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सर्दी सत्र के तीसरे दिन संसद में विपक्ष का प्रदूषण विरोध, मास्क और पोस्टर के साथ तीखा संदेश!

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AIN NEWS 1: संसद के शीतकालीन सत्र का तीसरा दिन कई मायनों में खास रहा। इस दिन लोकसभा में सिर्फ विधायी गतिविधियाँ ही नहीं दिखीं, बल्कि प्रदूषण के बढ़ते संकट के मुद्दे ने सबसे अधिक ध्यान खींचा। दिल्ली की हवा लगातार खतरनाक स्तर पर बनी हुई है और इसी को लेकर विपक्षी सांसदों ने एक अनोखा और सशक्त विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सदन में प्रवेश करते समय अपने चेहरे पर मास्क पहने थे और हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिन पर प्रदूषण की भयावह स्थिति और सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए गए थे।

दिल्ली और आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के आते ही हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो जाती है। पार्टिकुलेट मैटर का स्तर कई बार खतरनाक सीमा को पार कर जाता है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए साँस लेना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जब पूरे क्षेत्र में दमघोंटू हवा का संकट जारी है, तब संसद में सांसदों का इस मुद्दे को ऊँची आवाज में उठाना स्वाभाविक था।

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तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने अपने तेवर साफ कर दिए थे। संयुक्त विपक्ष के कई सदस्य मास्क पहनकर परिसर में पहुंचे और कैमरों के सामने अपने पोस्टर दिखाते हुए कहा कि सरकार केवल दावे करती है, लेकिन सड़कों पर लोगों की साँसें टूट रही हैं। कई सांसदों ने यह सवाल भी उठाया कि जब दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है, तब केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन आखिर क्या कदम उठा रहे हैं?

लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो यह मुद्दा और ज्यादा गर्माहट के साथ उठा। विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि प्रदूषण अब सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य का गंभीर संकट बन चुका है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि स्कूलों के बंद होने, बच्चों में बीमारियों के बढ़ने और अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के बाद भी कोई ठोस नीति सामने नहीं आती।

विपक्ष ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह प्रदूषण के मूल कारणों—जैसे पराली प्रबंधन, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और वाहनों से होने वाला प्रदूषण—पर अंकुश लगाने में विफल रही है। उनका कहना था कि जब तक इन समस्याओं के लिए एक आधुनिक, वैज्ञानिक, और समन्वित नीति नहीं बनाई जाएगी, तब तक दिल्ली और NCR की हवा हर साल लोगों के जीवन से खिलवाड़ करती रहेगी।

इसके जवाब में सत्तारूढ़ दल के कुछ सांसदों ने कहा कि सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि स्मॉग टॉवर, निर्माण कार्यों पर निगरानी, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, और स्टबल मैनेजमेंट की नई तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे कई कदम लागू किए जा रहे हैं। हालाँकि, विपक्ष इन दावों से संतुष्ट नहीं दिखा और बार-बार जोर देकर कहा कि “जमीन पर” स्थितियाँ बेहतर नहीं हो रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने संसद में माहौल को और भी गंभीर कर दिया। यह स्पष्ट था कि विपक्ष चाहता है कि प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि एक ठोस कार्ययोजना सामने आए। कई सांसदों ने सुझाव दिया कि प्रदूषण को सिर्फ पर्यावरण मंत्रालय तक सीमित न रखते हुए इसे स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन और शहरी विकास मंत्रालयों के साथ मिलकर एक राष्ट्रीय आपात मुद्दे के रूप में लिया जाए।

सांसदों ने यह भी कहा कि दिल्ली की हालत सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं है बल्कि देश की राजधानी होने के नाते यह राष्ट्रीय स्तर का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी की हवा इतनी खराब है कि कई बार WHO की रैंकिंग में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली शीर्ष पर पहुंच जाती है, तो फिर इसे लेकर कोई राष्ट्रीय आपातकालीन योजना क्यों नहीं दिखाई देती?

इस विरोध में शामिल सांसदों का मकसद केवल सरकार पर निशाना साधना नहीं था, बल्कि जनता के लिए एक मजबूत संदेश देना था कि उनके स्वास्थ्य के मुद्दे को संसद के भीतर गंभीरता से उठाया जा रहा है। मास्क पहनने से उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि आज दिल्ली की असली तस्वीर क्या है — जहाँ बिना मास्क के बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी इन तस्वीरों ने तेजी से जगह बनाई। #WinterSession, #Parliament और #Pollution जैसे हैशटैग पूरे दिन ट्रेंड करते रहे। लोग अपनी राय देते दिखे कि आखिर कब दिल्ली को इस संकट से राहत मिलेगी। कई लोगों ने सांसदों के इस तरीके की सराहना की कि कम से कम उन्होंने लोगों की वास्तविक समस्या को संसद के भीतर जोरदार तरीके से उठाया।

कुल मिलाकर, संसद के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन प्रदूषण का मुद्दा सबसे अधिक छाया रहा। विपक्षी दलों ने मास्क और पोस्टर के माध्यम से जो विरोध दर्ज कराया, उसने न सिर्फ सदन में बहस को तेज किया, बल्कि देश के सामने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या हमारी नीतियाँ वास्तव में उस दिशा में काम कर रही हैं, जिसकी आज ज़रूरत है।

दिल्ली और NCR के करोड़ों लोगों के लिए यह न सिर्फ पर्यावरण, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। अब यह देखना जरूरी होगा कि आने वाले दिनों में इस दिशा में कोई ठोस और असरदार कदम उठाए जाते हैं या यह मुद्दा सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाएगा।

During the Winter Session of Parliament, opposition MPs raised a strong voice against the worsening Delhi pollution crisis, entering the Lok Sabha wearing masks and carrying protest posters. Their demonstration highlighted rising public concerns about air quality, demanding urgent government action. This detailed coverage explains the political debate, the impact of pollution on citizens, and why the issue has become central during the Parliament Winter Session.

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