AIN NEWS 1: बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा जिले की अलीनगर सीट से भाजपा प्रत्याशी मैथिली ठाकुर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें इस चुनाव में आशीर्वाद देकर जिताती है, तो वे अलीनगर का नाम बदलकर “सीतानगर” कर देंगी।
मैथिली ठाकुर ने कहा कि अलीनगर क्षेत्र देवी सीता माता की पवित्र भूमि है। यहां के लोग सदियों से माता जानकी की आराधना करते आए हैं और इस क्षेत्र की पहचान उनके नाम से ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “यह भूमि सीता माता की जन्मभूमि मानी जाती है, यहां हर घर में लोग जानकी का नाम लेते हैं, इसलिए अलीनगर से बेहतर नाम सीतानगर हो नहीं सकता।”
मैथिली ठाकुर, जो कि युवाओं और संगीत प्रेमियों के बीच अपनी गायकी के लिए भी जानी जाती हैं, अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का एक मंच है।
वह कहती हैं – “मैं इस धरती की बेटी हूं। अगर मुझे जनता ने मौका दिया, तो मैं इस भूमि की पहचान को और भी उज्जवल बनाऊंगी। अलीनगर का नाम सीतानगर रखकर मैं इसे वह सम्मान दूंगी, जिसकी यह जगह हकदार है।”
नाम परिवर्तन को लेकर जनता में उत्सुकता
मैथिली ठाकुर के इस बयान के बाद अलीनगर में चर्चा का माहौल है। कुछ लोग उनके प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे चुनावी रणनीति बता रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस इलाके को सीता माता की पहचान से जोड़ा जाए, तो इससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
दरभंगा और मिथिला क्षेत्र पहले से ही रामायण सर्किट का एक अहम हिस्सा माने जाते हैं। यहां स्थित जानकी मंदिर और सीता जन्मस्थली देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास
मैथिली ठाकुर ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देना नहीं है, बल्कि मिथिला की संस्कृति को और मजबूत करना है।
उन्होंने कहा —
“हमारी संस्कृति, हमारी पहचान देवी सीता से जुड़ी है। अगर इस क्षेत्र का नाम सीतानगर रखा जाए तो यह हमारी परंपरा को सम्मान देने जैसा होगा। मैं चाहती हूं कि आने वाली पीढ़ियां इस पहचान पर गर्व महसूस करें।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मैथिली ठाकुर का यह बयान सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और स्थानीय पहचान की भावना को केंद्र में लाने की कोशिश है। मिथिला क्षेत्र में सीता माता के प्रति गहरी आस्था है, और इस कारण यह बयान मतदाताओं के दिल तक पहुंच सकता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इस बयान को चुनावी चाल बताया है। कुछ नेताओं ने कहा कि नाम बदलने से विकास नहीं आता, बल्कि काम और नीतियों से आता है। एक स्थानीय विपक्षी उम्मीदवार ने कहा —
“नाम बदलने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी। सड़क, बिजली, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”
हालांकि, भाजपा कार्यकर्ताओं और मैथिली ठाकुर के समर्थकों ने इस बयान का जोरदार समर्थन किया है। उनका कहना है कि मैथिली ठाकुर मिथिला की बेटी हैं, और अगर वह सीतानगर नाम रखती हैं तो यह संस्कार और संस्कृति का सम्मान होगा।
इतिहास से जुड़ा नाम ‘अलीनगर’
इतिहासकारों के अनुसार, अलीनगर नाम मुगल काल से जुड़ा हुआ है। उस समय क्षेत्र के शासक अली नामक जमींदार थे, जिनके नाम पर इस इलाके का नाम पड़ा। लेकिन स्थानीय लोग हमेशा से इसे मिथिला संस्कृति की भूमि के रूप में देखते हैं।
इसलिए मैथिली ठाकुर का प्रस्ताव उस पुराने इतिहास को नई सांस्कृतिक पहचान देने जैसा है।
राजनीतिक समीकरणों में नया मोड़
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली ठाकुर का यह बयान भाजपा की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर मतदाताओं की भावनाओं को जोड़ा जा सके। मिथिला क्षेत्र में भाजपा का जनाधार पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है, और मैथिली ठाकुर जैसी लोकप्रिय शख्सियत इस जनाधार को और मजबूत कर सकती हैं।
उनकी लोकप्रियता न केवल संगीत और सोशल मीडिया के माध्यम से, बल्कि लोगों के दिलों में भी गहराई से जुड़ी है। उनके समर्थक कहते हैं कि “मैथिली केवल नेता नहीं, हमारी बेटी हैं, जो हमारी संस्कृति और मातृभूमि का सम्मान बढ़ाना चाहती हैं।”
जनता की उम्मीदें
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अगर मैथिली ठाकुर जीतती हैं, तो वह न सिर्फ नाम बदलेंगी बल्कि विकास की नई योजनाओं को भी आगे बढ़ाएंगी।
अलीनगर में शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार से जुड़ी कई चुनौतियाँ हैं, और जनता को भरोसा है कि मैथिली ठाकुर इन समस्याओं को हल करने के लिए प्रयास करेंगी।
BJP candidate Maithili Thakur, contesting from Alinagar constituency in Darbhanga, has announced that she will rename the area as Sitanagar if elected MLA. Calling it the land of Goddess Sita, Thakur emphasized her commitment to preserving Mithila’s cultural identity and promoting religious tourism. Her statement has sparked wide political discussion in Bihar elections 2025, positioning her as a cultural representative deeply connected to Sita Mata’s legacy and the Mithila region’s traditions.


















