AIN NEWS 1: देश में तेजी से लोकप्रिय हो रही 10 मिनट में डिलीवरी की व्यवस्था पर अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार के दखल के बाद क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसी कड़ी में ब्लिंकिट (Blinkit) ने अपने 10 मिनट डिलीवरी फीचर को हटाने का फैसला किया है, जबकि जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) भी जल्द ही ऐसे ही कदम उठा सकते हैं।
📌 10 मिनट डिलीवरी मॉडल क्यों आया निशाने पर?
पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के बीच तेज डिलीवरी की होड़ शुरू हो गई थी। पहले 45 मिनट, फिर 30 मिनट और उसके बाद 10 मिनट में डिलीवरी को मार्केटिंग का सबसे बड़ा हथियार बना दिया गया।
लेकिन सरकार का मानना है कि इतनी कम समय सीमा में डिलीवरी कराने का दबाव सीधे डिलीवरी एजेंट्स की सुरक्षा से जुड़ा है।
कई रिपोर्ट्स और शिकायतों में यह बात सामने आई कि डिलीवरी बॉय पर समय का दबाव इतना अधिक होता है कि वे तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और जोखिम भरे रास्तों का सहारा लेते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
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🏛️ केंद्र सरकार का हस्तक्षेप
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने श्रम सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और कर्मचारी कल्याण को ध्यान में रखते हुए इस मॉडल की समीक्षा की।
सरकार का स्पष्ट कहना है कि किसी भी कारोबारी मुनाफे के लिए कर्मचारियों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
इसी कारण सरकार ने क्विक कॉमर्स कंपनियों को संकेत दिए कि वे ऐसे विज्ञापन और फीचर बंद करें, जो अत्यधिक जल्दबाजी और जोखिम को बढ़ावा देते हैं।
🚫 ब्लिंकिट ने लिया पहला बड़ा फैसला
सरकारी दखल के बाद ब्लिंकिट पहली बड़ी कंपनी बनकर सामने आई है, जिसने 10 मिनट डिलीवरी वाले फीचर को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब कंपनी की ओर से डिलीवरी समय को लेकर ज्यादा व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प पेश किए जा सकते हैं।
ब्लिंकिट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कंपनी अब “सुरक्षित और भरोसेमंद डिलीवरी” को प्राथमिकता देगी, न कि सिर्फ रिकॉर्ड समय में ऑर्डर पहुंचाने को।
🍔 जोमैटो और स्विगी पर भी असर तय
ब्लिंकिट के बाद नजरें अब जोमैटो और स्विगी पर टिकी हैं। ये दोनों कंपनियां भी कुछ शहरों में अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी के प्रयोग कर रही थीं।
सरकारी दिशा-निर्देशों के बाद माना जा रहा है कि ये प्लेटफॉर्म भी 10 या 15 मिनट जैसी समय-सीमा वाले फीचर को हटाने का फैसला कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति में भी बदलाव दिखेगा, जहां “सेफ डिलीवरी” और “वर्कर वेलफेयर” जैसे शब्दों को प्रमुखता दी जाएगी।
👷♂️ डिलीवरी एजेंट्स की सुरक्षा बनी सबसे बड़ा मुद्दा
डिलीवरी एजेंट्स लंबे समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि कम समय में ज्यादा ऑर्डर पूरे करने का दबाव उन पर मानसिक और शारीरिक असर डालता है।
कई बार बोनस और रेटिंग सिस्टम भी उन्हें तेज और जोखिम भरी ड्राइविंग के लिए मजबूर करता है।
सरकार का यह कदम ऐसे लाखों डिलीवरी वर्कर्स के लिए राहत की खबर माना जा रहा है, जो रोजाना सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं।
📉 क्या इससे कंपनियों के बिजनेस पर पड़ेगा असर?
हालांकि 10 मिनट डिलीवरी हटने से कंपनियों की ब्रांडिंग पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन जानकार मानते हैं कि लंबे समय में यह फैसला सेक्टर के लिए फायदेमंद होगा।
ग्राहक भी अब सिर्फ तेज डिलीवरी नहीं, बल्कि सेफ और भरोसेमंद सेवा को प्राथमिकता देने लगे हैं।
🔍 आगे क्या हो सकता है?
सरकार आने वाले समय में डिजिटल लेबर पॉलिसी और गिग वर्कर्स के लिए नए नियम ला सकती है।
क्विक कॉमर्स कंपनियों को अब अपने मॉडल को कानूनी, सुरक्षित और नैतिक ढांचे में ढालना होगा।
The central government of India has taken a major step by intervening in the 10 minute delivery model followed by quick commerce platforms. After safety concerns, Blinkit has decided to remove its 10-minute delivery feature, and Zomato and Swiggy are also expected to follow. The government decision on instant delivery ban aims to protect delivery partners and ensure road safety, bringing a major shift in the online food and grocery delivery industry.


















