AIN NEWS 1: चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी मंदिर में इस बार चढ़ावे की गिनती ने सभी पुराने अनुमान पीछे छोड़ दिए। करीब दो महीनों बाद जब मंदिर की भेंट पेटियां खोली गईं, तो पहले ही चरण में 12 करोड़ 35 लाख रुपये की राशि सामने आई। लंबे इंतजार और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण भंडार खोलने की प्रक्रिया इस बार विशेष रूप से चर्चा में रही।

दो महीने बाद खुले भंडार से बड़ी राशि बरामद
दीपावली और अन्य त्योहारों के चलते पिछले दो महीनों से दान पेटियां नहीं खोली गई थीं। मंदिर की परंपरा के हिसाब से हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भंडार खोला जाता है, लेकिन दीपावली और होली जैसे प्रमुख त्योहारों के आसपास आने वाली चतुर्दशी पर दान पेटियां खोलने की अनुमति नहीं होती। इसी वजह से इस बार भेंट राशि दो महीने तक जमा होती रही, और जैसे ही गिनती शुरू हुई, पहले चरण से ही इतनी बड़ी रकम निकल आई।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस बार जमा हुआ चढ़ावा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक है। मंदिर में दीपावली के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी, जिसका सीधा असर दान की राशि पर दिखाई दे रहा है।
गिनती प्रक्रिया सुबह की आरती के बाद शुरू
मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रभा गौतम ने बताया कि बुधवार सुबह राजभोग आरती के बाद दान पेटियों को विधि-विधान से खोला गया। बैंककर्मियों, मंदिर कर्मचारियों और बोर्ड पदाधिकारियों की मौजूदगी में भेंट की रकम को सत्संग भवन में एकत्र कर गिनती का काम शुरू हुआ।
गिनती का काम पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। अधिकारी, कर्मचारी, स्वयंसेवक और बैंक कर्मचारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहते हैं। इसी कारण हर चरण की गिनती और रिकॉर्डिंग सटीक तरीके से हो पाती है।
अमावस्या मेला होने के कारण गिनती रोकी गई
बुधवार शाम तक गिनती का पहला चरण पूरा हुआ, लेकिन अमावस्या मेले की तैयारियों के कारण शाम को प्रक्रिया रोकनी पड़ी। मंदिर में अमावस्या के अवसर पर हजारों की भीड़ उमड़ती है, इसलिए प्रशासन ने गिनती का काम रोककर सुरक्षा प्रबंधन को प्राथमिकता दी।
अब शुक्रवार सुबह से गिनती का दूसरा दौर शुरू होगा और उम्मीद है कि अंतिम आंकड़ा पहले के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
परंपरा में बदलाव: गिनती स्थल बदला
इस बार गिनती के स्थान में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। आम तौर पर चढ़ावा राशि मंदिर परिसर में प्रतिमा के सामने चौक में गिनी जाती थी, ताकि भक्तों को भी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके।
लेकिन इस बार बढ़ती भीड़ और सुरक्षा कारणों से इसे सत्संग भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।
प्रशासन का कहना है कि यह फैसला भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, हालांकि कुछ श्रद्धालु इसे पारंपरिक व्यवस्था में परिवर्तन मानते हुए असंतोष भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि पारंपरिक चौक में गिनती से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी दिखाई देती थी।
पिछले रिकॉर्ड टूटने की संभावना
पहले दिन ही 12.35 करोड़ रुपये मिलने से मंदिर मंडल में उत्साह है। ऐसा माना जा रहा है कि जब शुक्रवार और शनिवार को बाकी चरणों की गिनती पूरी होगी, तो यह राशि अब तक के सबसे बड़े चढ़ावे का रिकॉर्ड बना सकती है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, दीपावली के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई थी। साथ ही, कई परिवारों ने विशेष पूजा-अर्चना के दौरान बड़ी रकम दान पेटियों में अर्पित की थी।
मंदफिया का सांवलियाजी मंदिर राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां चढ़ावा हमेशा से ही काफी अधिक आता रहा है, लेकिन इस बार की राशि ने नए आयाम स्थापित कर दिए हैं।
अंतिम राशि का इंतजार
मंदिर प्रशासन का कहना है कि शुक्रवार और शनिवार को जारी गिनती के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कुल कितना चढ़ावा जमा हुआ है। हालांकि अभी से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार की भेंट राशि सभी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी।
भक्तों और स्थानीय लोगों में भी इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आखिर दो महीनों में मंदिर की दान पेटियों में कितनी रकम जमा हुई होगी।
Sanwaliyaji Temple in Mandfiya has witnessed a record-breaking donation collection, as the temple opened its donation boxes after two months and counted ₹12.35 crore in the first phase alone. Devotees from across Rajasthan and India contributed generously during the festive season, making this one of the highest-ever collection cycles for the temple. With the next phases of donation counting scheduled to resume soon, officials expect the final figure to surpass previous records, making this a major highlight in Sanwaliyaji Temple donation history.


















