AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रयागराज में आगामी महाकुंभ और माघ मेले के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की मूर्ति एवं शिविर लगाए जाने से जुड़े मामले में सपा नेता संदीप यादव के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद न सिर्फ स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है, बल्कि यह मामला अब प्रदेश स्तर की राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
गुंडा एक्ट के तहत नोटिस, जिला बदर की चेतावनी
प्रशासन की ओर से संदीप यादव को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में उनसे पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की जाए। इसका अर्थ यह है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उन्हें प्रयागराज जिले की सीमाओं से बाहर भेजा जा सकता है।
यह नोटिस सहायक पुलिस आयुक्त कर्नलगंज की संस्तुति पर जारी किया गया है। इसके पीछे थाना जॉर्जटाउन प्रभारी की 29 दिसंबर की एक विस्तृत रिपोर्ट को आधार बनाया गया है, जिसमें संदीप यादव को “आपराधिक प्रवृत्ति का दुस्साहसिक व्यक्ति” बताया गया है।
पुलिस रिपोर्ट में क्या-क्या आरोप?
पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, संदीप यादव प्रयागराज के मालवीय रोड स्थित मालवीय नगर क्षेत्र के निवासी हैं और उनकी उम्र करीब 38 वर्ष बताई गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनका आपराधिक इतिहास लंबा रहा है और वह क्षेत्र में अपने प्रभाव और डर के जरिए वर्चस्व बनाए रखते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उनके भय के कारण आम नागरिक उनके खिलाफ न तो थाने में शिकायत दर्ज कराने का साहस कर पाते हैं और न ही अदालत में गवाही देने को तैयार होते हैं। पुलिस का दावा है कि यही वजह है कि उनके खिलाफ कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाती।
धरना, चक्का जाम और बिना अनुमति प्रदर्शन के आरोप
पुलिस रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि संदीप यादव ने कई बार बिना प्रशासनिक अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम किए। आरोप है कि वह इन गतिविधियों के जरिए लोगों को गुमराह कर भीड़ जुटाते हैं और माहौल को उत्तेजित करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पुलिस ने इसे गंभीर मानते हुए संदीप यादव पर कठोर कार्रवाई की सिफारिश की।
महाकुंभ और मुलायम सिंह यादव का शिविर बना विवाद की जड़
बताया जा रहा है कि माघ मेला क्षेत्र में समाजवादी पार्टी से जुड़े मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान की ओर से एक शिविर लगाया जा रहा था। इस शिविर में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा भी स्थापित की जानी थी।
सूत्रों के अनुसार, 1 जनवरी को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा इस शिविर का उद्घाटन प्रस्तावित था। हालांकि, संदीप यादव के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने के बाद यह कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
संदीप यादव का पलटवार: सरकार पर लगाए आरोप
कार्रवाई के बाद संदीप यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि योगी सरकार और जिला प्रशासन को “श्रद्धेय नेता जी” यानी मुलायम सिंह यादव का शिविर आंखों में चुभ रहा है। उनका कहना है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और समाजवादी विचारधारा को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
अखिलेश यादव बोले – PDA समाज आहत
इस मामले में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि संदीप यादव के खिलाफ की गई कार्रवाई से PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज आहत हुआ है। अखिलेश यादव ने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।
उनका कहना है कि महाकुंभ जैसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन में समाजवादी पार्टी की भागीदारी से सरकार असहज है, इसलिए इस तरह की कार्रवाइयां की जा रही हैं।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून और तथ्यों के आधार पर की गई है। पुलिस का दावा है कि गुंडा एक्ट के तहत नोटिस कोई सजा नहीं है, बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि संदीप यादव संतोषजनक जवाब देते हैं और यह साबित कर पाते हैं कि आरोप निराधार हैं, तो आगे की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
राजनीतिक रंग लेता मामला
इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। महाकुंभ, मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा और समाजवादी पार्टी की सक्रियता ने इसे एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल दिया है। आने वाले दिनों में संदीप यादव का जवाब, प्रशासन का रुख और समाजवादी पार्टी की रणनीति इस मामले की दिशा तय करेगी।
फिलहाल प्रयागराज की राजनीति और प्रदेश की सियासत में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
The action under the Goonda Act against Samajwadi Party leader Sandeep Yadav in Prayagraj has sparked a major political controversy ahead of Mahakumbh and Magh Mela 2026. The case is linked to the proposed installation of Mulayam Singh Yadav’s statue and the Samajwadi Party camp, drawing reactions from Akhilesh Yadav and raising questions over political vendetta, law and order, and PDA politics in Uttar Pradesh.



















