AIN NEWS 1: राज्यसभा के सत्र के दौरान एक ऐसा क्षण आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन के सदस्यों को मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। पीएम मोदी ने सभापति और राज्यसभा के माननीय अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन से जुड़ा एक पुराना किस्सा साझा किया। यह कहानी न सिर्फ दिलचस्प थी बल्कि भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिकता और उसकी प्रभावशाली शक्ति को भी बखूबी दर्शाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि राधाकृष्णन जी के जीवन में काशी की पहली यात्रा बेहद निर्णायक साबित हुई। वह पहली बार जब वाराणसी गए तो वहां का वातावरण, घाटों की शांति, मंत्रों की ध्वनि और वहां की गहरी आध्यात्मिक अनुभूति ने उन पर ऐसा असर छोड़ा कि उन्होंने उसी दिन जीवनभर नॉन-वेज न खाने का निर्णय ले लिया।
पीएम मोदी ने हंसते हुए यह भी कहा कि “नॉनवेज खाने वाले बुरे नहीं होते,” लेकिन राधाकृष्णन जी को काशी की पवित्रता ने जिस तरह भीतर से प्रभावित किया, वह अपने आप में एक अनोखा अनुभव था। प्रधानमंत्री का यह बयान सदन में एक सहजता का माहौल लेकर आया और सभी सदस्यों ने इसे बड़े ध्यान से सुना।
काशी की आध्यात्मिक शक्ति का प्रभाव
भारतीय सभ्यता में काशी को मोक्ष का द्वार कहा जाता है। सदियों से यह शहर योग, भक्ति, ध्यान और आध्यात्मिक साधना का केंद्र रहा है। यहां आने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में आंतरिक शांति का अनुभव करता है। राधाकृष्णन जी भी उनमें से एक थे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि राधाकृष्णन जी ने जब पहली बार वहां के घाटों पर आरती देखी, साधुओं की दिनचर्या को महसूस किया और मंदिरों के शांत वातावरण में समय बिताया, तो उन्हें लगा कि जीवन को एक नई दिशा दी जानी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने मन ही मन निर्णय किया कि वह अब नॉन-वेज नहीं खाएंगे। यह सिर्फ एक खान-पान की आदत बदलने का फैसला नहीं था, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति से उपजा जीवन-शैली परिवर्तन था।
प्रधानमंत्री का संदेश — ‘नॉनवेज खाने वाले बुरे नहीं’
पीएम मोदी द्वारा कही गई यह बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी धार्मिक कट्टरता या सामाजिक भेदभाव की भावना से नहीं आया था। उन्होंने कहा—
“नॉनवेज खाने वाले लोग बुरे नहीं होते। यह हर व्यक्ति की अपनी जीवनशैली और पसंद का मामला है। लेकिन राधाकृष्णन जी को काशी ने कुछ ऐसा अनुभव कराया जिसने उनके भीतर एक बदलाव ला दिया।”
यह बयान पीएम मोदी की संतुलित सोच और धार्मिक सहिष्णुता को भी प्रदर्शित करता है।
व्यक्तिगत अनुभव का सार्वजनिक मंच पर ज़िक्र
प्रधानमंत्री द्वारा इस तरह के व्यक्तिगत और प्रेरणादायक अनुभव का उल्लेख करना यह दर्शाता है कि राजनीति के उच्चतम पदों पर बैठे लोग भी सामान्य जीवन की घटनाओं से गहराई तक प्रभावित होते हैं। यह घटना सदन में मानवता और संवेदनशीलता का एक सकारात्मक संदेश लेकर आई।
राधाकृष्णन जी का निर्णय इसलिए भी खास है क्योंकि आज की व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर आध्यात्मिकता से दूर होते जा रहे हैं। लेकिन काशी की शक्ति ने उन्हें भीतर से झकझोर कर एक सकारात्मक बदलाव दिया — ऐसा बदलाव जो वर्षों बाद भी प्रधानमंत्री द्वारा याद किया जा रहा है और राष्ट्र के सामने मिसाल बनकर प्रस्तुत हो रहा है।
काशी: एक ऐसा शहर जो जीवन बदल देता है
प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखते हुए यह भी बताया कि काशी सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऊर्जा और सकारात्मकता का केंद्र है। यहां आने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रभावित होता है। लोग यहां ध्यान करने आते हैं, योग की साधना सीखते हैं, अपने भीतर झांकने का प्रयास करते हैं।
राधाकृष्णन जी जब पहली बार वहां आए, तो उनके मन में भी कई सवाल, कई विचार थे। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने शहर को महसूस किया, उन्हें लगा कि भोजन की आदत बदलना सिर्फ एक शुरुआत है — असली बदलाव मन और आत्मा की शुद्धि में है। उनके इस अनुभव ने उन्हें और अधिक सरल, विनम्र और आत्मिक रूप से मजबूत बनाया।
सदन में सकारात्मकता का माहौल
पीएम मोदी की इस कहानी ने राज्यसभा में एक खुशनुमा और हल्कापन भरा माहौल बना दिया। अक्सर सदन में तीखी बहसें होती हैं, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलते हैं, लेकिन ऐसे पल न सिर्फ सदन को मानवीय बनाते हैं बल्कि यह भी दिखाते हैं कि राजनीति में भी संवेदनशीलता और प्रेरक अनुभवों के लिए खूब जगह है।
संदेश जो समाज तक गया
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान का मुख्य सार यही था कि जीवन में कुछ अनुभव ऐसे होते हैं जो व्यक्ति को गहराई से बदल देते हैं। यह बदलाव किसी दबाव या मजबूरी का परिणाम नहीं होता, बल्कि यह आत्मिक जागृति से आता है। राधाकृष्णन जी की कहानी यह बताती है कि जब मन, विचारों और अनुभवों का मिलन होता है, तो व्यक्ति सहज रूप से सही निर्णय लेता है।
प्रधानमंत्री का यह बयान आधुनिक समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है — जहां खान-पान को लेकर लोगों में अक्सर बहसें होती रहती हैं। उनका संदेश संतुलन, सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करता है।
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