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समान नागरिक संहिता पर सरकार से मजबूत कदम की मांग: जगद्गुरु रामभद्राचार्य!

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AIN NEWS 1: बाबा बागेश्वर धाम की पदयात्रा के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करते हुए जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू कराने के लिए अब समाज को एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी। उनका मानना है कि भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे देश में एक समान कानून व्यवस्था सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय एकता को मजबूती देती है।

स्वामी रामभद्राचार्य ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक नागरिक एक स्वर में अपनी मांग नहीं रखेंगे, तब तक किसी भी बड़े निर्णय को लागू कर पाना मुश्किल होता है। उनका यह संदेश न केवल आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए, बल्कि उन सभी नागरिकों के लिए था जो एक न्यायपूर्ण, समान और आधुनिक भारत का सपना देखते हैं।

पदयात्रा का संदेश — एकता और सामाजिक सुधार

बाबा बागेश्वर धाम द्वारा आयोजित इस पदयात्रा का उद्देश्य समाज को जोड़ना और राष्ट्र के हित से जुड़े मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना था। हजारों लोग इस यात्रा में शामिल हुए और विभिन्न धार्मिक तथा सामाजिक संदेशों को आगे बढ़ाया। यात्रा के अंतिम दिन मंच से बोलते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल भक्ति तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बनते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि:

“अगर राष्ट्र के हित की बात हो, तो समाज को मिलकर खड़ा होना ही पड़ेगा। सरकार पर दबाव तभी बनता है जब जनता अपनी मांगों पर एकसाथ आवाज़ उठाती है।”

समान नागरिक संहिता क्यों जरूरी?

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने वक्तव्य में UCC की आवश्यकता को बहुत सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि आज भी कई मामलों में अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानून चलते हैं, जिससे न्याय और समानता में अंतर पैदा होता है। समान नागरिक संहिता लागू होने पर:

सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होगा

विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मुद्दे सरल होंगे

सामाजिक भेदभाव कम होगा

महिलाओं के अधिकारों को और मजबूत आधार मिलेगा

उनके अनुसार देश में कई बार ऐसी बहसें उठीं, लेकिन आज के समय में यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि समाज तेजी से बदल रहा है और नई पीढ़ी समानता चाहती है।

आध्यात्मिक गुरु का सामाजिक संदेश

जगद्गुरु रामभद्राचार्य केवल आध्यात्मिक नेता ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक के रूप में भी पहचाने जाते हैं। उनका यह संदेश इस बात की ओर संकेत करता है कि धार्मिक नेतृत्व भी कानून, व्यवस्था और सामाजिक संरचना के मुद्दों पर खुलकर अपनी सोच साझा कर रहा है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने का माध्यम भी है।

उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएँ हमें एकता का संदेश देती हैं, और यदि देश को आगे बढ़ाना है तो कानूनी और सामाजिक ढांचे को भी समय-समय पर सुधारा जाना चाहिए। उनके अनुसार समान नागरिक संहिता एक ऐसा कदम है जो समाज को और अधिक न्यायपूर्ण व सामंजस्यपूर्ण बनाएगा।

लोगों की प्रतिक्रिया और समर्थन

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस मुद्दे पर स्वामी रामभद्राचार्य के विचारों का समर्थन किया। यात्रा में शामिल कई लोगों ने कहा कि आध्यात्मिक नेताओं द्वारा ऐसे मुद्दों पर बोलना समाज को प्रेरित करता है। देशभर में चल रही UCC पर बहस को इस बयान ने नई दिशा दी है।

कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि समाज एकजुट हो जाए तो सरकार को निर्णय लेने में आसानी होती है। ऐसी यात्राएँ और कार्यक्रम लोगों में जागरूकता बढ़ाते हैं, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है।

अंत में — एक सकारात्मक अपील

अपने भाषण के अंत में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने सभी से आग्रह किया कि वे देश के हित से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि प्रेम, भाईचारा और एकता ही भारत की पहचान हैं, और समान कानून व्यवस्था उसी पहचान को और मजबूत करेगी।

उनकी यह अपील केवल एक धार्मिक मंच से कही गई बात नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक सुधार की दिशा में एक विचारशील कदम था।

Uniform Civil Code in India, social reform, national unity, equal law for all, Baba Bageshwar Dham, Jagadguru Swami Rambhadracharya — The call for implementing a Uniform Civil Code is gaining momentum as spiritual leaders like Jagadguru Swami Rambhadracharya emphasize the need for a unified legal system. Public awareness, social harmony, women’s rights, and a stronger national identity are key aspects that support the demand for UCC in India. This article highlights how collective public voices and spiritual leadership can play a major role in shaping future legal reforms.

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