AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के सागर जिले में ईद-मिलाद-उन-नबी के मौके पर निकली वाहन रैली ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही हलकों में हलचल मचा दी है। इस रैली में लगे “सिर तन से जुदा” जैसे उन्मादी नारों ने न केवल शहर की फिजा को गर्माया बल्कि राजनीतिक विवाद को भी जन्म दे दिया।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं पम्मा कुरैशी और फिरदौश कुरैशी के नेतृत्व में निकली इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि रैली में शामिल युवक खुलेआम ऐसे नारे लगा रहे हैं, जो समाज के बीच नफरत फैलाने का कारण बन सकते हैं।
संवेदनशील स्थान पर भड़काऊ नारेबाजी
जुलूस शहर के मुख्य स्थल गौरमूर्ति चौराहे और तीनबत्ती क्षेत्र से होकर गुजरा। यहीं पर युवकों ने वाहन रोककर “गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा” और “नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हो-अकबर” जैसे नारे लगाए।
यह इलाका संवेदनशील माना जाता है क्योंकि पास ही हनुमान मंदिर और गणेश पंडाल स्थित हैं। धार्मिक आयोजनों के बीच लगे इन नारों ने तनाव को और गहरा दिया।
कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल
रैली की अगुवाई कांग्रेस से जुड़े नेताओं पम्मा कुरैशी और फिरदौश कुरैशी ने की। इस वजह से मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेताओं ने युवकों को नारेबाजी से रोकने का प्रयास किया या नहीं।
स्थानीय बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में ऐसी नारेबाजी होना इस बात का प्रमाण है कि वे या तो इस कार्रवाई में शामिल थे या इसे नजरअंदाज कर रहे थे।
हिंदू जागरण मंच का विरोध और FIR की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू जागरण मंच ने कोतवाली थाने में आवेदन देकर रैली के आयोजकों और नारे लगाने वालों पर FIR दर्ज करने की मांग की।
मंच के जिला संयोजक उमेश सराफ ने कहा:
“इस तरह की नारेबाजी न केवल हिंदू समाज बल्कि हर धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। यह शहर की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश है। पुलिस को दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”
पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल
नारेबाजी कोतवाली थाना और ट्रैफिक पुलिस थाना से चंद कदमों की दूरी पर हुई, लेकिन मौके पर तैनात पुलिस ने कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की। इस पर शहरवासियों ने नाराजगी जताई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर वीडियो की जांच शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया है।
भाजपा नेताओं का हमला
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा:
“कांग्रेस नेताओं की अगुवाई में निकली रैली में लगे ऐसे नारे इस बात का सबूत हैं कि कांग्रेस समाज में नफरत की राजनीति कर रही है। यह सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक साजिश है।”
कांग्रेस की सफाई
दूसरी ओर कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का किसी भी भड़काऊ नारे से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जुलूस धार्मिक कार्यक्रम का हिस्सा था और नारेबाजी भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने की, जिनसे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं।
विशेषज्ञों की राय
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान अक्सर भीड़ में शामिल कुछ तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं।
सामाजिक विशेषज्ञ डॉ. राजीव मिश्रा कहते हैं:
“ऐसे नारे देश के लोकतांत्रिक और धार्मिक सौहार्द की भावना के खिलाफ हैं। नेताओं को चाहिए कि वे भीड़ को नियंत्रित करें और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।”
कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट सुमन तिवारी का कहना है:
“इस तरह के नारे भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A और 295-A के तहत अपराध की श्रेणी में आते हैं। पुलिस को बिना देर किए एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।”
स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया
घटना के बाद शहरवासियों में नाराजगी साफ झलक रही है।
कई लोगों ने कहा कि ऐसे नारे त्योहारों की पवित्रता को खराब करते हैं।
स्थानीय व्यापारी वर्ग ने चिंता जताई कि माहौल बिगड़ने से बाजारों पर असर पड़ेगा।
युवाओं ने सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करके प्रशासन से सख्ती की मांग की।
माहौल बिगड़ने की आशंका
सागर शहर इस समय गणेशोत्सव और ईद-मिलाद दोनों त्योहारों के चलते भीड़-भाड़ और धार्मिक आयोजनों से भरा हुआ है। ऐसे में भड़काऊ नारेबाजी से दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव बढ़ने का खतरा है।
प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि शहर का माहौल बिगड़ने से बचाया जाए और दोषियों पर ऐसी कार्रवाई हो जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सागर की इस घटना ने दिखा दिया है कि धार्मिक रैलियों में ज़रा सी लापरवाही पूरे शहर की शांति को खतरे में डाल सकती है। कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में लगे इन नारों ने न केवल राजनीति को गर्माया है बल्कि समाज में भी असुरक्षा की भावना बढ़ाई है। अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन दोषियों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या वास्तव में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था की जाती है या नहीं।
The Sagar Eid Milad rally controversy has triggered political and communal tensions in Madhya Pradesh after inflammatory slogans of “Sar Tan Se Juda” were raised near Hindu temples. Allegedly led by Congress leaders Pamma Qureshi and Firdosh Qureshi, the incident sparked outrage across social media. The Hindu Jagran Manch has demanded an FIR against the organizers, while the BJP blamed Congress for encouraging divisive politics. Experts warn that such slogans violate IPC sections 153-A and 295-A and can seriously disturb peace. Police have assured investigation, but public anger continues to grow.


















