AIN NEWS 1: योग गुरु स्वामी रामदेव अक्सर अपने बयानों और साफ़-सपाट अंदाज़ के कारण चर्चा में रहते हैं। हाल ही में ‘एजेंडा आजतक’ कार्यक्रम में उन्होंने ऐसा बयान दिया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रामदेव ने कहा कि वह भले ही राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन अगर देशहित की बात हो तो वे 5 से 10 करोड़ लोगों के वोट एक साथ जुटाने की क्षमता रखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान एक सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया और भी ज़्यादा सुर्खियों में रही। जब महिला एंकर ने उनसे पूछा कि वह एक बेहतर योग गुरु हैं या बेहतर व्यापारी, तो स्वामी रामदेव अचानक नाराज़ हो गए और इस सवाल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
एंकर के सवाल पर भड़के रामदेव
कार्यक्रम के दौरान महिला एंकर ने मुस्कुराते हुए रामदेव से सवाल किया—
“आप बेहतर योग गुरु हैं या बेहतर व्यापारी?”
इस पर रामदेव का चेहरा तुरंत गंभीर हो गया। उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा कि उन्हें इस तरह का सवाल पूछने से पहले दस बार सोचना चाहिए।
रामदेव ने कहा:
“व्यापारी किसे कहते हैं, यह आपको पता है? मेरे पास एक चवन्नी तक नहीं है। आपको शर्म नहीं आती मुझे व्यापारी कहते हुए? जो संन्यासी सुबह तीन बजे उठकर रात 10 बजे तक देश की सेवा करता है, उसे व्यापारी बोलने से पहले सोचिए। हम व्यापार नहीं करते, हम लोगों का उपचार और उपकार करते हैं। जो कुछ भी मिलता है, वह भी परमार्थ में लगा देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके नाम पर न तो कोई जमीन है, न बैंक बैलेंस।
“तीस साल पहले भी मैं दो कपड़े पहनता था, आज भी वही पहनता हूं। विरोधी लोग तरह-तरह की बातें फैलाते हैं, लेकिन पत्रकारों को इस तरह के सवाल पूछने से बचना चाहिए।”
एक समय के लिए माहौल शांत हो गया, लेकिन एंकर ने दोबारा वही सवाल पूछा। इस बार रामदेव ने संयमित होकर जवाब दिया।
“मैं योगी हूं, कर्मयोगी हूं” — रामदेव
स्वामी रामदेव ने कहा कि वे सबसे पहले एक योगी और कर्मयोगी हैं। योग और कर्मयोग करने वाले व्यक्ति को समाज खुद सम्मान देता है। यह सम्मान किसी व्यापार या लाभ से नहीं मिलता, बल्कि तप, त्याग और सेवा से प्राप्त होता है।
उन्होंने दावा किया कि देश में उनकी पहुंच बेहद बड़ी है।
“मैं भले ही राजनीतिज्ञ नहीं हूं, लेकिन अगर देशहित की बात हो, तो मैं 5 से 10 करोड़ लोगों के वोट एक दिशा में ले जा सकता हूं। इसे आप मेरी राजनीतिक शक्ति कहें या सामाजिक प्रभाव, यह ताकत मेरे पास जनता के विश्वास से आई है।”
रामदेव ने कहा कि उनकी पहुंच देश के लगभग 100 करोड़ लोगों तक है—
“लोग योग करते हैं, मेरा बताया हुआ लाइफस्टाइल अपनाते हैं। घर-घर तक मेरी बात पहुंचती है। क्या इस देश में किसी और की इतनी रीच है?”
उन्होंने उद्योगपतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अडानी-अंबानी या टाटा-बिड़ला का प्रभाव व्यापार तक सीमित है, जबकि उनका प्रभाव तप और सेवा की वजह से लोगों के दिलों तक पहुंचा है।
“हमने कभी अपने लिए कुछ नहीं मांगा”
रामदेव ने दावा किया कि उन्होंने और आचार्य बालकृष्ण ने कभी भी किसी से अपने लिए कुछ नहीं मांगा।
“हमने न संपत्ति मांगी, न पद मांगा। हमारा पूरा जीवन सेवा को समर्पित है। लोग हमें सम्मान इसलिए देते हैं क्योंकि हमने हमेशा देश और समाज के लिए काम किया।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनके काम का उद्देश्य लोगों में स्वास्थ्य, योग और स्वावलंबन की भावना बढ़ाना है।
जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत
रामदेव का कहना था कि एक योग गुरु शक्ति का दावा कर सकता है, क्योंकि उसके जीवन का आधार ही लोगों का विश्वास होता है।
“जो व्यक्ति योग और सेवा के मार्ग पर चलता है, उसके पास जनता का बेहद मजबूत समर्थन होता है। यह समर्थन ही सबसे बड़ी निधि है।”
उन्होंने बताया कि उनके पास राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं, लेकिन देश के हित में उनकी आवाज़ करोड़ों लोगों को प्रभावित कर सकती है।
कार्यक्रम में छाई रही उनकी प्रतिक्रिया
एंकर से हुए इस संवाद ने कार्यक्रम को काफी रोचक बना दिया। सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो की खूब चर्चा हुई। लोगों ने उनकी नाराज़गी पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं—
कुछ लोगों ने कहा कि एंकर का सवाल गलत था।
कुछ ने कहा कि एक पब्लिक फिगर को ऐसे सवालों से नाराज़ नहीं होना चाहिए।
और कुछ लोग उनके वोट जुटाने वाले बयान को राजनीतिक संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि, रामदेव ने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति में नहीं हैं और न ही राजनीति में जाने का इरादा रखते हैं—पर अगर देशहित में लोगों को दिशा दिखानी पड़े, तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
Swami Ramdev’s recent statement at Agenda Aaj Tak created a major stir as he claimed that he has the ability to mobilize 5 to 10 crore votes in the national interest. His sharp reaction to a question about whether he is a better yogi or a better businessman added further controversy. With widespread influence, massive public reach, and strong social power, Ramdev emphasized that his respect comes from yoga, service, and sacrifice—not business. This makes the Swami Ramdev interview a major trending topic in India’s political and social discourse.



















