AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक शहर वृंदावन में सोमवार देर रात एक अप्रत्याशित हंगामा देखने को मिला। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पावन भूमि में शांति और भक्ति का माहौल रहता है, लेकिन इस बार माहौल तब बिगड़ गया जब दिल्ली और गाजियाबाद के करीब एक दर्जन युवक सुनरख मार्ग पर मौजूद शराब की दुकानों को बंद कराने पहुंचे।

इन युवकों ने दुकानदारों से तीखे लहजे में कहा कि “राधाकृष्ण की नगरी में शराब की दुकानें नहीं चलेंगी”, और इस बात पर जोर दिया कि यह कदम धार्मिक भावनाओं और मर्यादा की रक्षा के लिए जरूरी है। यह पूरा विवाद उस समय और भी महत्वपूर्ण हो गया जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा और कुछ ही घंटों में यह मुद्दा शहर और जिले के चर्चाओं का केंद्र बन गया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि एक दिन पहले शुरू हुई थी।
रविवार को बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वृंदावन में सनातनी हिंदू एकता पदयात्रा के समापन पर ब्रजवासियों से अपील करते हुए कहा था कि:
“वृंदावन के प्रवेश मार्गों और सुनरख रोड पर खुली शराब की दुकानों को बंद कराना चाहिए।”
उन्होंने कहा था कि पवित्र शहर में शराब की दुकानें धार्मिक संस्कृति का अपमान करती हैं और ब्रज की आस्था के साथ खिलवाड़ करती हैं। इस अपील ने शहर में एक नई बहस को जन्म दिया। कई लोग शास्त्री के समर्थन में आए, जबकि कुछ लोगों ने इसे कानून व्यवस्था की समस्या बताया।
इसी अपील के अगले ही दिन यह समूह शराब की दुकानों पर पहुंचा, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह घटना उसी बयान से प्रेरित थी।
युवकों का विरोध और मौके पर तनाव
सोमवार रात को लगभग एक दर्जन युवक तीन शराब की दुकानों पर पहुंचे। बताया गया कि ये युवक दिल्ली और गाजियाबाद के रहने वाले हैं और कुछ स्थानीय लोगों ने इनमें से एक युवक को कथित गौरक्षक दक्ष चौधरी के रूप में पहचाना। वायरल वीडियो में दक्ष चौधरी हाथ जोड़कर दुकानदारों से दुकान बंद करने की अपील करते दिख रहे हैं।
युवकों ने दुकानदारों को चेतावनी देते हुए कहा—
“यह भगवान कृष्ण की नगरी है, यहां शराब नहीं बिकेगी। यह बात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने भी कही है।”
दुकानदारों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में गर्मागर्मी बढ़ गई। कुछ ही मिनटों में वहां भीड़ इकट्ठा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
पुलिस पहुंचने से पहले युवक हुए फरार
जब यह सूचना पुलिस तक पहुंची तो रमणरेती चौकी की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई।
लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही सभी युवक वहां से फरार हो चुके थे। पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि:
युवकों ने तीन शराब की दुकानों पर दबाव बनाया।
दुकानदारों को डर और असुरक्षा महसूस हुई।
युवकों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।
वीडियो के आधार पर उनकी पहचान की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई तय है।
फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शराब की दुकानों को बंद नहीं किया गया है, और वे पहले की तरह वैध लाइसेंस के आधार पर चल रही हैं।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई खलबली
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो में:
दक्ष चौधरी हाथ जोड़कर दुकानदार से कहते दिखते हैं—
“दुकान बंद कर दो, यह कृष्ण की नगरी है।”
उनके पीछे लगभग 10–12 युवक खड़े दिखाई देते हैं।
सभी युवक एक स्वर में दुकानें बंद कराने की बात कर रहे हैं।
वीडियो के वायरल होते ही लोग दो हिस्सों में बंट गए—
१. एक पक्ष का कहना है:
शराब की दुकानें धार्मिक नगरी में नहीं होनी चाहिए।
बाहर से आने वाले युवकों के विरोध में कोई बुराई नहीं।
धीरेंद्र शास्त्री की अपील उचित है।
२. दूसरा पक्ष यह कह रहा है:
कानून हाथ में लेना गलत है।
पुलिस और प्रशासन को फैसला करने देना चाहिए।
बाहर के युवकों का हस्तक्षेप शहर की शांति बिगाड़ सकता है।
शहर में उभरी नई बहस – “क्या शराब की दुकानें बंद होनी चाहिए?”
इस घटना ने वृंदावन में एक व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
कई धार्मिक नेता, स्थानीय निवासी और व्यापारी अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।
स्थानीय निवासियों की राय:
कुछ लोगों ने कहा कि शराब की दुकानों की वजह से यहां असामाजिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं।
कई लोग देर रात शराब पीकर सड़क पर उत्पात करते हैं।
तीर्थ नगरी की गरिमा को शराब से चोट पहुंचती है।
व्यापारियों का मत:
उनका कहना है कि दुकानों के पास सभी वैध लाइसेंस हैं।
यदि सरकार बंद कराए तो मान्य है, पर किसी समूह के दबाव में बंद नहीं किया जा सकता।
डर की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
कानून व्यवस्था की चुनौती:
पुलिस अब वीडियो से युवकों की पहचान में लगी है।
प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि कहीं यह विरोध किसी संगठित समूह की ओर से तो नहीं था।
पुलिस की जांच जारी, बड़ी कार्रवाई की तैयारी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि:
किसी भी व्यक्ति या समूह को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं है।
धार्मिक भावनाओं के नाम पर दहशत फैलाना अपराध है।
वीडियो में दिख रहे सभी युवकों के चेहरे साफ हैं।
तकनीकी मदद से जल्द उनकी पहचान हो जाएगी।
दुकानदारों को सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा हंगामा केवल दुकानों को बंद कराने की चेतावनी तक सीमित रहा और दुकानें बंद नहीं हुईं।
वृंदावन—एक धार्मिक शहर में बढ़ती संवेदनशीलता
ऐसे मुद्दे वृंदावन जैसे धार्मिक शहर में बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।
धार्मिक नगरी में शराब की बिक्री हमेशा विवाद का विषय रही है।
हालांकि, यह भी सच है कि शहर में हजारों तीर्थयात्री और पर्यटक रोज आते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ भी जारी रहती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या पवित्र शहरों में शराब की दुकानें होनी चाहिए या नहीं?
यह सवाल अब राजनीति, प्रशासन, धर्मगुरुओं और जनता – सभी के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
वृंदावन की इस घटना ने धार्मिक भावनाओं, कानून व्यवस्था और सामाजिक मर्यादा के बीच एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
धीरेंद्र शास्त्री की अपील के बाद विरोध की शुरुआत भले ही भावनात्मक स्तर पर हुई हो, लेकिन युवकों का व्यवहार और दुकानों पर दबाव बनाना कानून के दायरे से बाहर माना जा रहा है।
पुलिस जांच जारी है और जल्द ही युवकों की पहचान सुनिश्चित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
फ़िलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन पूरा शहर इस बहस में डूबा है कि आखिर पवित्रता और आधुनिक व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
The Vrindavan liquor shop controversy intensified after a group of youths, allegedly associated with cow vigilante Daksh Chaudhary, reached Sunrakh Road to demand the immediate closure of liquor shops. The incident went viral on social media and gained momentum following the appeal by Dhirendra Krishna Shastri of Bageshwar Dham to shut down liquor stores in the holy city. Police intervention, rising public pressure, and the ongoing investigation have made this a major topic in UP and Mathura region news.


















