AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा पिछले एक साल से अधर में लटकी थी, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी जल्द ही इस पद पर नया चेहरा सामने ला देगी। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन की कई लंबित रिपोर्टों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी बैठक में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर भी विस्तार से विचार किया गया और माना जा रहा है कि इसी सप्ताह आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

एक साल से अटका फैसला – आखिर क्यों?
बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2024 के बाद प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव की योजना बनाई थी। संगठनात्मक पुनर्गठन में सबसे महत्वपूर्ण पद प्रदेश अध्यक्ष का है। लेकिन कई वजहों से यह फैसला लगातार टलता रहा—
प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय संगठन के बीच कई नामों पर राय एक जैसी नहीं थी।
चुनावी राज्यों में व्यस्तताओं के कारण केंद्रीय नेतृत्व समय नहीं निकाल पा रहा था।
संघ की ओर से भी अधिक सर्वमान्य चेहरा चुने जाने की सलाह दी जा रही थी।
इस देरी का असर यह हुआ कि कई जिलों और मोर्चों में संगठनात्मक गतिविधियाँ धीमी पड़ गई थीं। कई बार सांसदों और विधायकों ने भी यह सवाल उठाया कि नए नेतृत्व की नियुक्ति कब होगी, जिससे दिशा स्पष्ट हो सके।
समन्वय बैठक में क्या हुआ?
सोमवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, और आरएसएस के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद थे। यह बैठक सामान्य समन्वय बैठकों की तरह नहीं थी, बल्कि इसमें संगठन की पूरी वर्षभर की समीक्षा की गई।
बैठक में—
प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक स्थिति
लोकसभा चुनाव के बाद बदलते समीकरण
विपक्ष की रणनीतियाँ
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन
विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी
जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी दौरान नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर भी सहमति बनी।
SIR मॉडल पर सांसद-विधायकों की कम दिलचस्पी से संघ नाराज़
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आरएसएस ने एक मुद्दे पर विशेष नाराज़गी भी जताई—यह था नए चलाए जा रहे SIR मॉडल पर जनप्रतिनिधियों की कम रुचि।
SIR यानी “संपर्क, संवाद और रिश्ते मज़बूत करने” का मॉडल हाल ही में संगठन द्वारा शुरू किया गया था, ताकि सांसद और विधायक सीधे जनता से जुड़े रहें, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़े, और जनता की शिकायतें तुरंत निपटाई जाएँ।
पर रिपोर्टों में सामने आया कि—
कई सांसद इस मॉडल को लेकर पर्याप्त सक्रिय नहीं रहे।
विधायक भी नियमित बूथ विज़िट नहीं कर रहे थे।
कई क्षेत्रों में जनसंपर्क कार्यक्रम कागज़ों पर ही सीमित रह गए।
संघ ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए सुझाव दिया कि नया अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो संगठन को दोबारा गति दे सके और सभी जनप्रतिनिधियों में कार्यसंस्कृति को मजबूत कर सके।
कौन-कौन नामों पर चर्चा हुई?
हालांकि मीटिंग में मौजूद लोगों ने ऑफिशियली किसी नाम का खुलासा नहीं किया, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ प्रमुख नेता लगातार चर्चा में हैं—
संगठन में लंबे समय से काम कर रहे अनुभवी नेता
किसी क्षेत्रीय जातीय संतुलन को मजबूत करने वाले चेहरे
ऐसे नेता जिनके संघ से भी अच्छे संबंध हों
जिनकी छवि साफ-सुथरी और कार्यकर्ता-आधारित मानी जाती हो
कई नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए हैं, और अंतिम चयन उन्हीं में से किसी एक को लेकर होगा।
नए अध्यक्ष के सामने क्या होगी चुनौतियाँ?
यूपी भाजपा देश के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संगठनों में से एक है। ऐसे में नए अध्यक्ष की भूमिका काफी चुनौतीपूर्ण होगी।
उन्हें—
बूथ स्तर पर संगठन को फिर से मजबूत करना,
कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाना,
अगले विधानसभा चुनाव 2027 के लिए माहौल तैयार करना,
विपक्ष की बार-बार की जा रही सामूहिक एकजुटता की कोशिशों से निपटना,
युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोटरों को पार्टी से जोड़ना,
सोशल मीडिया और डिजिटल नेटवर्किंग को नए स्तर पर सक्रिय करना,
जातीय समीकरणों और छोटे क्षेत्रों के मुद्दों को संवेदनशीलता से संभालना
जैसी कई जिम्मेदारियाँ निभानी होंगी।
घोषणा कब होगी?
केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिलने के बाद नए अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा की जाएगी। संगठन से जुड़े लोग यह मानकर चल रहे हैं कि यह घोषणा इसी सप्ताह या अगले कुछ दिनों में हो सकती है। योगी सरकार और संगठन के बीच तालमेल को देखते हुए यह माना जा रहा है कि नए अध्यक्ष का चयन ऐसा होगा जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।
राजनीतिक रूप से क्या मायने?
यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद सिर्फ एक औपचारिक पद नहीं है—यह पूरे प्रदेश की चुनावी दिशा, रणनीति और राजनीतिक ऊर्जा को निर्धारित करता है।
इस पद पर नियुक्त व्यक्ति की भूमिका भाजपा सरकार की नीतियों को जनता तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण होती है।
साथ ही, संगठन और सरकार के बीच संवाद को संतुलित रखने में भी वही मुख्य भूमिका निभाता है।
नए अध्यक्ष को आगामी पंचायत, निकाय और विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करनी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नियुक्ति का असर यूपी की पूरी राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ेगा।
The UP BJP is preparing to announce its new state president after a crucial RSS-BJP coordination meeting held at CM Yogi Adityanath’s residence. The decision, which was pending for almost a year, gained momentum after the RSS expressed concern over the lack of interest shown by several MPs and MLAs in the SIR model designed to boost grassroots contact. The upcoming announcement is expected to reshape Uttar Pradesh politics and strengthen the BJP organization ahead of major elections.


















