AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की मशहूर लुटेरी दुल्हन काजल को आखिरकार पुलिस ने एक साल बाद गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। काजल मथुरा के गोवर्धन इलाके की रहने वाली है और पिछले कई महीनों से पुलिस को चकमा देती घूम रही थी। जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो वह मुस्कुराती नजर आई। हाथों में मेहंदी लगी हुई थी और उसने जींस-टीशर्ट पहन रखी थी। यह वही काजल है जिसने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के कई कुंवारे युवकों को शादी के झांसे में फंसाकर लाखों रुपये की ठगी की।

कैसे पकड़ी गई लुटेरी दुल्हन काजल?
राजस्थान के सीकर जिले की पुलिस ने तकनीकी मदद, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स के जरिए काजल का पीछा किया। जांच में पता चला कि वह गुरुग्राम के सरस्वती इन्क्लेव में छिपकर रह रही थी। वहां वह अंकित नाम के एक व्यक्ति के मकान में किराए पर रह रही थी। पुलिस ने गली नंबर दो में छापा मारकर उसे गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उसे कस्टडी में लिया, तो काजल न केवल शांत थी बल्कि मुस्कुराती रही। उसकी यह मुस्कान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई।
एक साल से थी फरार, लगातार बदलती रही ठिकाने
काजल को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था। वह लगातार शहर बदलती रही—कभी मथुरा, कभी जयपुर और फिर गुरुग्राम। हर बार वह नया किराए का मकान लेकर खुद को छिपा लेती थी। पुलिस के लिए उसे पकड़ना चुनौती बन गया था, लेकिन लगातार तकनीकी निगरानी और स्थानीय सूचना नेटवर्क के जरिए पुलिस ने आखिरकार उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली।
ठगी का खेल: शादी के नाम पर कुंवारों को बनाती थी शिकार
काजल का परिवार शादी के नाम पर ठगी करने वाला एक संगठित गिरोह चला रहा था। इसके सरगना उसके पिता भगत सिंह थे। गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था—वे ऐसे परिवार तलाशते थे जिनके घर में कुंवारे बेटे हों और आर्थिक स्थिति ठीक हो। फिर रिश्ता तय करने के नाम पर बड़ी रकम एडवांस में ले ली जाती थी।
दोनों बेटियां, काजल और तमन्ना, इस गिरोह की मुख्य सदस्य थीं। वे शादी के दो दिन तक सब कुछ सामान्य रखतीं—रिश्तेदारों से मिलना, रस्में निभाना, और फिर तीसरे दिन गहने व नकदी लेकर परिवार समेत फरार हो जाती थीं।
सीकर जिले का मामला बना सुराग
26 नवंबर 2024 को राजस्थान के सीकर जिले के दांतारामगढ़ थाने में एक शख्स ताराचंद जाट ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि जयपुर में उसकी मुलाकात भगत सिंह से हुई थी, जिसने अपने दोनों बेटियों काजल और तमन्ना का रिश्ता उसके दो बेटों भंवरलाल और शंकरलाल से तय करने की बात कही।
शादी की तैयारियों के नाम पर ताराचंद से 11 लाख रुपये लिए गए। 21 मई 2024 को खाचरियावास के गोविंद अस्पताल के गेस्ट हाउस में दोनों बेटों की शादी धूमधाम से कर दी गई। शादी के बाद तीन दिन तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन चौथे दिन पूरा परिवार—दुल्हनें, मां, पिता और भाई—घर से गायब हो गया। साथ में गहने, कपड़े और नकदी भी ले गए।
ठगी का असर: आर्थिक और सामाजिक नुकसान
ताराचंद और उसके परिवार को न सिर्फ आर्थिक झटका लगा बल्कि सामाजिक अपमान भी झेलना पड़ा। समाज में लोग उनका मजाक उड़ाने लगे कि उनके बेटों की दुल्हनें भाग गईं। यही घटना पुलिस जांच की शुरुआत का आधार बनी और धीरे-धीरे ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
गिरोह के बाकी सदस्य पहले ही गिरफ्तार
एफआईआर के बाद दांतारामगढ़ थानाधिकारी जय सिंह बसेरा और एएसआई पूरणमल ने जांच शुरू की। 18 दिसंबर 2024 को पुलिस ने भगत सिंह और उसकी पत्नी सरोज देवी को मथुरा के गोवर्धन से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह पूरा परिवार संगठित रूप से शादी के नाम पर ठगी का रैकेट चला रहा था।
बाद में पुलिस ने काजल की बहन तमन्ना और भाई सूरज को भी पकड़ा। केवल काजल ही फरार थी, जो अब जाकर पुलिस के हाथ लगी है।
काजल ने पुलिस पूछताछ में क्या बताया?
गिरफ्तारी के बाद जब काजल से पूछताछ की गई, तो उसने कई हैरान कर देने वाले राज खोले। उसने बताया कि पूरा प्लान उसके पिता बनाते थे। वे लोगों को शादी के लिए राजी करते, फर्जी रिश्ते बनाते और पैसों का लेनदेन कराते।
काजल और तमन्ना का काम था शादी करके लड़के और उसके परिवार का विश्वास जीतना। दो-तीन दिन तक सामान्य रहकर फिर मौका मिलते ही गहने और पैसे लेकर गायब हो जाना।
काजल ने यह भी कबूल किया कि तीन राज्यों—राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश—में उन्होंने कई बार इसी तरीके से शादियां कीं और हर बार नए लोगों को ठगा।
गिरोह के तरीके और नेटवर्क
काजल के पिता भगत सिंह ने इस गिरोह को बेहद पेशेवर अंदाज में चलाया। उनके पास झूठे पहचान पत्र, नकली रिश्तेदारों के संपर्क नंबर और विवाह स्थल तय करने का पूरा तंत्र था। वे पहले समाजिक रिश्तों का जाल बुनते, फिर शादी के बहाने रकम लेते और कुछ ही दिनों में सब गायब हो जाते।
कई बार वे शादी के फोटोग्राफ और वीडियो भी सोशल मीडिया पर डालते ताकि अगली बार कोई शक न करे।
पुलिस को और खुलासों की उम्मीद
जांच अधिकारी पूरणमल ने बताया कि अब जब काजल पकड़ी गई है, तो पुलिस को उम्मीद है कि वह अन्य कई मामलों का खुलासा करेगी। कई पीड़ित अब आगे आ रहे हैं और अपनी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने कितने लोगों को ठगा और अब तक कितनी रकम हड़पी गई है।
काजल की गिरफ्तारी ने खोला बड़ा फर्जीवाड़ा
काजल की गिरफ्तारी ने शादी के नाम पर चल रहे ठगी नेटवर्क की पोल खोल दी है। यह गिरोह सिर्फ एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों परिवारों को अपना शिकार बना चुका है। कई राज्यों में इनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी सहयोगियों और फर्जी पहचान से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी है।
काजल की मुस्कान और सोशल मीडिया पर चर्चा
जब पुलिस ने काजल को हिरासत में लिया, तो उसकी मुस्कराती तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतनी ठगी करने के बाद भी वह शर्मिंदा क्यों नहीं दिखी? कई यूज़र्स ने लिखा कि उसकी मुस्कान उसके अपराधों पर पर्दा नहीं डाल सकती।
काजल की गिरफ्तारी के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर समाज में ऐसे ठगी गिरोह कैसे बढ़ रहे हैं और इनसे बचाव कैसे किया जाए।
पुलिस की अपील: सावधानी ही बचाव
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शादी जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते तय करने में जल्दबाजी न करें और पूरी जांच-पड़ताल करें। अजनबियों पर भरोसा कर बड़ी रकम देना खतरनाक साबित हो सकता है।
अब यह मामला केवल ठगी का नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी बन गया है। पुलिस की कोशिश है कि इस गिरोह से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाए ताकि भविष्य में कोई और युवक या परिवार इसका शिकार न बने।
लुटेरी दुल्हन काजल की गिरफ्तारी ने एक ऐसे संगठित अपराध का पर्दाफाश किया है जो दिखने में साधारण शादी जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे करोड़ों की ठगी का नेटवर्क चलता है। यह केस इस बात की भी याद दिलाता है कि भरोसे की आड़ में अपराधी कैसे भावनाओं और परंपराओं का दुरुपयोग करते हैं।
A UP constable named Vishwadeep Tiwari has sparked controversy by using artificial intelligence (AI) to create a fake photo with Chief Minister Yogi Adityanath and sharing it in a police WhatsApp group. The AI-generated image was intended to show his influence but has now raised serious concerns about AI misuse, fake content creation, and digital ethics within law enforcement. The incident highlights the urgent need for AI awareness and responsible technology use in sensitive institutions like the Uttar Pradesh Police.



















