AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा के एक मेधावी छात्र को कथित तौर पर अफीम तस्करी के झूठे केस में फंसा दिया गया। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब आरोपी छात्र ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को झूठा और मनगढ़ंत बताया। कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद पुलिस विभाग को भारी फटकार लगी और छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
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कैसे खुला पूरा मामला?
यह पूरा मामला एक साधारण छात्र से शुरू हुआ, जिसकी पहचान इलाके में उसकी पढ़ाई और अच्छे प्रदर्शन के लिए थी। 12वीं में टॉप करने वाला यह युवक अपने भविष्य को लेकर गंभीर था। परिवार ने भी कभी कल्पना नहीं की थी कि उस पर नशा तस्करी जैसे संगीन आरोप लगाए जाएंगे।
पुलिस के मुताबिक, युवक को अफीम तस्करी के आरोप में पकड़ा गया था। दावा किया गया कि उसके पास से नशीला पदार्थ बरामद हुआ है। लेकिन युवक और उसके परिवार का कहना था कि पुलिस ने पूरी कहानी गढ़ी है और उसे जानबूझकर फंसाया गया है।
हाई कोर्ट पहुंचा मामला
आरोपी युवक ने अपने वकील के साथ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि पुलिस ने किसी तरह की जब्ती प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा नहीं किया। न नशीले पदार्थ का वजन सही था, न पंचनामा ठीक से भरा गया, और न ही मामले से जुड़े किसी भी पहलू में पारदर्शिता दिखाई गई।
हाई कोर्ट ने जब इस मामले की सुनवाई शुरू की, तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। कोर्ट ने पुलिस से कठोर सवाल पूछे—
जब्ती का रिकॉर्ड अधूरा क्यों है?
मेडिकल और फॉरेंसिक प्रक्रिया में देरी क्यों हुई?
बिना उचित सबूत के छात्र को कैसे गिरफ्तार किया गया?
इन प्रश्नों का पुलिस के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
SP ने स्वीकार की गलती
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब जिले के एसपी ने खुद माना कि जांच में गंभीर गलतियां हुई हैं। उन्होंने कोर्ट के सामने माना कि पूरे मामले को जिस तरीके से संभाला गया, वह पुलिस मानकों के अनुरूप नहीं था। एसपी ने यह भी बताया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने नियमों का पालन नहीं किया, जिससे मामला संदिग्ध हो गया।
इस स्वीकारोक्ति ने यह साफ कर दिया कि छात्र के आरोप निराधार नहीं थे और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना बिल्कुल जायज़ है।
छह पुलिसकर्मी सस्पेंड
एसपी की रिपोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। अफीम तस्करी के इस मामले में भूमिका निभाने वाले कुल छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। इनमें शामिल हैं—
थाना प्रभारी
सब-इंस्पेक्टर
दो हेड कांस्टेबल
दो कांस्टेबल
विभागीय जांच भी गठित कर दी गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि यह लापरवाही थी या जानबूझकर किया गया कृत्य।
पीड़ित परिवार पर क्या बीती?
छात्र के परिवार ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद से वे सामाजिक अपमान, मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। लोगों ने घर आने से परहेज करना शुरू कर दिया था। रिश्तेदारों ने भी दूरी बना ली।
परिवार का कहना था कि उनका बेटा न तो कभी किसी गलत गतिविधि में शामिल रहा, न कोई पुराना रिकॉर्ड है। वह सिर्फ पढ़ाई में ध्यान देने वाला एक सामान्य बच्चा है, जिसे पुलिस ने गलत तरीके से फंसा दिया।
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा
“किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाना न सिर्फ कानून का दुरुपयोग है, बल्कि उसकी जिंदगी को बर्बाद करने जैसा है। पुलिस की जिम्मेदारी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है, न कि मनगढ़ंत कहानियां बनाकर किसी को अपराधी घोषित करना।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ जाते हैं, इसलिए दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
क्या आगे होगा?
सस्पेंड किए गए छह पुलिसकर्मियों पर अब विभागीय जांच चलेगी। अगर जांच में यह साबित हुआ कि उन्होंने जानबूझकर छात्र को फंसाया, तो उन पर आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
उधर हाई कोर्ट ने छात्र के खिलाफ दर्ज केस की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने का संकेत दिया है, ताकि जमीन पर वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
युवक की जिंदगी पर असर
एक मेधावी छात्र, जो आगे की पढ़ाई और करियर की तैयारी कर रहा था, उसे अचानक जेल की हवा खानी पड़ी और अदालतों में चक्कर लगाने पड़े। इस घटना ने उसके आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की योजनाओं पर गहरा असर डाला है।
उसके परिवार का कहना है कि अब वे बस यही चाहते हैं कि उनके बेटे का नाम पूरी तरह साफ हो जाए और उसे न्याय मिले।
यह मामला सिर्फ एक छात्र का नहीं है, बल्कि यह बताता है कि पुलिस की एक गलत कार्रवाई किसी की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है। हाई कोर्ट की दखल, एसपी की स्वीकारोक्ति और पुलिसकर्मियों का निलंबन यह साबित करता है कि न्याय अभी भी मौजूद है, लेकिन ऐसी घटनाएँ भविष्य में न हों, इसके लिए सिस्टम में सुधार की बड़ी जरूरत है।
The incident from Madhya Pradesh, where a top Class 12 student was allegedly framed in a fake opium smuggling case, has raised serious questions about police misconduct and wrongful drug trafficking charges. The High Court’s intervention, suspension of six police officers, and revelation of procedural lapses have made this a significant case highlighting abuse of power, false accusations, and the need for accountability within the law enforcement system.


















