AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामने आया एक पारिवारिक विवाद अब कानून और समाज दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। मामला किसी आम परिवार का नहीं, बल्कि एक महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टर और उनके पति से जुड़ा है। आरोप, प्रत्यारोप और भावनाओं से भरी यह कहानी अब थाने और कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुकी है।
📍 क्या है पूरा मामला?
बरेली में तैनात महिला सब-इंस्पेक्टर पायल रानी ने अपने पति गुलशन और ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है। पायल का आरोप है कि शादी के बाद से ही उनसे लगातार 10 लाख रुपये नकद और एक कार की मांग की जा रही थी। जब उन्होंने इस मांग को पूरा करने से इनकार किया, तो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पायल रानी का कहना है कि उन्होंने कई बार समझौते की कोशिश की, लेकिन हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते चले गए। आखिरकार उन्होंने कानून का सहारा लेने का फैसला किया।
👩✈️ महिला दारोगा का पक्ष
पायल रानी के अनुसार, शादी के बाद उनका जीवन आसान नहीं रहा। वे बताती हैं कि ससुराल में उन्हें सम्मान की बजाय दबाव और ताने मिले। दहेज की मांग को लेकर आए दिन विवाद होता था। उनका कहना है कि एक महिला होने के नाते और खासकर पुलिस विभाग में रहते हुए उन्होंने काफी सहन किया, लेकिन जब बात आत्मसम्मान और सुरक्षा तक पहुंच गई, तो FIR दर्ज कराना मजबूरी बन गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया गया और मानसिक तनाव के चलते उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित हुआ।
👨🦱 पति गुलशन का जवाब
दूसरी ओर, पति गुलशन का दावा बिल्कुल उल्टा है। उनका कहना है कि पायल रानी को दारोगा बनाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। गुलशन के मुताबिक, उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से पायल की पढ़ाई, कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद की।
गुलशन का कहना है कि जब पायल सब-इंस्पेक्टर बनीं, तो उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए उन्हें और उनके परिवार को झूठे मुकदमे में फंसा दिया।
⚖️ कानूनी मोड़ पर मामला
इस पूरे विवाद के बाद पुलिस ने महिला दारोगा की शिकायत पर IPC की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल दहेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैवाहिक तनाव, अहंकार, करियर संघर्ष और आपसी संवाद की कमी जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
🧠 समाज के लिए क्या संदेश?
यह मामला समाज के सामने कई सवाल खड़े करता है।
क्या हर दहेज का मामला वैसा ही होता है जैसा दिखता है?
क्या कभी-कभी वैवाहिक विवाद कानून की आड़ में और जटिल हो जाते हैं?
और क्या रिश्तों में संवाद की कमी कानून तक पहुंचने की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है?
साथ ही यह भी एक सच्चाई है कि दहेज उत्पीड़न आज भी समाज की कड़वी सच्चाई है, और कई महिलाएं आज भी चुपचाप इसे सहने को मजबूर हैं।
🔍 जांच के बाद ही सामने आएगा सच
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। दोनों ही पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। एक तरफ महिला दारोगा खुद को पीड़िता बता रही हैं, तो दूसरी तरफ पति खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
हापुड़ का यह मामला केवल एक दंपति का निजी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून, रिश्तों और समाज की जटिलताओं को उजागर करता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और संवेदनशील दृष्टिकोण बेहद जरूरी है, ताकि सच सामने आए और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
The Hapur dowry case involving Uttar Pradesh Police Sub Inspector Payal Rani and her husband Gulshan has gained attention across the state. The woman police officer has filed a dowry harassment FIR, alleging demands for cash and a car, while the husband claims he financially supported her education and career. This case highlights complex marital disputes, misuse allegations, and the sensitive intersection of law enforcement and family conflicts in Uttar Pradesh.



















