Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

सिकंदरा का विद्रोह: 1685 का जाट आंदोलन और अकबर की समाधि की घटना!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: भारत के मध्यकालीन इतिहास में जाटों के विद्रोह एक विशेष स्थान रखते हैं। 17वीं सदी के उत्तरार्ध में जब मुगल साम्राज्य अपने चरम पर था, उसी समय इसके खिलाफ छोटे-छोटे लेकिन प्रखर विद्रोह उभर रहे थे। इन्हीं विद्रोहों में से एक था 1685 ई. का दूसरा जाट विद्रोह, जिसका नेतृत्व राजाराम जाट ने किया। यह आंदोलन न केवल स्थानीय असंतोष का प्रतीक था, बल्कि मुगल सत्ता की जड़ों को भी हिलाने वाला साबित हुआ। इसी विद्रोह के दौरान सिकंदरा (आगरा) स्थित अकबर की समाधि को तोड़ा गया और उसकी अस्थियाँ जलाई गईं।

मुगल सत्ता और जाट असंतोष की पृष्ठभूमि

मुगल शासन के शुरुआती दौर में जाट मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन से जुड़े थे। लेकिन जैसे-जैसे मुगलों का दबदबा बढ़ता गया, उन पर करों का बोझ और प्रशासनिक अत्याचार भी बढ़ते गए।

गाँवों से जबरन वसूली

धार्मिक असहिष्णुता

किसानों के श्रम का शोषण

स्थानीय स्वतंत्रता का हनन

इन सब कारणों से जाटों के भीतर असंतोष पनपता गया।

पहला जाट विद्रोह और उसकी प्रेरणा

जाटों ने सबसे पहले 1669 ई. में गोकुला जाट के नेतृत्व में विद्रोह किया था। यह आंदोलन भले ही दबा दिया गया, लेकिन इसने भविष्य के लिए प्रेरणा का काम किया। गोकुला की शहादत ने जाट समुदाय में यह भावना मजबूत कर दी कि मुगल सत्ता का सामना करना आवश्यक है।

दूसरा जाट विद्रोह (1685 ई.)

सन् 1685 ई. में जाटों ने एक बार फिर से मुगल सत्ता के खिलाफ बिगुल फूंका। इस बार नेतृत्व संभाला राजाराम जाट ने।

राजाराम मथुरा क्षेत्र के प्रसिद्ध जाट सरदार थे। उन्होंने गाँव-गाँव जाकर किसानों और स्थानीय जनता को एकजुट किया। विद्रोह की यह लहर जल्दी ही आगरा और आसपास के इलाकों तक फैल गई।

विद्रोह के मुख्य कारण

1. औरंगज़ेब की कठोर धार्मिक नीतियाँ।

2. किसानों पर बढ़ते कर और जबरन वसूली।

3. स्थानीय स्वशासन की परंपरा का दमन।

4. गोकुला जाट की शहादत से मिली प्रेरणा।

अकबर की समाधि पर आक्रमण

इस विद्रोह का सबसे चर्चित और विवादित प्रसंग रहा सिकंदरा (आगरा) में अकबर की समाधि पर आक्रमण।

कहा जाता है कि जाटों ने मकबरे को खोदकर अकबर की अस्थियाँ निकालीं और उन्हें जला दिया।

यह कदम सिर्फ प्रतिशोध की भावना से नहीं था, बल्कि मुगल सत्ता के खिलाफ एक गहरी नाराज़गी और प्रतीकात्मक विद्रोह था। अकबर को भले ही एक उदार शासक के रूप में याद किया जाता है, लेकिन औरंगज़ेब की नीतियों का गुस्सा जाटों ने पूरे मुगल वंश पर उतारा।

औरंगज़ेब की प्रतिक्रिया

औरंगज़ेब इस घटना से गुस्से में आ गया। उसने जाट विद्रोह को कुचलने के लिए बड़े पैमाने पर सेना भेजी।

कई गाँव जलाए गए।

सैकड़ों जाट योद्धा मारे गए।

हजारों परिवारों को उजाड़ दिया गया।

लेकिन फिर भी जाट पूरी तरह से दबाए नहीं जा सके। वे बार-बार संगठित होकर मुगलों को चुनौती देते रहे।

विद्रोह का प्रभाव

इस विद्रोह का तत्कालीन असर और दीर्घकालिक महत्व दोनों ही गहरे थे।

1. मुगलों की प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुँची।

2. जाटों में स्वतंत्रता की चेतना और तेज़ हुई।

3. आगे चलकर भरतपुर राज्य की नींव पड़ी।

4. स्थानीय किसान और छोटे समुदाय भी जाटों से प्रेरित होकर विद्रोह करने लगे।

इतिहासकारों की दृष्टि

कई इतिहासकारों ने इस घटना को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा है।

कुछ इसे धार्मिक असहिष्णुता और मुगलों से प्रतिशोध की भावना बताते हैं।

जबकि कुछ इसे किसानों और स्थानीय समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष मानते हैं।

आधुनिक इतिहासकार इसे प्रतीकात्मक विद्रोह मानते हैं, जिसने मुगल साम्राज्य की जड़ों को कमजोर किया।

1685 का दूसरा जाट विद्रोह केवल एक स्थानीय आंदोलन नहीं था, बल्कि यह उस समय की सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों की प्रतिक्रिया थी। सिकंदरा में अकबर की समाधि पर हमला इतिहास की एक विवादास्पद लेकिन महत्वपूर्ण घटना है। इस विद्रोह ने यह संदेश दिया कि अन्याय और शोषण चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, आम जनता उसके खिलाफ खड़ी हो सकती है।

जाट विद्रोह की समयरेखा (Timeline)

1669 ई. – पहला जाट विद्रोह गोकुला जाट के नेतृत्व में।

1670 ई. – गोकुला को पकड़कर मुगलों ने शहीद किया।

1685 ई. – दूसरा जाट विद्रोह राजाराम जाट के नेतृत्व में शुरू हुआ।

1685 ई. (सिकंदरा घटना) – जाटों ने आगरा स्थित अकबर की समाधि को तोड़कर उसकी अस्थियाँ जलाईं।

1688 ई. – औरंगज़ेब ने विद्रोह को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर दमन किया।

1690–1700 ई. – जाटों ने बार-बार संगठित होकर मुगलों को चुनौती दी।

1707 ई. – औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद जाट शक्ति और मजबूत हुई।

18वीं सदी की शुरुआत – भरतपुर राज्य की स्थापना हुई और जाट शक्ति संगठित रूप में सामने आई।

प्रमुख जाट नेता और उनका योगदान

1. गोकुला जाट (1669 ई.)

पहला विद्रोह चलाया।

किसानों और स्थानीय जनता को एकजुट किया।

शहादत के बाद भी जाट समाज को लड़ने की प्रेरणा दी।

2. राजाराम जाट (1685 ई.)

दूसरे विद्रोह के नेता।

सिकंदरा में अकबर की समाधि पर हमला कराया।

जाट शक्ति को बड़े पैमाने पर संगठित किया।

3. छुरामन जाट (18वीं सदी की शुरुआत)

भरतपुर राज्य की नींव रखने वाले प्रमुख नेता।

मुगलों को कई बार युद्ध में हराया।

4. सूरजमल जाट (18वीं सदी के मध्य)

भरतपुर के सबसे प्रसिद्ध राजा।

जाट शक्ति को चरम तक पहुँचाया।

उन्हें “जाटों का प्लेटो” कहा जाता है।

जाट विद्रोह सिर्फ स्थानीय आंदोलनों तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज में स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत किया। 1685 का दूसरा विद्रोह और सिकंदरा की घटना इतिहास में हमेशा याद की जाती है। यह घटना दिखाती है कि अत्याचार और शोषण के खिलाफ जब जनता संगठित होती है, तो सबसे शक्तिशाली साम्राज्य भी हिल जाते हैं।

The Second Jat Revolt of 1685, led by Rajaram Jat, marked a turning point in Mughal-Jat relations. During this rebellion, the Jats attacked and burned Akbar’s tomb at Sikandra in Agra, symbolizing their anger against Mughal oppression under Aurangzeb. This historical event not only highlighted the resistance of peasants and local communities but also paved the way for the rise of Jat power in Bharatpur. The burning of Akbar’s tomb remains one of the most significant and controversial incidents in Indian medieval history.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
mist
17.1 ° C
17.1 °
17.1 °
77 %
1kmh
20 %
Tue
18 °
Wed
27 °
Thu
26 °
Fri
27 °
Sat
28 °
Video thumbnail
सदन में Sonia Gandhi के सामने टोका-टाकी कर रहे थे Digvijay, भड़के Amit Shah ने लताड़ भीषण लगा दी!
08:58
Video thumbnail
Hindu Sammelan RSS : हिंदू सम्मेलन में ‘लव जिहाद’ पर सीधा वार, Ghaziabad बना केसरिया सागर
24:42
Video thumbnail
'तेजस्वी यादव नशे की हालत में सदन पहुंचे' BJP ने आरोप लगाया
02:02
Video thumbnail
Yogi के एक-एक आंसू के लिए सदन में भीषण दहाड़े Modi, सन्न रह गए Amit Shah ! Modi Speech | Rajya Sabha
09:31
Video thumbnail
₹21,000 will be given on the birth of the fourth child, and ₹31,000 on the birth of the fifth child
02:42
Video thumbnail
Godaan Movie : फिल्म ‘गोदान’ पर बवाल: नन्द किशोर गुर्जर का तीखा बयान वायरल
19:22
Video thumbnail
Sagarpur Police Station Viral Video : SHO की बदतमीजी, “तेरा वकील भी पिटेगा...” दी धमकी | Sagarpur
14:06
Video thumbnail
"तेरा वकील भी पिटेगा!"सागरपुर पुलिस की गुंडागर्दी | SHO Raj Kumar Exposed !! Delhi
03:00
Video thumbnail
गाजियाबाद में बार्डर-2 का विशेष शो | पत्रकारों और पूर्व सैनिकों के साथ भव्य आयोजन
21:19
Video thumbnail
Akhilesh Yadav on Mamta Banerjee, US Trade Deal
00:55

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related