AIN NEWS 1: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के जिहाद संबंधी बयान पर देशभर में शुरू हुआ राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह मुद्दा दिनों-दिन गरमाता जा रहा है और विपक्ष व सत्ताधारी दलों के नेता लगातार इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। खास तौर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस बयान का असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां नेताओं ने तीखे शब्दों में अपनी राय रखनी शुरू कर दी है।

संगीत सोम की कड़ी प्रतिक्रिया
सोमवार को मेरठ में बीजेपी के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिहाद को सही ठहराने वाले लोग देश के माहौल को खराब कर रहे हैं और सनातनी समाज ऐसे किसी भी विचार को कतई स्वीकार नहीं कर सकता।
संगीत सोम ने कहा, “जो लोग जिहाद का समर्थन करते हैं, वे देश की एकता और अखंडता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों को सनातनी समाज जवाब देना जानता है। अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें पाकिस्तान तक छोड़कर आएंगे।” उनके इस बयान ने सियासी जगत में और अधिक हलचल मचा दी।
मदरसों को लेकर उठे सवाल
संगीत सोम यहीं नहीं रुके, उन्होंने देश में मौजूद मदरसों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देश के कई मदरसों में बच्चों को गलत दिशा में मोड़ा जाता है, और ऐसी जगहों से केवल कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलता है।
उनके अनुसार, “भारत में चल रहे मदरसों की जांच की जानी चाहिए। यह देखा जाना चाहिए कि वहां बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जा रही है। अगर कहीं भी देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, तो ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई होना जरूरी है।”
बीजेपी नेता ने तो यहां तक कह दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो मदरसों को बंद करने पर भी विचार किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य मिल सके। उनके इस बयान को विरोधियों ने बेहद भड़काऊ बताया है, जबकि समर्थकों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से अहम कदम करार दिया है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
सारा विवाद तब शुरू हुआ जब हाल ही में मौलाना महमूद मदनी ने एक सभा में जिहाद को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि “जिहाद का वास्तविक अर्थ संघर्ष है और इसे आतंकवाद से जोड़ना गलत है।” हालांकि उनके बयान के कुछ हिस्सों को कुछ राजनीतिक दलों ने कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाला बताया, जिसके बाद विवाद तेजी से फैल गया।
विपक्षी दलों का कहना है कि ऐसी संवेदनशील टिप्पणियां समाज में विभाजन का कारण बनती हैं, जबकि मदनी समर्थकों का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
उत्तर प्रदेश में माहौल गरमाया
उत्तर प्रदेश में पहले से ही धर्म और राजनीति का मुद्दा बेहद संवेदनशील रहा है। ऐसे में इस तरह के बयान दोनों पक्षों की राजनीति को नया मोड़ दे देते हैं। संगीत सोम का बयान भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जिन्हें बीजेपी का आक्रामक हिंदुत्व चेहरा माना जाता है।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों के अनुसार, निकट भविष्य में होने वाले चुनावों को देखते हुए ऐसे बयान माहौल को और गर्म कर सकते हैं। इस मुद्दे पर समाज दो धड़ों में बंटा नजर आता है—एक पक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मसला मानता है, तो दूसरा इसे आंतरिक सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है।
मदरसों की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस
मदरसों को लेकर देश में अक्सर बहस होती रही है। जहां एक तरफ मुस्लिम समाज के बड़े हिस्से का मानना है कि मदरसे उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करते हैं, वहीं दूसरी ओर कई राजनीतिक नेता और सामाजिक संगठन इन संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं।
संगीत सोम की टिप्पणी ने इसी बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मदरसों को पूरी तरह बंद करना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उनमें सुधार की जरूरत है, ताकि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा दिया जा सके।
दूसरी तरफ, कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि यदि किसी भी संस्थान से कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलता है, तो कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। सरकार भी समय-समय पर ऐसे संस्थानों की जांच करती रही है, लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस विवाद के बाद किसी बड़ी नीति परिवर्तन की दिशा में कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
राजनीतिक बयानबाजी जारी
इस विवाद पर अभी तक कई बड़े नेताओं की प्रतिक्रिया आ चुकी है। बीजेपी और विपक्ष दोनों के नेता इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
कुछ नेताओं ने संगीत सोम के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताया, जबकि कुछ ने इसे राष्ट्रहित में दिया गया बयान करार दिया। इस तरह की बयानबाजी से समाज में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल ऐसा लगता नहीं कि यह विवाद जल्द थमने वाला है। मौलाना मदनी के बयान की व्याख्या और संगीत सोम की प्रतिक्रिया ने पूरे राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। आने वाले दिनों में और भी नेता इस मुद्दे पर सामने आ सकते हैं, जिससे यह विवाद और बढ़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए, ताकि समाज में किसी भी तरह का तनाव पैदा न हो। धार्मिक मुद्दों पर राजनीति करना हमेशा जोखिम भरा होता है, और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
The political controversy surrounding Maulana Mahmood Madani’s jihad remark has intensified, especially after BJP leader Sangeet Som’s strong reaction in Meerut. His statements targeting madrasas, questions over radicalization, and the wider debate on UP politics, religious tensions, and national security have pushed this issue into the center of public discourse. This article explores the full controversy, political reactions, and the growing discussion across India.


















