AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक हलचलों की रफ़्तार तेज़ होना शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने आगामी 2027 के यूपी चुनाव की तैयारियों का अनौपचारिक आगाज कर दिया है। दोनों संगठनों की रणनीतियों में इस बार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई देती है—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की।
विराट हिंदू सम्मेलन: राजनीतिक संदेश या संगठनात्मक कार्यक्रम?
हाल ही में संघ द्वारा आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन सिर्फ एक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यक्रम का स्वरूप, भीड़, वक्ताओं की मौजूदगी और भाषणों का टोन—सब कुछ यह इशारा करता है कि संघ भविष्य के लिए जमीन तैयार कर रहा है।
संघ की इस रणनीति में एक बात साफ दिखाई देती है—योगी आदित्यनाथ को एक व्यापक हिंदुत्व चेहरे के रूप में उभारना। पिछले कुछ वर्षों में योगी न सिर्फ प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मजबूत हिंदुत्व नेता के तौर पर उभरे हैं।
2027 की तैयारी क्यों अभी से?
2022 के चुनाव में बीजेपी ने लगातार दूसरी बार मजबूत जीत हासिल की थी। लेकिन पार्टी और संघ दोनों जानते हैं कि सत्ता को बनाए रखना जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है लगातार तीसरी बार भारी बहुमत पाना।
यही कारण है कि रणनीति समय से पहले शुरू कर दी गई है।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं—
लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव का गैप बढ़ाना
केंद्र और राज्य की राजनीति को अलग-अलग तरीके से मजबूत बनाने की योजना।
जनाधार को फिर से उत्साहित करना
हिंदुत्व के बड़े अभियानों से कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह बढ़ाया जा रहा है।
विपक्ष की सक्रियता
विपक्ष भी लगातार मजबूत गठजोड़ की कोशिशें कर रहा है, ऐसे में बीजेपी शुरुआती बढ़त लेने में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती।
योगी आदित्यनाथ क्यों फोकस में?
योगी आदित्यनाथ को फोकस में रखने के पीछे कई कारण हैं—
1. उनकी छवि: कड़े प्रशासन और हिंदुत्व के संतुलन की ब्रांडिंग
2. युवा समर्थकों में लोकप्रियता
3. पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक मजबूत पकड़
4. अपराध और कानून व्यवस्था पर उनके सख्त कदमों की चर्चा
संघ यह अच्छी तरह समझता है कि 2027 में भी बीजेपी की विजय का रास्ता एक बड़े और स्पष्ट नेतृत्व वाले चेहरे से ही आसान हो सकता है। योगी की लोकप्रियता और उनके आसपास बनाई गई ‘कठोर लेकिन प्रभावी नेता’ की छवि इसमें मददगार हो सकती है।
हिंदुत्व की बिसात बिछाना: संघ की पारंपरिक रणनीति
RSS हमेशा से चुनावों के पहले जनसंघर्ष और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से वातावरण तैयार करता रहा है।
इस बार भी—
बड़े धार्मिक सम्मेलन
मंदिरों और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम
समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद
युवाओं और महिलाओं को संगठन से जोड़ने के अभियान
जैसी गतिविधियों को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या यह 2027 के लिए तैयारी का संकेत है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाँ, यह सीधे तौर पर 2027 की तैयारी है।
कारण:
बड़े पैमाने पर हिंदुत्व आधारित कार्यक्रम
योगी आदित्यनाथ को प्रमुख चेहरा बनाकर पेश करना
स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक मजबूती
बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का पुनर्संगठन
इन सभी गतिविधियों का मकसद चुनावी तैयारी ही है।
बीजेपी और संघ की संयुक्त रणनीति
संघ और बीजेपी की रणनीति हमेशा दो स्तरों पर काम करती है—
1. सांस्कृतिक और वैचारिक माहौल तैयार करना (RSS)
2. राजनीतिक रूप से उसे कैश करना (BJP)
इस बार भी यही देखा जा रहा है।
विराट हिंदू सम्मेलन जैसे कार्यक्रम वोट बैंक को मज़बूत करने में मदद करते हैं, वहीं पार्टी स्तर पर बूथ मैनेजमेंट, सोशल मीडिया कैंपेन और राजनीतिक संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं।
विपक्ष पर असर
इस रणनीति का सीधा दबाव विपक्ष पर पड़ता है।
क्योंकि भारतीय राजनीति में जब हिंदुत्व का नैरेटिव तेज होता है, विपक्ष को अपनी रणनीति बदलनी पड़ती है।
यूपी में इस समय विपक्ष पहले से ही बिखरा हुआ है—
SP गठबंधन की कोशिश में है
कांग्रेस अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है
BSP अभी भी स्पष्ट दिशा में नहीं दिख रही
इस कमजोर स्थिति का फायदा बीजेपी को मिल सकता है।
संघ का विराट हिंदू सम्मेलन सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 यूपी चुनाव की तैयारी का संकेत है।
योगी आदित्यनाथ को लगातार फोकस में रखना यह दर्शाता है कि बीजेपी और संघ आने वाले वर्षों में उन्हें ही चुनाव जीतने का मुख्य चेहरा बनाना चाहते हैं।
अगर यही रफ्तार बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प होती दिखाई देगी।
The RSS and BJP have begun building early momentum for the UP Election 2027, placing Yogi Adityanath at the center of their evolving Hindutva strategy. Through large-scale events like the mega Hindu conference, the RSS aims to strengthen ideological outreach while the BJP aligns political organization at the grassroots level. This coordinated strategy highlights keywords like UP politics, BJP campaign, Hindutva narrative, and Yogi Adityanath leadership, making it crucial for search visibility and audience engagement.



















