AIN NEWS 1: मुंबई की वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि शहर में मौजूद लगभग 1 करोड़ मतदाताओं में से करीब 11 लाख नाम ऐसे हैं, जो दो से अधिक बार दर्ज हैं। यानी एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग जगहों पर बार-बार लिस्ट में दिखाई दे रहा है। यह मामला न केवल चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि मतदाता सूची की सफाई करना आज भी एक बड़ी चुनौती है।

मुद्दे की शुरुआत कैसे हुई?
कई सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और स्थानीय नागरिकों ने लंबे समय से यह शिकायत की थी कि मुंबई में वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी है। लोग बताते थे कि कई बार उनका नाम खुद ही दो या तीन बार अलग-अलग बूथों पर मिल जाता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अपने नाम लिस्ट में खोजने में काफी परेशानी होती है, क्योंकि उनका वास्तविक एंट्री ही गायब होती है।
जब यह मुद्दा लगातार बढ़ता गया, तब इसे लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और कार्रवाई की मांग होने लगी। इसी दौरान जांच में यह सामने आया कि मुंबई के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में डुप्लीकेट या फर्जी एंट्री की संख्या असामान्य रूप से अधिक है।
आखिर क्या है ‘डुप्लीकेट एंट्री’ का मतलब?
डुप्लीकेट एंट्री का मतलब है कि एक ही मतदाता का नाम किसी गलती, अनियमितता या लापरवाही की वजह से वोटर लिस्ट में कई बार दर्ज हो जाना। इसमें कुछ सामान्य स्थितियाँ शामिल हैं:
एक ही नाम अलग-अलग पते पर दिखाई देना
वही मतदाता नई आईडी बनवा ले और पुरानी हटे नहीं
तकनीकी गलती से एक ही एंट्री दोहराई जाना
फॉर्म अपडेट करते समय रिकॉर्ड साफ़ न होना
लेकिन 11 लाख जैसी संख्या यह संकेत देती है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम-स्तर की है, जिसे तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
इस मामले में किस पर उठ रहे हैं सवाल?
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे ने तेजी से जगह बनाई है। कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई संगठित खेल चल रहा है?
कुछ विपक्षी दलों ने BJP पर हमला करते हुए कहा है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकती है। वहीं BJP का कहना है कि चुनाव आयोग को इसकी जांच निष्पक्ष तरीके से करनी चाहिए ताकि कोई भ्रम की स्थिति न रहे।
ECI (चुनाव आयोग) की जिम्मेदारी
चुनाव आयोग का काम है कि वह voter roll को पूरी तरह सही, पारदर्शी और अद्यतन रखे। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में दुहराव यह दिखाता है कि:
ग्राउंड लेवल पर सत्यापन ठीक से नहीं हुआ
डेटा अपडेट करते समय पुरानी एंट्रियां हटाई नहीं गईं
नए पते पर शिफ्ट हुए लोगों का रिकॉर्ड सही से ट्रांसफर नहीं हुआ
टेक्नोलॉजी का उपयोग पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं रहा
हालांकि आयोग समय-समय पर “शुद्धिकरण अभियान” चलाता है, लेकिन इस खुलासे के बाद इन अभियानों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
जनता पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
मतदाता सूची में बड़ी मात्रा में डुप्लीकेट नाम कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं:
वास्तविक वोटरों को वोट डालने में दिक्कत
फर्जी वोटिंग की आशंका
चुनाव परिणामों पर शक
जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के आंकड़ों में गड़बड़ी
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अविश्वास
आम नागरिक के लिए यह स्थिति बेहद परेशान करने वाली है, क्योंकि लोकतंत्र की बुनियाद ही सही और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर आधारित होती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जैसे ही यह जानकारी सामने आई, कई राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
कुछ ने कहा कि यह प्रशासनिक ढिलाई का मामला है।
कुछ का आरोप है कि यह जानबूझकर किया गया गलत काम है।
कुछ दल इसे 2025 और 2026 के चुनावों की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर #BJP और #ECI जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जहां लोग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। कई नागरिकों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए, जिनमें उन्होंने बताया कि कैसे उनका नाम वोटर लिस्ट में गलत तरीके से दर्ज हुआ या कई बार दिखाई दिया।
ECI क्या कदम उठा सकता है?
इस तरह के मामलों में चुनाव आयोग आमतौर पर:
घर-घर सत्यापन अभियान
फर्जी या दोहराई गई एंट्रियों को हटाने का निर्देश
बूथ लेवल अधिकारियों की जवाबदेही तय करना
ऑनलाइन पोर्टल पर नई तकनीक लागू करना
मतदाताओं को स्वयं अपने नाम की स्थिति जांचने का विकल्प देना
लेकिन इस बार संख्या इतनी अधिक है कि कदम भी बड़े और तेज़ होने चाहिए।
आगे क्या?
मुंबई जैसी आर्थिक राजधानी में जब 11 लाख डुप्लीकेट वोटर एंट्रियां पाई जाती हैं, तो यह मुद्दा केवल स्थानीय नहीं रह जाता। यह चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार करता है। इसलिए जरूरी है कि:
जांच पारदर्शी हो
किसी भी स्तर पर राजनीति न हो
वास्तविक मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें
गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई हो
अंततः लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि हर वोट की कद्र हो और हर असली वोटर की आवाज चुनावों तक पहुंचे।
The recent controversy over 11 lakh duplicate voter entries in Mumbai has sparked concerns about electoral transparency and the reliability of the ECI voter list. With allegations of multiple registrations under the same voter names across different constituencies, the issue raises serious questions about data accuracy, voter roll management, and potential misuse during elections. Ensuring clean and verified Mumbai voter records is essential for fair elections, public trust, and democratic accountability.


















