AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath अपने तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे हुए हैं। शनिवार सुबह उन्होंने गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में करीब डेढ़ सौ से अधिक लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सीधे आम नागरिकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए।

जनता दर्शन के दौरान कई तरह की शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने आईं। इनमें जमीन कब्जे से जुड़े मामले, पुलिस की जांच में लापरवाही, प्रशासनिक देरी और चिकित्सा सहायता से संबंधित समस्याएं शामिल थीं। कुछ शिकायतें ऐसी भी थीं, जिनमें जांच पूरी होने के बावजूद गलत या भ्रामक रिपोर्ट लगाई गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने जानबूझकर गलत रिपोर्ट लगाई है, तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
गलत जांच रिपोर्ट पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जांच में किसी भी तरह की त्रुटि, लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता न्याय की उम्मीद लेकर सरकार तक पहुंचती है। ऐसे में यदि जांच प्रक्रिया ही संदिग्ध हो जाए तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने निर्देश दिया कि जिन मामलों में जांच रिपोर्ट पर शिकायत है, उन्हें दोबारा परखा जाए और यदि दोष सिद्ध होता है तो संबंधित अधिकारी पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि हर पीड़ित को समय पर न्याय मिले।
जनता की समस्याओं में हीलाहवाली नहीं चलेगी
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनता की समस्याओं के समाधान में ढिलाई बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की सहायता में शिथिलता दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई तय है।
जमीन पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में विधि सम्मत और कठोर कार्रवाई की जाए। यदि कहीं भी भूमाफियाओं या दबंगों द्वारा अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
चिकित्सा सहायता के लिए संवेदनशील पहल
जनता दर्शन में कई ऐसे परिवार भी पहुंचे जिनके परिजन गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और आर्थिक रूप से इलाज कराने में असमर्थ हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संबंधित मामलों का मेडिकल इस्टीमेट जल्द से जल्द तैयार कर शासन को भेजा जाए।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरतमंद मरीजों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता बेहद जरूरी है। किसी भी मरीज को आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए।
तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शुक्रवार शाम गोरखपुर पहुंचे। विधानसभा में उद्बोधन समाप्त करने के बाद वे सीधे गोरखपुर आए और वहां से गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। अपने प्रवास के दौरान वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
शिवरात्रि के अवसर पर मुख्यमंत्री विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक भी करेंगे और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। गोरखपुर प्रवास के दौरान वे विकास कार्यों की समीक्षा भी करेंगे और प्रशासनिक बैठकों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेंगे।
जनता दर्शन: संवाद और समाधान का माध्यम
गोरखपुर में जनता दर्शन कार्यक्रम मुख्यमंत्री के लिए केवल औपचारिकता नहीं बल्कि सीधे संवाद का मंच है। यहां वे बिना किसी मध्यस्थ के आम लोगों की समस्याएं सुनते हैं। इस दौरान अधिकारी भी मौजूद रहते हैं ताकि मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए जा सकें।
जनता दर्शन की यही विशेषता है कि इसमें आम नागरिकों को अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं और संबंधित विभागों को समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा जाता है।
प्रशासन को स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि शासन स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है। गलत रिपोर्ट, लापरवाही या भ्रष्टाचार जैसी प्रवृत्तियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की छवि और जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा जब प्रशासन पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से काम करेगा। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ करें।
During the Janata Darshan at Gorakhnath Temple in Gorakhpur, Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath took strict action against officials submitting wrong investigation reports and ordered FIR registration in such cases. He emphasized immediate resolution of public grievances, strong legal action against illegal land encroachment, and financial medical assistance through the Chief Minister’s discretionary fund. The move highlights the UP government’s zero tolerance policy towards administrative negligence and commitment to transparent governance.


















