AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। गाजियाबाद से भाजपा विधायक गुर्जर अपने बेबाक अंदाज़ और तीखी भाषा के लिए जाने जाते हैं। इस बार वे सहारनपुर में दिए गए एक बयान के कारण सुर्खियों में हैं, जिसने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ी बहस छेड़ दी है।

सभा किस बारे में थी?
नंद किशोर गुर्जर सहारनपुर में आयोजित सनातन चेतना सम्मेलन के मंच पर पहुंचे थे। यह कार्यक्रम हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाने और धार्मिक परंपराओं के सम्मान पर चर्चा करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। यहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और वातावरण धार्मिक जोश से भरा हुआ था।
सभा के दौरान गुर्जर ने धार्मिक आस्था, गाय सुरक्षा और समाज में बढ़ते असंवेदनशील व्यवहार को लेकर अपनी बात रखी। इसी क्रम में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिसने तुरंत लोगों का ध्यान खींच लिया।
गुर्जर ने क्या कहा?
सभा के दौरान गुर्जर ने कहा:
“अगर कोई गाय काटने वाला मिल जाए तो उसके सामने हाथ नहीं जोड़ने चाहिए, बल्कि उसकी गर्दन काट देनी चाहिए। गाय हमारी मां है, और अपनी मां की रक्षा करना हर बच्चे का अधिकार है।”
उनकी इस बात पर सभा में मौजूद कई लोगों ने तालियाँ बजाईं। उनका कहना था कि समाज में आज ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं जो धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाती हैं और लोग चुप रहते हैं। गुर्जर ने कहा कि हिंदू समुदाय को अपनी परंपराओं की रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए।
बयान चर्चा में क्यों आया?
गुर्जर के शब्द इसलिए चर्चा में आए क्योंकि:
उन्होंने गाय सुरक्षा को लेकर बेहद तीखा संदेश दिया
यह मुद्दा पहले भी संवेदनशील रहा है
ऐसे वक्तव्यों का सामाजिक वातावरण पर असर पड़ सकता है
चुनावी समय में ऐसे बयान ध्यान आकर्षित करते हैं
कई लोग इसे धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति मान रहे हैं, जबकि कई लोग कह रहे हैं कि इस तरह की भाषा से समाज में तनाव बढ़ सकता है।
गुर्जर का राजनीतिक अंदाज़
नंद किशोर गुर्जर हमेशा से अपने सीधे और तीखे बोलने के तरीके के लिए जाने जाते रहे हैं।
उनके पिछले भाषणों और कदमों में भी यह देखा गया है:
उन्होंने पहले कहा था कि “उत्तर प्रदेश में रोज़ बड़ी संख्या में गायें काटी जा रही हैं।”
वे स्थानीय स्तर पर मांस की दुकानों को लेकर भी सक्रिय रहे हैं और कई बार कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचकर सख्त रुख अपनाया है।
वे कई प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते रहे हैं।
उनकी इस शैली को समर्थक “निडर और स्पष्टवादिता” कहते हैं, जबकि कुछ लोग इसे “अनावश्यक रूप से आक्रामक” बताते हैं।
कानूनी स्थिति और नियम
गाय सुरक्षा भारत के कई राज्यों में एक बड़ा मुद्दा है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, जहां गोहत्या पर सख्त कानून लागू है।
हालांकि, कानून अपने हाथ में लेना या किसी प्रकार की हिंसा की ओर इशारा करना, जनप्रतिनिधि हो या आम नागरिक — दोनों के लिए गलत माना जाता है।
गुर्जर के बयान के बाद यह चर्चा भी शुरू हुई कि क्या ऐसे शब्द कानून व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इस बयान को लेकर किसी कानूनी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
विपक्षी दलों के नेताओं ने इस बयान की आलोचना की और कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को संयम से बोलना चाहिए।
भाजपा की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कुछ स्थानीय नेताओं ने कहा कि गुर्जर का बयान उनकी व्यक्तिगत भावना हो सकती है।
कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी और कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले को सावधानी से संभालना चाहिए।
सोशल मीडिया प्रतिक्रिया
गुर्जर का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तुरंत बहस छिड़ गई।
X (Twitter), Instagram और Facebook पर लोग इसे लेकर दो हिस्सों में बंट गए:
कुछ लोग कह रहे हैं कि “गाय हमारी आस्था का प्रमुख हिस्सा है, और उसकी रक्षा पर जोर देना गलत नहीं।”
कुछ लोगों का कहना है कि “किसी भी मुद्दे पर तेज भाषा का उपयोग नहीं होना चाहिए।”
कुछ टिप्पणियों में यह भी लिखा गया कि “गुर्जर ने वही कहा जो कई लोग दिल में रखते हैं, लेकिन बोल नहीं पाते।”
पुलिस और प्रशासन की निगरानी
ऐसे भाषणों के बाद प्रशासन सतर्कता बढ़ा देता है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव न बढ़े।
सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस सोशल मीडिया पर फैलने वाली पोस्टों पर नजर रख रही है और स्थिति शांत है।
आगे क्या?
गुर्जर के इस बयान ने एक बार फिर यह बताया है कि धार्मिक मुद्दों से जुड़े वक्तव्यों का सामाजिक और राजनीतिक असर कितना व्यापक हो सकता है। यह भी साफ है कि गाय सुरक्षा का विषय उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि उनके बयान पर राजनीतिक बहस किस दिशा में जाती है और क्या इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है।
Nand Kishore Gurjar’s strong statement in Saharanpur regarding cow protection has drawn widespread public attention. His remarks about cow slaughter, Hindu sentiments, and cultural identity have sparked discussions about law and order, community harmony, and the political atmosphere in Uttar Pradesh. This article highlights the full context of his speech, reactions from various groups, social media responses, and the relevance of cow protection and Hindu identity in UP politics.


















