AIN NEWS 1: राजस्थान की धरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहां की बेटियां हालात से नहीं, बल्कि हौसलों से पहचानी जाती हैं। आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली अर्फिया की कहानी सिर्फ खेल की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जज़्बे, साहस और टूटकर भी खड़े होने की मिसाल है।
अर्फिया के जीवन में 12 दिन पहले जो हुआ, उसने किसी भी इंसान को भीतर से तोड़ दिया होता। एक दर्दनाक सड़क हादसे में उसने अपने पिता, चाचा और भाई—तीनों को खो दिया। परिवार का सहारा, सुरक्षा और सपना—सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया। लेकिन इसी गहरे दुख को अर्फिया ने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपनी ताकत बना लिया।
हादसे ने बदल दी ज़िंदगी
यह हादसा इतना भयानक था कि पूरे गांव और परिवार में मातम छा गया। पिता, जो खुद बेटी के खेल करियर को लेकर बेहद गंभीर थे, हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। शूटिंग की ट्रेनिंग से लेकर प्रतियोगिताओं तक, हर कदम पर पिता का साथ था।
अचानक उनके चले जाने से अर्फिया के सामने सवालों का पहाड़ खड़ा हो गया—अब आगे क्या? पढ़ाई, खेल, परिवार की जिम्मेदारी… सब कुछ एक साथ।
लेकिन पिता का सपना उसकी आंखों में अब भी जिंदा था।
दुख को बनाया ताकत
हादसे के महज 12 दिन बाद अर्फिया को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेना था। परिवार और रिश्तेदारों को लग रहा था कि वह प्रतियोगिता छोड़ देगी। लेकिन अर्फिया ने ऐसा नहीं किया।
उसने तय किया कि वह शूटिंग रेंज में उतरकर अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि देगी।
जब वह 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में निशाने पर निशाना साध रही थी, तब उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन हाथ स्थिर थे। हर शॉट के साथ वह अपने पिता के सपने को जी रही थी।
603 अंकों से सबको चौंकाया
अर्फिया ने 600 में से 603 अंक हासिल कर सभी को हैरान कर दिया। यह स्कोर सिर्फ शानदार नहीं था, बल्कि यह मानसिक मजबूती और असाधारण आत्मविश्वास का प्रमाण था।
कोच, खिलाड़ी और आयोजक—सभी उसकी कहानी सुनकर भावुक हो गए। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि इतनी छोटी उम्र में, इतने बड़े व्यक्तिगत नुकसान के बाद कोई बच्ची ऐसा प्रदर्शन कर सकती है।
कोच और परिवार की प्रतिक्रिया
अर्फिया के कोच का कहना है कि उसने अपने करियर में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी देखे हैं, लेकिन अर्फिया जैसी मानसिक ताकत बहुत कम लोगों में होती है।
उन्होंने कहा,
“उसने सिर्फ शूटिंग नहीं की, उसने अपने दुख को हर निशाने के साथ हराया।”
परिवार के लोगों का कहना है कि अर्फिया अब सिर्फ बेटी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद बन चुकी है।
मनु भाकर जैसी बनना चाहती है अर्फिया
अर्फिया का सपना सिर्फ यहां तक सीमित नहीं है। वह देश के लिए खेलना चाहती है। उसका आदर्श मनु भाकर हैं, जिन्होंने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
अर्फिया कहती है,
“मैं चाहती हूं कि एक दिन मेरे मेडल को देखकर मेरे पिता गर्व महसूस करें, चाहे वो जहां भी हों।”
खेल से मिली मानसिक मजबूती
खेल सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि दिमाग को भी मजबूत बनाता है—अर्फिया इसकी जीती-जागती मिसाल है। जिस उम्र में बच्चे दुख से टूट जाते हैं, उस उम्र में उसने अनुशासन, ध्यान और धैर्य से खुद को संभाला।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में खेलों की भूमिका को और मजबूत करते हैं।
एक प्रेरणा, एक संदेश
अर्फिया की कहानी उन लाखों बच्चों के लिए प्रेरणा है जो मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। यह कहानी बताती है कि सपने हालात से बड़े होते हैं और अगर इरादा मजबूत हो, तो दर्द भी रास्ता बना देता है।
राजस्थान की यह बेटी अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उम्मीद की पहचान बन चुकी है।
Arfiya, a young shooting talent from Rajasthan, created history at the National Shooting Championship by scoring an impressive 603 points in the 10 meter air rifle event. Despite losing her father, uncle, and brother in a tragic road accident just days before the competition, Arfiya displayed extraordinary mental strength and determination. Her inspiring journey has positioned her as one of the most promising young shooters in India, drawing comparisons with Olympic shooter Manu Bhaker and highlighting the rising talent of women shooters from Rajasthan.



















