AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में स्थित रायभा टोल प्लाजा इन दिनों चर्चा और विवाद का केंद्र बना हुआ है। मथुरा दर्शन कर लौट रहे एक पर्यटक परिवार के साथ यहां जो हुआ, उसने न केवल टोल प्लाजा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य में पर्यटकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की हकीकत को भी उजागर कर दिया है।

🚗 मथुरा दर्शन से लौट रहा था परिवार
जानकारी के अनुसार, यह परिवार मध्य प्रदेश का रहने वाला है और मथुरा में धार्मिक दर्शन के बाद अपने घर लौट रहा था। रात के समय जब उनकी कार दक्षिणी बाईपास पर स्थित रायभा टोल प्लाजा पर पहुंची, तब वहां मौजूद टोल कर्मियों के साथ किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने नियमानुसार टोल शुल्क चुकाया था और बैरियर खुलने के बाद गाड़ी आगे बढ़ाई। इसी दौरान अचानक टोल कर्मियों ने गाड़ी को रोक लिया और बहस शुरू हो गई।
🔨 कार का शीशा तोड़ने का आरोप
विवाद बढ़ते ही हालात बिगड़ गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि टोल प्लाजा पर मौजूद कुछ कर्मियों ने गुस्से में आकर उनकी कार पर हमला कर दिया और लोहे की रॉड या किसी कठोर वस्तु से कार का शीशा तोड़ दिया। शीशा टूटते ही कार में बैठे बच्चों और महिलाओं में दहशत फैल गई।
परिवार का दावा है कि यदि शीशा अंदर की ओर गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह महज़ एक झगड़ा नहीं, बल्कि सीधी तौर पर जानलेवा लापरवाही थी।
🚺 महिलाओं से अभद्रता के गंभीर आरोप
इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू महिलाओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार है। पीड़ितों का आरोप है कि टोल कर्मियों ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया।
परिवार का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो टोल कर्मियों की संख्या बढ़ती चली गई और माहौल और ज्यादा डरावना हो गया। टोल प्लाजा कुछ ही मिनटों में कानून के दायरे से बाहर जाता हुआ नजर आने लगा।
🎥 सीसीटीवी जांच से इनकार?
पीड़ित परिवार ने मौके पर मौजूद पुलिस से सीसीटीवी फुटेज देखने और दोषियों की पहचान करने की मांग की। आरोप है कि टोल प्रबंधन ने शुरुआत में सीसीटीवी जांच से टालमटोल किया और पुलिस भी इस पर कोई सख्त रुख अपनाती नजर नहीं आई।
यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब टोल प्लाजा पर हर गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड होती है, तो फिर सच्चाई सामने लाने में हिचक क्यों?
👮 पुलिस की मौजूदगी, लेकिन कार्रवाई शून्य?
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने सिर्फ औपचारिकता निभाई। न तो तत्काल किसी टोल कर्मी के खिलाफ कार्रवाई हुई और न ही मौके पर कोई स्पष्ट जांच शुरू की गई।
परिवार का कहना है कि पुलिस की निष्क्रियता ने टोल कर्मियों के हौसले और बढ़ा दिए। यदि मौके पर ही सख्त कदम उठाया जाता, तो शायद पीड़ितों को कुछ हद तक न्याय का भरोसा मिलता।
🏗️ टोल प्रबंधन की सफाई
दूसरी ओर, टोल प्लाजा प्रबंधन ने अपने बचाव में कहा है कि कार चालक ने जल्दबाज़ी में वाहन आगे बढ़ाया, जिससे बैरियर से टकराने के कारण शीशा टूट सकता है। प्रबंधन का दावा है कि पूरे मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जाएगी।
हालांकि, पीड़ित परिवार इस तर्क को सिरे से खारिज करता है और कहता है कि यदि गलती चालक की होती, तो टोल कर्मियों का हिंसक व्यवहार और महिलाओं से बदसलूकी कैसे जायज़ ठहराई जा सकती है?
❓ पर्यटक सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं है, बल्कि देशभर से आगरा और मथुरा आने वाले लाखों पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। टोल प्लाजा जैसे संवेदनशील स्थान, जहां हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं, अगर वहां अराजकता होगी तो आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगा?
⚖️ न्याय के लिए दर-दर भटकता परिवार
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे और लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे। उनका कहना है कि उनके पास सबूत मौजूद हैं, लेकिन फिर भी यदि जांच नहीं होती, तो यह पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल होगा।
रायभा टोल प्लाजा की यह घटना बताती है कि किस तरह कुछ स्थानों पर कानून का डर खत्म होता जा रहा है। टोल कर्मियों की कथित गुंडागर्दी, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और पुलिस की निष्क्रियता ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या पीड़ित परिवार को वास्तव में न्याय मिल पाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
The Rai Bha Toll Plaza violence incident has raised serious concerns about highway safety in India, especially for tourist families. Allegations of toll staff misbehavior, women harassment, car window damage, and police inaction highlight gaps in law enforcement and toll plaza management. Such incidents negatively impact tourist confidence in regions like Agra and Mathura, making this case crucial for discussions around toll plaza security, police accountability, and traveler safety in India.


















