AIN NEWS 1: संसद का शीतकालीन सत्र इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। जहां सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही, वहीं तीसरे दिन की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांत माहौल में पूरी हुई। लेकिन परिस्थितियाँ एक बार फिर बदल रही हैं। संकेत साफ़ हैं कि आज का दिन भी राजनीतिक गर्माहट से भरा हो सकता है, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव का नया केंद्र बन गया है—दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण और उससे जुड़ी सरकारी तैयारियाँ।
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पहले तीन दिन कैसे बीते?
सत्र के शुरुआती दो दिन विशेष तौर पर विवादों से भरे रहे। विशेष रूप से SIR (Special Investigation Report) मामले पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे। दोनों तरफ से तीखी बयानबाज़ी हुई और कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिसके चलते संसद का माहौल गर्माते देर नहीं लगी।
लेकिन तीसरा दिन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। इस दिन अधिकांश कार्यवाही बिना किसी बड़े व्यवधान के आगे बढ़ी, जिससे उम्मीद जगी कि शायद सदन की कार्यशैली सामान्य हो सकती है। हालांकि, संसद के बाहर विपक्षी दलों ने अपनी विरोध रैलियाँ और प्रदर्शन जारी रखे। प्रदूषण, मनरेगा, नए श्रम कानून और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष सड़क पर उतर आया।
आज का दिन क्यों है खास?
चौथे दिन की शुरुआत फिर से प्रदूषण के मुद्दे के साथ होने जा रही है। दिल्ली-एनसीआर में तेजी से बिगड़ती वायु गुणवत्ता राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार प्रदूषण रोकने में नाकाम रही है और कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि प्रदूषण से निपटने के लिए कई योजनाएँ और उपाय पहले से लागू हैं और राज्यों को भी अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी चाहिए।
AQI (Air Quality Index) लगातार गंभीर श्रेणी में पहुँच रहा है। सुबह-सुबह की धुंध अब जहरीली स्मॉग का रूप ले चुकी है। इस मुद्दे को विपक्ष संसद के भीतर उठाने की तैयारी में है, और उसके तेवरों को देखकर साफ़ है कि हंगामे की पूरी संभावना है।
विपक्ष की रणनीति क्या है?
विपक्ष ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वह आज प्रदूषण, मनरेगा फंडिंग और श्रम सुधारों के मुद्दों को ज़ोरदार तरीके से रखेगा। उनके सांसदों ने संसद परिसर में पोस्टर लेकर प्रदर्शन भी किया। उनका दावा है कि सरकार जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।
विशेष रूप से मनरेगा में घटती फंडिंग को लेकर विपक्ष बेहद आक्रामक है। उनका कहना है कि ग्रामीण भारत में रोजगार का यह सबसे बड़ा स्रोत है, और इसकी अनदेखी करना गरीबों को सीधे प्रभावित करता है। इसी तरह, नए श्रम कानूनों को लेकर भी विपक्ष का कहना है कि इससे मजदूरों पर बोझ बढ़ेगा और श्रमिक अधिकार कमजोर होंगे।
लेकिन आज का मुख्य मुद्दा प्रदूषण ही माना जा रहा है। विपक्ष की मांग है कि सरकार इस पर विस्तृत चर्चा कराए और दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते स्वास्थ्य संकट को गंभीरता से ले।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है, बल्कि वह चाहती है कि चर्चा सार्थक और तथ्यों पर आधारित हो। प्रदूषण से लड़ने के लिए केंद्र ने कई तकनीकी कदम उठाने का दावा किया है—जैसे ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP), उद्योगों की मॉनिटरिंग और राज्यों के साथ समन्वय।
सरकार का दावा है कि प्रदूषण केवल दिल्ली की समस्या नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत की साझा चुनौती है, और इसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है।
आज सदन का माहौल कैसा रहेगा?
अनुमान है कि जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होगी, विपक्ष प्रदूषण का मुद्दा उठाएगा और चर्चा की मांग करेगा। कई विपक्षी दलों ने पहले ही वॉकआउट की संभावना जताई है, यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सर्दियों में हर साल प्रदूषण का मुद्दा तेजी से उभरता है और इस बार इसकी राजनीतिक गूंज संसद में और अधिक सुनाई दे सकती है। SIR विवाद के बाद विपक्ष और अधिक आक्रामक है और सरकार भी पीछे हटती नहीं दिख रही। ऐसे में टकराव तय माना जा रहा है।
लोगों की क्या उम्मीद है?
दिल्ली-एनसीआर की जनता लगातार प्रदूषण से परेशान है। सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, और कई स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। मौसम विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ पहले ही अलर्ट जारी कर चुके हैं।
लोगों की उम्मीद है कि संसद में हो रही यह बहस सिर्फ शब्दों का आदान-प्रदान न रहे, बल्कि सरकार और विपक्ष मिलकर कोई कारगर नीति तैयार करें। क्योंकि प्रदूषण सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं—यह स्वास्थ्य और जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है।
शीतकालीन सत्र का चौथा दिन शुरुआत से ही गरम रहने वाला है। प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आज सदन में कोई ठोस कदम की घोषणा होती है या फिर एक और दिन हंगामे में निकल जाता है।
The ongoing Winter Session of the Indian Parliament is witnessing heightened tensions as the opposition prepares to raise critical issues such as rising air pollution in Delhi-NCR, the worsening AQI levels, concerns over MGNREGA funding cuts, and the government’s handling of labor laws. With the recent SIR controversy still fresh, the debate around air pollution and public health is expected to dominate today’s proceedings, making this session one of the most politically charged moments of the season.



















