंदगी ऐसे बदलती है, जैसी मुंबई के एक साधारण शेयर ट्रेडर गजानन राजगुरु की बदली — और वो भी महज़ 20 मिनट में।
यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन इसमें न कोई काल्पनिक मोड़ है और न ही बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें। यह मामला पूरी तरह सच है और अब बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है।
एक आम ट्रेडर, एक सामान्य दिन
गजानन राजगुरु कोई बड़े निवेशक नहीं थे। न ही वे किसी कॉरपोरेट हाउस से जुड़े थे। वे मुंबई में रहने वाले एक सामान्य शेयर ट्रेडर थे, जो वर्षों से शेयर बाजार में काम कर रहे थे। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग का उन्हें अच्छा अनुभव था और वे बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते थे।
उस दिन भी बाकी दिनों की तरह उन्होंने अपना ट्रेडिंग टर्मिनल खोला। न उन्हें किसी चमत्कार की उम्मीद थी और न ही किसी बड़े मुनाफे का सपना। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने कोटक सिक्योरिटीज के डीमैट अकाउंट पर नज़र डाली, वे हैरान रह गए।
जब अकाउंट में दिखे 40 करोड़ रुपये
गजानन के डीमैट अकाउंट में अचानक 40 करोड़ रुपये दिखने लगे। यह रकम उनकी नहीं थी, न ही उन्होंने कोई बड़ा निवेश किया था। पहले कुछ सेकंड तक उन्हें लगा कि शायद सिस्टम में कोई गड़बड़ी है या उन्होंने गलत देख लिया है।
लेकिन बार-बार चेक करने पर भी वही आंकड़ा सामने था।
यह कोई धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि कोटक सिक्योरिटीज के सिस्टम में हुई एक तकनीकी गलती (Technical Glitch) का नतीजा था। इस गलती की वजह से उनके अकाउंट में इतनी बड़ी रकम अस्थायी रूप से क्रेडिट हो गई।
डर, उलझन और फिर एक बड़ा फैसला
ऐसे हालात में ज़्यादातर लोग घबरा जाते। कुछ लोग अकाउंट लॉगआउट कर देते, तो कुछ तुरंत ब्रोकरेज से संपर्क करते। लेकिन गजानन ने एक अलग रास्ता चुना।
उन्होंने यह समझा कि यह पैसा उनका नहीं है, लेकिन जब तक सिस्टम में दिख रहा है, तब तक वे इससे ट्रेड कर सकते हैं। उन्होंने कोई पैसा निकाला नहीं, न ही ट्रांसफर किया। उन्होंने सिर्फ ट्रेडिंग की।
यह एक बड़ा जोखिम था।
F&O ट्रेडिंग: जहां मिनटों में सब कुछ बदल जाता है
गजानन ने इस रकम का इस्तेमाल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए किया। यह शेयर बाजार का सबसे जोखिम भरा हिस्सा माना जाता है।
शुरुआत अच्छी नहीं रही।
पहले कुछ मिनटों में उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। मुनाफे की जगह घाटा बढ़ने लगा। आम निवेशक होता तो शायद घबरा जाता और ट्रेड बंद कर देता। लेकिन गजानन ने अपने अनुभव पर भरोसा किया।
उन्होंने अपनी रणनीति बदली, पोज़िशन एडजस्ट की और मार्केट मूवमेंट को ध्यान से पढ़ा।
घाटा मुनाफे में कैसे बदला?
यह वही मोड़ था, जहां किस्मत और कौशल एक साथ काम करते हैं।
कुछ ही मिनटों के भीतर बाजार ने करवट ली। जिन सौदों में नुकसान हो रहा था, वही फायदे में बदलने लगे। देखते-देखते गजानन ने करीब 2.38 करोड़ रुपये का कुल प्रॉफिट कमा लिया।
टैक्स, चार्ज और अन्य कटौतियों के बाद उनके पास लगभग 1.75 करोड़ रुपये बचते हैं।
यह सब कुछ 20 मिनट से भी कम समय में हुआ।
जब ब्रोकरेज को समझ आई अपनी गलती
थोड़ी देर बाद कोटक सिक्योरिटीज को अपनी तकनीकी गलती का पता चला। कंपनी ने तुरंत गजानन के अकाउंट से 40 करोड़ रुपये वापस ले लिए।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ।
ब्रोकरेज हाउस ने गजानन से यह भी कहा कि जो मुनाफा हुआ है, वह भी उनका नहीं है और उसे वापस किया जाए। कंपनी का तर्क था कि यह पैसा उनकी गलती की वजह से बना है।
गजानन इससे सहमत नहीं हुए।
मामला पहुंचा बॉम्बे हाई कोर्ट
जब दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनी, तो मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। यहां सवाल सिर्फ पैसों का नहीं था, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी और नैतिकता का भी था।
कोर्ट के सामने मुख्य सवाल ये थे:
क्या ट्रेडर ने कोई धोखाधड़ी की?
क्या तकनीकी गलती से मिले फंड से कमाया गया मुनाफा ब्रोकरेज का है?
क्या एक ट्रेडर की स्किल और अनुभव को नजरअंदाज किया जा सकता है?
हाई कोर्ट का अहम और स्पष्ट फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बेहद अहम टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि:
गजानन ने कोई धोखाधड़ी नहीं की।
उन्होंने पैसा निकाला नहीं, सिर्फ ट्रेड किया।
मुनाफा उनकी ट्रेडिंग स्किल, अनुभव और रिस्क लेने की क्षमता से आया।
कोर्ट के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बाजार की समझ से मुनाफा कमाता है, तो केवल तकनीकी गलती का हवाला देकर ब्रोकरेज उस पर दावा नहीं कर सकता।
अंतरिम राहत: 1.75 करोड़ ट्रेडर के पास रहेंगे
हाई कोर्ट ने फिलहाल 1.75 करोड़ रुपये गजानन के पास रखने का अंतरिम आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला अगली सुनवाई में लिया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई फरवरी 2026 में निर्धारित की गई है।
यह केस क्यों है इतना खास?
यह मामला सिर्फ एक ट्रेडर की कहानी नहीं है। यह पूरे शेयर बाजार सिस्टम के लिए एक सीख है।
यह दिखाता है:
टेक्निकल सिस्टम की जवाबदेही कितनी ज़रूरी है
ब्रोकरेज हाउस की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होती है
ट्रेडर की स्किल को हल्के में नहीं लिया जा सकता
F&O ट्रेडिंग: मौका और खतरा दोनों
यह कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही चेतावनी भी देती है।
हकीकत यह है कि:
F&O ट्रेडिंग में हर 10 में से 9 निवेशक नुकसान उठाते हैं
इसमें मुनाफा उतना ही तेज़ है, जितना नुकसान
अनुभव और अनुशासन के बिना यह रास्ता बेहद खतरनाक है
गजानन का मामला अपवाद है, नियम नहीं।
किस्मत, मेहनत और सही समय का मेल
गजानन राजगुरु की कहानी यह सिखाती है कि किस्मत तभी साथ देती है, जब इंसान मौके को पहचानने और संभालने की काबिलियत रखता हो।
यह कहानी एक सपने जैसी है, लेकिन साथ ही एक कड़वी सच्चाई भी याद दिलाती है — शेयर बाजार में कोई गारंटी नहीं होती।
A Mumbai-based stock trader unexpectedly earned ₹1.75 crore after a technical glitch credited ₹40 crore into his Kotak Securities demat account. Using his experience in futures and options trading, he made profits that later became the subject of a major Bombay High Court case. The court ruled that profits earned through skill and market knowledge cannot be claimed by the brokerage firm, making this case one of the most discussed stock market technical glitch incidents in India.



















