AIN NEWS 1: सूत्रों के अनुसार, हिन्दू जागरण मंच—जो 1984 से उत्तर प्रदेश में एक सक्रिय हिन्दुत्ववादी संगठन के रूप में जाना जाता है—पिछले कुछ वर्षों से गहरे विवादों में घिरा हुआ है। संघ से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा संचालित यह मंच कभी हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं की ऊर्जा का केंद्र था। हिन्दुत्व के समर्थन में यात्राएँ, धरना-प्रदर्शन और सामाजिक अभियानों की वजह से मंच की एक मजबूत पहचान बनी।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में संगठन के अंदर गंभीर मतभेद, पुराने कार्यकर्ताओं का संगठन छोड़ना, कुछ को बाहर निकाल देना और नेतृत्व पर व्यक्तिगत फायदे के आरोप इस मंच को विवादों के केंद्र में ले आए हैं। स्थिति इतनी बिगड़ी कि अब हिन्दू जागरण मंच के नाम पर दो अलग-अलग धाराएँ बन चुकी हैं—
1. पुराना, गैर-रजिस्टर्ड मंच, और
2. नया, विधिवत रजिस्टर्ड ट्रस्ट, जिसे मंच के ही पूर्व कार्यकर्ताओं ने बनाया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद? — सूत्रों की मानें तो…
सूत्रों का कहना है कि धार्मिक कार्यों के नाम पर संगठन के कुछ बड़े पदाधिकारी मंच को अपने निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने लगे थे।
इसी से नाराज़ होकर कई पुराने और ईमानदार कार्यकर्ताओं ने मंच से दूरी बना ली। कई का दावा है कि उन्हें बाहर निकाल दिया गया।
इन्हीं परिस्थितियों में कुछ वरिष्ठ और समर्पित कार्यकर्ताओं—जो स्वयं RSS के स्वयंसेवक या पदाधिकारी रहे हैं—ने मंच की मूल विचारधारा को बचाने के लिए ‘हिन्दू जागरण मंच’ नाम से एक नaya रजिस्टर्ड ट्रस्ट बनवाया।
इस ट्रस्ट का उद्देश्य था:
असली हिन्दू जागरण विचारधारा को संरक्षित करना,
पारदर्शिता के साथ धार्मिक और सामाजिक कार्य करना,
उन कार्यकर्ताओं को जोड़ना जिनकी उपेक्षा की जा रही थी या जिन्हें बाहर किया गया था।
सूत्रों का कहना है कि रजिस्टर्ड ट्रस्ट, बिना किसी राजनीतिक या निजी लाभ के, शुद्ध रूप से सामाजिक और हिन्दुत्व रक्षा का कार्य कर रहा है।
कुशलपाल सिंह की शिकायत कैसे सामने आई?
इस पूरे विवाद के बीच कुशल पाल सिंह, जो स्वयं को पुराने हिन्दू जागरण मंच का प्रांत सह-संयोजक बताते हैं, ने 07 नवंबर 2025 को थाना कोतवाली, कानपुर नगर में एक लिखित शिकायत दी।
शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि:
कुछ व्यक्ति (जिनमें अतुल मिश्रा, सूर्यकांत सिंह, विजय प्रताप आर्य आदि के नाम शामिल हैं)
हिन्दू जागरण मंच के लोगो, निशान, झंडे और नाम की हूबहू नकल करते हुए
संगठन के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।
कुशलपाल ने यह भी कहा कि AIN News पोर्टल पर “हिन्दू जागरण मंच कानपुर के नए अध्यक्ष बने अतुल मिश्रा” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित हुई।
कुशल पाल का कहना है कि यह खबर झूठी थी और मंच के नाम का गलत उपयोग करते हुए भ्रम फैलाने वाली थी।
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि—
पोर्टल की इस मामले में कोई जिम्मेदारी नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, पोर्टल ने महज़ एक भेजी गई सूचना को प्रकाशित किया था और वह किसी संगठन की आंतरिक राजनीति या वैधता पर टिप्पणी नहीं करता।
रजिस्टर्ड ट्रस्ट की स्थिति—सकारात्मक पक्ष
रजिस्टर्ड हिन्दू जागरण मंच ट्रस्ट के समर्थक बताते हैं कि:
ट्रस्ट कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है,
इसका पंजीकरण पूरी तरह वैध है (Reg. No. 58/07-07-2022, जिला आज़मगढ़),
इसके संस्थापक विजय प्रताप मिश्र (आर्य) हैं,
पूरे प्रदेश में इसके कार्यालय और शाखाएँ सक्रिय हैं।
ट्रस्ट का दावा है कि:
उनका उद्देश्य केवल हिन्दुत्व और सामाजिक जागरूकता है,
वे RSS की मूल भावना और राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ कार्य कर रहे हैं,
पुराने मंच में जो अनियमितताएँ थीं, वे उन्हें सुधारकर पारदर्शिता की ओर बढ़ रहे हैं।
नोटिस का विवाद — सूर्यकांत सिंह की तरफ़ से जवाबी कार्रवाई
कुशल पाल सिंह की पुलिस शिकायत के बाद 15 नवंबर 2025 को सूर्यकांत सिंह की ओर से उनके वकील एडवोकेट सौरभ जैन ने एक कानूनी नोटिस जारी किया।
नोटिस में कहा गया कि:
सूर्यकांत सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रजिस्टर्ड हिन्दू जागरण मंच के अध्यक्ष हैं,
उन्हें यह पद 23 फरवरी 2025 को विधिवत पत्र जारी करके दिया गया था,
संगठन पूरी तरह वैध, रजिस्टर्ड और सक्रिय है।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया कि कुशलपाल सिंह:
झूठी और मनगढ़ंत शिकायत करके
सोशल मीडिया पर गलत प्रचार करके
सूर्यकांत सिंह की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
नोटिस में कुशलपाल से मांग की गई कि:
वे अपने आरोपों का सार्वजनिक खंडन करें,
सोशल मीडिया पर माफी जारी करें,
अन्यथा सूर्यकांत सिंह दीवानी और फौजदारी अदालत में कानूनी कार्रवाई करेंगे।
दोनों पक्षों की बात में टकराव कहाँ है?
1. संगठन की वैधता का मुद्दा
कुशल पाल के अनुसार, मूल मंच वही है जिसमें वे पदाधिकारी हैं,
जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि कानूनी रूप से केवल रजिस्टर्ड ट्रस्ट ही वैध है।
2. लोगो, नाम और झंडे के उपयोग का विवाद
दोनों पक्ष एक ही नाम का उपयोग करते हैं।
कुशलपाल कहते हैं कि दूसरे पक्ष ने नकली लोगो बनाकर अवैध वसूली की।
रजिस्टर्ड ट्रस्ट पक्ष कहता है कि वे असली, विधिवत कानूनी संस्था हैं, इसलिए नाम का उपयोग पूरी तरह सही है।
3. धन उगाही के आरोप
कुशल पाल ने आरोप लगाए—पर सूत्रों के अनुसार इन आरोपों के संबंध में अभी तक कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक नहीं है।
नोटिस में भी सूर्यकांत सिंह ने आरोपों को “षड्यंत्रपूर्ण और गलत” बताया है।
4. सोशल मीडिया पर आरोप–प्रत्यारोप
सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों की खबरें और पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं, जिससे भ्रम और बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार असली समस्या क्या है?
सूत्र बताते हैं कि:
पुराना मंच कई वर्षों से गैर–रजिस्टर्ड था,
व्यक्तिगत नियंत्रण और बंद कमरे की बैठकों ने कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ाई,
बाहर किए गए या उपेक्षित कार्यकर्ताओं ने नया ट्रस्ट बनाकर अधिकार पुनः लेने की कोशिश की,
इससे पुराने नेतृत्व में असहजता बढ़ी,
विवाद अब संगठन vs रजिस्टर्ड ट्रस्ट की लड़ाई बन गया है।
नया ट्रस्ट क्यों सकारात्मक माना जा रहा है? — सूत्रों से जानकारी
सूत्र बताते हैं कि नए रजिस्टर्ड ट्रस्ट की छवि सकारात्मक इसलिए मानी जा रही है क्योंकि:
इसमें जवाबदेही, पारदर्शिता और कानूनी संरचना है,
आर्थिक लेन–देन बैंकिंग सिस्टम से होता है,
कार्यकर्ताओं को पद-लाभ के बजाय वास्तविक सामाजिक काम मिल रहा है,
ट्रस्ट का उद्देश्य केवल हिन्दू समाज की सेवा और जागरूकता है,
कई पुराने ईमानदार कार्यकर्ता इससे जुड़ रहे हैं,
ट्रस्ट राजनीति से दूरी रखकर RSS की मूल विचारधारा पर काम कर रहा है।
पोर्टल की कोई जिम्मेदारी नहीं — सूत्रों का स्पष्ट दावा
AIN News पोर्टल के संदर्भ में सूत्रों ने बताया कि:
पोर्टल को जो सूचना मिली, उसने उसे सामान्य समाचार की तरह प्रकाशित किया,
पोर्टल किसी संगठन की वैधता की जांच करने के लिए बाध्य नहीं है,
इसलिए इस विवाद में पोर्टल की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
आगे क्या? – विवाद अब कानूनी मोड़ पर
स्थिति अब इस मुकाम पर है कि:
एक तरफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज है,
दूसरी तरफ़ कानूनी नोटिस भेजा जा चुका है,
दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर अड़े हुए हैं।
सूत्रों का मानना है कि:
विवाद का समाधान तभी होगा जब दोनों पक्ष कानूनी दस्तावेज और पंजीकरण सबूत पेश करेंगे,
रजिस्टर्ड ट्रस्ट का पक्ष कानूनी रूप से मजबूत माना जा रहा है,
वहीं पुराने मंच का नेतृत्व अपने परंपरागत अधिकार का दावा कर रहा है।
संगठन की लड़ाई नहीं, विचारधारा की लड़ाई
पूरा विवाद इस बात का प्रतीक है कि:
जब किसी संगठन में पारदर्शिता कम होती है,
निजी लाभ बढ़ जाता है,
और योग्य कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती है,
तो विवाद, आरोप–प्रत्यारोप और टूट–फूट होना स्वाभाविक है।
नया रजिस्टर्ड ट्रस्ट—सूत्रों के अनुसार—
हिन्दुत्व की मूल भावना को संरक्षित करने, पारदर्शी कार्यप्रणाली लाने और समाज सेवा बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
जबकि पुराना गैर-रजिस्टर्ड मंच
नेतृत्व पर उठ रहे सवालों और कानूनी अधिकारों की कमी के चलते चुनौती का सामना कर रहा है।
विवाद फिलहाल जारी है, और अब इस मामले का अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया और जांच के बाद ही सामने आएगा।
✔ 1. “पोर्टल किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं करता।”
✔ 2. “यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेज़ों, शिकायतों और सूत्रों पर आधारित है।”









