AIN NEWS 1: भारत में वायु प्रदूषण लंबे समय से चिंता का विषय रहा है, लेकिन सर्दियों के मौसम में इसकी स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। 9 दिसंबर 2025 की सुबह 9 बजे तक देश के कई बड़े शहरों की वायु में प्रदूषण के स्तर खतरनाक रूप से बढ़े हुए पाए गए। ओपनवेदरमैप द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कई स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘माध्यम’ से लेकर ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। इससे यह साफ है कि भारत में स्वच्छ हवा अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रमुख शहरों का वायु गुणवत्ता स्तर
देश के अलग-अलग हिस्सों से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे प्रदूषण की व्यापकता को दर्शाते हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में AQI 164 दर्ज किया गया, जोश्रेणी में आता है, लेकिन संवेदनशील लोगों के लिए यह हवा भी परेशानी पैदा कर सकती है।
गुरुग्राम के विकास सदन क्षेत्र में AQI 163 दर्ज हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि NCR में अभी भी हवा की गुणवत्ता में अधिक सुधार देखने को नहीं मिला है।
दिल्ली में स्थिति सबसे अधिक गंभीर दिखाई दी, जहां झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया, ITI शाहदरा में AQI 272 रहा। यह स्तर ‘खराब’ श्रेणी में आता है और सांस की समस्या वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष रूप से जोखिमपूर्ण है।
नोएडा के सेक्टर-125 में भी वायु गुणवत्ता खराब रही और AQI 230 दर्ज हुआ। इसी तरह लखनऊ के टॉकाटोरा क्षेत्र में AQI 177 मिला, जो मध्यम श्रेणी का हिस्सा था लेकिन साफ हवा से बहुत दूर।
उत्तर-पूर्व का शहर शिलॉन्ग, जो सामान्यत: स्वच्छ वातावरण के लिए जाना जाता है, वहां भी AQI 201 दर्ज किया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि देश का कोई भी हिस्सा अब प्रदूषण के प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित नहीं बचा है।
पूर्वी भारत के कोलकाता के विक्टोरिया क्षेत्र में AQI 214 और पटना के समनपुरा क्षेत्र में 219 दर्ज किए गए, जो दोनों ‘खराब’ श्रेणी में आते हैं।
मुंबई का सिद्दार्थ नगर-वर्ली क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां AQI 159 रहा, जो सतर्क रहने का संकेत है।
दक्षिण भारत में हैदराबाद के ICRISAT पटानचेरु क्षेत्र में AQI 164 तथा चेन्नई के कोडुंगायूर में AQI 169 दर्ज किया गया। बेंगलुरू के BTM क्षेत्र में AQI 155 रहा। इन शहरों की हवा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं कही जा सकती।
AQI श्रेणियों की स्थिति
जारी किए गए आँकड़ों में पूरे देश की AQI कैटेगरी भी स्पष्ट की गई है :
अच्छी (0-50): सिर्फ 2 स्थान
संतोषजनक (51-100): 8 स्थान
माध्यम (101-200): 68 स्थान
खराब (201-300): 11 स्थान
बहुत खराब (301-400): 1 स्थान
गंभीर (>401): 0 स्थान
यह आंकड़े दिखाते हैं कि अधिकांश शहर ‘माध्यम’ श्रेणी में हैं, जिनमें हवा में मौजूद कणों और रसायनों से स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। ‘खराब’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणियों में आने वाले स्थानों में रहने वाले लोग लगातार स्वास्थ्य जोखिमों के संपर्क में रहते हैं।
लोगों पर प्रभाव: क्यों चिंता जरूरी है?
वायु प्रदूषण सिर्फ एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से श्वसन, हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो:
बच्चों में अस्थमा के मामले बढ़ सकते हैं
बुजुर्गों में सांस की दिक्कतें बढ़ सकती हैं
दिल के मरीजों के लिए बढ़ा जोखिम
आंखों में जलन, गले में खराश और थकान जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं
जब AQI 200 से ऊपर पहुंच जाता है, तब हवा में PM2.5 और PM10 कण खतरनाक स्तर पर होते हैं, जो शरीर में आसानी से दाखिल होकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
क्या किया जा सकता है?
वातावरण में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारें और संस्थाएं प्रयास कर रही हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी सतर्क रहना जरूरी है। विशेषज्ञ नीचे दिए उपायों को सलाह देते हैं:
बाहर निकलते समय मास्क पहनें
भारी ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में जाने से बचें
सुबह और शाम के समय बाहर व्यायाम कम करें
पानी अधिक पिएं और पौष्टिक भोजन लें
घर में एयर प्यूरिफायर का उपयोग करें
प्रदूषणकारी गतिविधियों जैसे कचरा जलाना, धूल उड़ाना आदि से बचें
9 दिसंबर 2025 का यह AQI रिपोर्ट साफ दर्शाता है कि देश के अधिकतर शहर अभी भी प्रदूषण के खतरे से पूरी तरह बाहर नहीं आए हैं। दिल्ली-NCR सहित कई प्रमुख शहरों की स्थिति चिंताजनक है। यह स्थिति न केवल पर्यावरण का नुकसान कर रही है बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल रही है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और जनता मिलकर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए साफ और सुरक्षित हवा सुनिश्चित की जा सके।
India’s air quality levels on 9 December 2025 revealed alarming AQI readings across major cities such as Delhi, Noida, Kolkata, Patna, Hyderabad, and Bengaluru. High concentrations of PM2.5 and PM10 contributed to unhealthy and poor air quality levels, highlighting the urgent need for pollution control measures. With most cities falling under the “Moderate” and “Poor” AQI categories, this report emphasizes the importance of air quality monitoring, environmental protection, and public health safety across India.


















