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मोहन भागवत का संदेश: पूर्वाग्रहों से दूर होकर आरएसएस को समझें, समाज की विविधता ही भारत की असली ताकत!

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AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने असम और पूर्वोत्तर के युवाओं से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में संघ के बारे में बड़ी मात्रा में ऐसी जानकारी फैली हुई है जो या तो अधूरी है या बिल्कुल गलत। ऐसे में युवाओं को चाहिए कि वे किसी भी पूर्वाग्रह, अफवाह या प्रचारित दुष्प्रचार के आधार पर आरएसएस को न आंकें, बल्कि इसकी वास्तविक विचारधारा और कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास करें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संघ की जानकारी अधूरी: भागवत

गुवाहाटी में आयोजित युवा नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों और डिजिटल स्रोतों पर आरएसएस के बारे में उपलब्ध जानकारी का 50 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न मीडिया संस्थान जानबूझकर संघ के खिलाफ गलत जानकारी फैलाते हैं, जिससे आम लोगों और विशेष रूप से युवाओं के मन में भ्रम पैदा होता है।

भागवत के अनुसार, संघ को लेकर जो चर्चा देश और दुनिया में होती है, वह तभी सार्थक है, जब वह वास्तविक तथ्यों पर आधारित हो। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया, इंटरनेट या किसी भी बाहरी प्रभाव से प्रभावित हुए बिना खुद जानने और समझने की कोशिश करें कि आरएसएस वास्तव में क्या करता है और उसका लक्ष्य क्या है।

आरएसएस का उद्देश्य: विविधता में एकता को मजबूत करना

आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन में संगठन के मूल सिद्धांतों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता है। यह विविधता भाषा, आस्था, परंपरा और क्षेत्रीय विशेषताओं के रूप में सामने आती है।

भागवत ने कहा कि हिंदू समाज की विशेषता है कि वह विविधताओं का सम्मान करता है, उन्हें स्वीकार करता है और उसी आधार पर एक मजबूत समाज बनाता है।

उन्होंने बताया कि आरएसएस का प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जो संगठित, सक्षम और गुणों से भरपूर हो—क्योंकि जब समाज मजबूत होता है, तभी राष्ट्र भी मजबूत होता है।

भागवत ने युवाओं को समझाया कि देश का भविष्य केवल राजनीतिक बदलावों से नहीं बदलेगा। असली परिवर्तन तब आएगा जब समाज के हर व्यक्ति में गुण, अनुशासन और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ेगा.

विकसित देशों के इतिहास का अध्ययन करने की सलाह

अपने संबोधन में भागवत ने युवाओं को विकसित देशों के इतिहास का अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दुनिया के जितने भी विकसित देश हैं, उन्होंने अपने शुरुआती सौ वर्षों में केवल एक ही चीज़ पर ध्यान दिया—अपने समाज को एकजुट और गुणवत्तापूर्ण बनाना।

उन्होंने कहा कि भारत ने भी हमेशा से सामाजिक एकता, आपसी सहअस्तित्व और अनेकत्व में एकत्व की परंपरा को ही अपनाया है। लेकिन आज जरूरत है कि इस परंपरा को फिर से मजबूत किया जाए, क्योंकि बदलती दुनिया में सामाजिक एकता ही हमारी वास्तविक शक्ति है।

भागवत ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी परंपराओं से कट जाते हैं, वे धीरे-धीरे अपनी पहचान खो देते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत से अलग हुए देशों को अपनी परंपरा और पहचान को बचाने में मुश्किल हुई। लेकिन भारतीय समाज ने अपनी विविधता और परंपराओं के साथ सदैव तालमेल बैठाया है।

समाज को संगठित और गुणी बनाना जरूरी

भागवत ने जोर देते हुए कहा कि जब तक भारतीय समाज संगठित नहीं होगा, तब तक उसके उत्थान की राह कठिन बनी रहेगी। आरएसएस का प्रयास है कि समाज को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाया जाए और उसके भीतर एक ऐसा नेतृत्व विकसित किया जाए जो राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर परिवर्तन लाने वाला हो।

उन्होंने कहा कि संगठन का काम व्यक्ति निर्माण से शुरू होता है। जब एक व्यक्ति के अंदर गुण, अनुशासन और सेवा की भावना बढ़ती है, तो यह सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज में फैलता है। इसलिए आरएसएस की शाखाओं में जो गतिविधियां होती हैं, उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विचार को मजबूत करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण पर काम करना होता है।

युवाओं से संघ की गतिविधियों से जुड़ने की अपील

भागवत ने युवाओं को यह भी कहा कि यदि वे वास्तविकता को समझना चाहते हैं, तो उन्हें स्वयं संघ की किसी शाखा या गतिविधि में हिस्सा लेकर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था के बारे में राय बनाने से पहले उसका अनुभव लेना सबसे जरूरी है।

उन्होंने बताया कि आज संघ देश के अलग-अलग हिस्सों में हजारों गतिविधियां चला रहा है, जिनमें समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, चिकित्सा और अन्य अनेक क्षेत्र शामिल हैं।

भागवत का मानना है कि युवाओं के भीतर नैतिक और सामाजिक नेतृत्व की भावना विकसित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा चाहे जितने भी शिक्षित क्यों न हों, यदि उनमें राष्ट्र और समाज के प्रति संवेदनशीलता नहीं होगी, तो उनके ज्ञान का देश को कोई लाभ नहीं मिलेगा।

मणिपुर की यात्रा: हालात समझने और संवाद बढ़ाने का प्रयास

अपने संबोधन के दौरान भागवत की आगामी मणिपुर यात्रा भी चर्चा का विषय बनी। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, दो साल पहले हुई जातीय हिंसा के बाद यह मोहन भागवत का पहला मणिपुर दौरा होगा।

20 नवंबर से शुरू होने वाली उनकी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान वे नागरिकों, उद्यमियों और विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। आरएसएस पदाधिकारी के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य मणिपुर की वर्तमान स्थिति को समझना, लोगों की समस्याएं सुनना और समाज में आपसी संवाद को मजबूत करना है।

भागवत 21 नवंबर को मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा करेंगे और वहां रहने वाले आदिवासी नेताओं से विस्तृत बातचीत करेंगे। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मणिपुर पिछले दो वर्षों से जातीय तनाव और हिंसा की घटनाओं से जूझ रहा है।

राष्ट्रीय एकता के लिए संवाद का महत्व

भागवत ने कहा कि भारत की एकता तभी मजबूत होगी जब समाज के सभी वर्गों के बीच संवाद खुले और ईमानदार होंगे। उन्होंने मणिपुर हिंसा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब समाज के दो वर्गों के बीच भरोसा टूट जाता है, तब हिंसा और तनाव बढ़ते हैं।

उन्होंने युवाओं को यह सीख भी दी कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत, सहमति और धैर्य से निकलता है, न कि टकराव से।

समापन: युवाओं से उम्मीदें और राष्ट्र का भविष्य

अपने लंबे संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का भविष्य उसके युवा ही तय करेंगे। अगर युवा समाज की विविधता, परंपरा, एकता और अच्छे मूल्यों को समझेंगे और अपनाएंगे, तो देश के विकास को कोई नहीं रोक सकता।

उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में सबसे आसान काम है किसी भी संस्था को बदनाम करना, लेकिन सबसे मुश्किल काम है सच को समझना और स्वीकार करना। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे गलत सूचना से दूर रहते हुए सत्य को जानने का प्रयास करें।

भागवत ने कहा, “जब हमारा समाज गुणी होगा, संगठित होगा, तभी भारत विश्वगुरु बनने की राह पर आगे बढ़ सकेगा।”

RSS Chief Mohan Bhagwat emphasized that the youth of Assam and Northeast India must avoid forming opinions about the Sangh based on prejudice or digital misinformation. Highlighting the importance of unity, Indian diversity, and the core ideology of the RSS, he stressed that more than 50% information available online about the Sangh is incomplete or misleading. His message focused on nation building, social leadership, Hindu values, and the upcoming visit to Manipur, making the topic crucial for understanding RSS ideology and its role in modern India.

 

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