AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के महू (Mhow) में एक बार फिर अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की पारिवारिक संपत्ति विवादों में आ गई है। महू कैंटोनमेंट बोर्ड (Mhow Cantonment Board) ने उनके पैतृक घर पर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए तीन दिन के भीतर उसे खुद हटाने का नोटिस जारी किया है। अगर यह आदेश माना नहीं गया, तो बोर्ड खुद भवन को ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है और इसके खर्चे भी संबंधित पक्ष से वसूलने की धमकी दी है।

पृष्ठभूमि और नोटिस की वजह
यह मकान महू के मुकेरी मोहल्ला में है, सर्वे नंबर 245/1245, मकान संख्या 1371 के नाम पर।
बोर्ड का तर्क है कि वहां अनधिकृत एक्सटेंशन कई वर्षों से किए गए हैं — चार मंज़िला बनावट, बेसमेंट (तलघर) जैसे हिस्से बिना अनुमति बनाए गए हैं।
कैंटोनमेंट बोर्ड का कहना है कि पहले भी 1996 और 1997 में नोटिस किए जा चुके हैं। उन समयों में उन्होंने कैंटोनमेंट एक्ट, 1924 की धाराओं के तहत अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया था, लेकिन कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ।
नोटिस का आदेश
हाल के नोटिस में, बोर्ड ने वर्तमान कानूनी वारिसों और कब्जेदारों को तीन दिनों के अंदर अवैध संरचनाओं को हटाने का निर्देश दिया है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि वे स्वयं अनधिकृत हिस्सों को नहीं हटाते हैं, तो बोर्ड खुद कंस्ट्रक्शन गिरा सकता है।
और सबसे अहम — “तोड़ने का खर्चा भी वसूला जाएगा” — यानी लागत को संबंधित परिवार से वसूल करने का रास्ता खुला रखा गया है।
बोर्ड की टिप्पणियाँ
महू कैंट बोर्ड के इंजीनियर एच.एस. कलोया ने कहा है कि यह मकान मौलाना हम्माद सिद्दीकी (जवाद के पिता) के नाम पर है।
कलोया ने यह भी बताया कि जांच में मकान में बड़ी खिड़कियाँ पाई गई हैं — कुल मिलाकर 20 से अधिक — जो कैंटोनमेंट नियमों का उल्लंघन करती हैं।
साथ ही, उन्होंने अवैध बेसमेंट की भी पुष्टि की, जिसे मंजूरी के बिना बनाया गया था।
सन्दर्भ और जांच का परिप्रेक्ष्य
यह कदम ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में हुए एक ब्लास्ट मामला के बाद यूनिवर्सिटी और उसके प्रमुखों पर जांच तेज हो गई है।
बताया जाता है कि डॉ. उमर उन नबी, जो इस ब्लास्ट से जुड़े हैं, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे।
इसके अलावा, चेयरमैन जवाद सिद्दीकी के भाई हमूद अहमद सिद्दीकी को भी आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों में हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया है।
यूनिवर्सिटी की फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन, एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल और संसाधनों की वैधता को लेकर भी एजेंसियां गहराई से जांच कर रही हैं।
संभावित प्रभाव और चुनौतियाँ
1. कानूनी झटका: यह नोटिस न सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि चेयरमैन और यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा पर बड़ा असर डाल सकता है।
2. वित्तीय दबाव: अगर बोर्ड को खुद तोड़ने के लिए जाना पड़ा, तो खर्चे वसूलने की नीति उनके लिए अतिरिक्त बोझ बना सकती है।
3. इंस्पेक्शन लूप: ऐसे में यह संभावना बढ़ जाती है कि प्रशासन अन्य भी निर्माणों की समीक्षा करे — खासकर उन हिस्सों की जो लंबे समय से विवादों में रहे हैं।
4. जांच का दायरा: दिल्ली ब्लास्ट के संदर्भ में यूनिवर्सिटी के संस्थागत रिकॉर्ड की जांच पहले ही चल रही है; यह कदम उसमें और ऊंची तीव्रता ला सकता है।
The Mhow Cantonment Board has served a demolition notice to Al-Falah University chairman Jawad Ahmed Siddiqui, demanding removal of unauthorized structures — including a basement and four extra floors — from his ancestral property within three days. If the occupants fail to comply, the Board warns it will itself raze the illegal construction and recover the demolition cost from the family. This action comes amid heightened scrutiny after a Delhi blast case, tying the university to broader legal and regulatory probes.


















