AIN NEWS 1: बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और VIP) ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री चेहरे का ऐलान किया है। राजद नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है, जबकि विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा बनाया गया है।
लेकिन इस घोषणा के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने महागठबंधन पर तीखा हमला बोला है। AIMIM नेता शौकत अली ने सोशल मीडिया पर लिखा —
“2% वाला उप मुख्यमंत्री, 13% वाला मुख्यमंत्री, 18% वाला दरी बिछावन मंत्री! और अगर हमने कुछ कहा तो बोलेंगे — अब्दुल तू चुप बैठ, वरना बीजेपी आ जाएगी।”
यह टिप्पणी AIMIM की उस नाराज़गी को दिखाती है, जिसमें पार्टी यह कह रही है कि बिहार के मुस्लिम समुदाय, जिनकी जनसंख्या करीब 17.7% है, को सत्ता में कोई प्रमुख प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
AIMIM का सवाल – 18% मुस्लिमों को क्यों नज़रअंदाज़ किया गया?
AIMIM नेताओं का कहना है कि बिहार में मुसलमान वोटरों की भूमिका बहुत अहम है।
राज्य की 11 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम आबादी 40% से अधिक है।
वहीं 47 सीटें ऐसी हैं, जहाँ मुसलमान मतदाता चुनावी नतीजे तय कर सकते हैं।
इसके बावजूद, AIMIM का आरोप है कि महागठबंधन ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नाम पर मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। पार्टी का कहना है कि जब 2% वोट वाले समुदाय से उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, तो 18% आबादी वाले समुदाय को क्यों दरकिनार किया जा रहा है?
शौकत अली ने कहा कि जब मुसलमान अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो उन्हें डर दिखाया जाता है — “अगर तुम बोलोगे तो BJP आ जाएगी।”
महागठबंधन की घोषणा – तेजस्वी मुख्यमंत्री चेहरा, सहनी उप मुख्यमंत्री
बिहार की राजधानी पटना के होटल मौर्या में महागठबंधन के घटक दलों की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने आधिकारिक तौर पर तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।
गहलोत ने कहा,
“तेजस्वी एक युवा नेता हैं, जिनमें ईमानदारी और प्रतिबद्धता है। पिछली बार उन्होंने रोजगार के वादे किए थे और उसे पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उप मुख्यमंत्रियों की संख्या कितनी होगी।
कौन हैं मुकेश सहनी?
मुकेश सहनी को उनके समर्थक ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से जानते हैं। वे निषाद समुदाय से आते हैं, जो बिहार में अति पिछड़ा वर्ग में शामिल है। VIP पार्टी के प्रमुख के रूप में सहनी ने अपने समुदाय के हक की आवाज़ बुलंद की है और महागठबंधन ने उन्हें उप मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से महागठबंधन OBC और EBC वोटरों को आकर्षित करना चाहता है।
अशोक गहलोत का बयान – “देश की दिशा तय करनी होगी”
अशोक गहलोत ने कहा कि आज देश के हालात बेहद गंभीर हैं। लोग बेरोजगारी, किसानों की परेशानी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा,
“देश किस दिशा में जाएगा, यह हर नागरिक को तय करना होगा। बिहार का चुनाव केवल राज्य नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य को प्रभावित करेगा।”
गहलोत ने यह भी कहा कि लोकतंत्र आज खतरे में है। उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं, लेकिन तेजस्वी यादव ने तब भी शानदार प्रदर्शन किया। अब बिहार की जनता बदलाव चाहती है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी बिहार में चुनाव प्रचार के लिए आएंगे।
AIMIM की रणनीति और असर
AIMIM पिछले कुछ सालों से बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने सीमांचल क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है, जहाँ मुस्लिम वोटरों की बड़ी संख्या है।
पार्टी का मानना है कि जब तक मुस्लिम समुदाय को सीधा नेतृत्व नहीं दिया जाएगा, तब तक उनकी समस्याएँ सुलझ नहीं पाएंगी।
शौकत अली की टिप्पणी “अब्दुल तू चुप बैठ” अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। AIMIM समर्थक इसे राजनीतिक असमानता का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि विपक्षी पार्टियाँ इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश मान रही हैं।
राजनीतिक समीकरण और आगे की राह
महागठबंधन की यह रणनीति चुनावी दृष्टि से OBC और EBC समुदायों को जोड़ने की है, जबकि AIMIM मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकना चाहती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AIMIM मुस्लिम इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाने में सफल होती है, तो यह महागठबंधन के वोट बैंक को नुकसान पहुँचा सकती है।
अब देखना यह होगा कि महागठबंधन मुस्लिम वर्ग को मनाने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाता है और AIMIM अपनी नाराज़गी को किस तरह राजनीतिक रूप देता है।
बिहार की राजनीति हमेशा से जातीय और धार्मिक समीकरणों पर आधारित रही है। AIMIM की यह नाराज़गी इस बात की ओर इशारा करती है कि मुस्लिम समुदाय प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि वास्तविक भागीदारी चाहता है।
अब आने वाले चुनाव तय करेंगे कि बिहार की जनता बदलाव के नाम पर किसे सत्ता सौंपती है — तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन या AIMIM जैसे नए उभरते विकल्पों को।
The AIMIM has strongly criticized the Bihar Mahagathbandhan for declaring Tejashwi Yadav as the Chief Minister face and Mukesh Sahni as the Deputy CM face ahead of the Bihar elections. AIMIM leader Shaukat Ali questioned why the 18% Muslim population in Bihar has been ignored in leadership roles, calling it political hypocrisy. The controversy highlights the growing tension within opposition ranks and the crucial role Muslim voters will play in shaping the 2025 Bihar elections.



















