AIN NEWS 1 | भारत सरकार की 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक 3 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए जिनका सीधा असर आम जनता, मध्यम वर्ग, कारोबारियों और उद्योग जगत पर पड़ेगा।
मुख्य निर्णय
बैठक में सबसे बड़ी घोषणा जीएसटी दरों में बदलाव की रही। खाद्य पदार्थों, दवाइयों, शिक्षा और दैनिक जरूरत की चीजों पर जीएसटी कम कर दिया गया। वहीं, तंबाकू, गुटखा और पान मसाला जैसे स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले उत्पादों पर जीएसटी बढ़ा दिया गया।
1. रोजमर्रा की चीजों पर राहत
दूध, पनीर, मक्खन, घी और चीज जैसे डेयरी उत्पाद अब कम जीएसटी दर पर उपलब्ध होंगे।
सूखे मेवे, खजूर, अंजीर और अन्य फल पर भी कर घटा दिया गया।
बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी नोटबुक और स्टेशनरी पर जीएसटी शून्य कर दिया गया।
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी व्यक्तिगत देखभाल की चीजें अब सस्ती होंगी।
2. स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ी राहत
कई जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया या दरें घटा दी गईं।
मेडिकल ऑक्सीजन, थर्मामीटर, एक्स-रे मशीन जैसे उपकरण अब कम कर दर पर उपलब्ध होंगे।
3. महंगे और लक्जरी उत्पादों पर सख्ती
गुटखा, पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी और सेस बढ़ा दिया गया।
लक्जरी कार, यॉट, प्राइवेट एयरक्राफ्ट, हाई-एंड मोटरसाइकिल जैसी वस्तुओं पर जीएसटी की दर 40% तक कर दी गई।
एल्कोहल-फ्री फ्लेवर्ड ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स पर भी टैक्स बढ़ाया गया।
4. व्यापार और उद्योग के लिए सुधार
काउंसिल ने व्यापारियों को तेजी से रिफंड दिलाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से प्रभावित व्यापारियों को सिस्टम आधारित 90% तक रिफंड तुरंत मिलेगा।
जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) सितंबर 2025 से अपील स्वीकार करना शुरू करेगा और दिसंबर तक सुनवाई भी शुरू हो जाएगी।
5. लागू होने की तारीख
ज्यादातर नए टैक्स रेट 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे।
तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों पर पुराने रेट तब तक लागू रहेंगे जब तक काउंसिल सेस की बकाया देनदारियां पूरी तरह न चुका दे।
इसका असर
यह बैठक आम लोगों के लिए राहत लेकर आई है क्योंकि खाने-पीने और स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें अब सस्ती होंगी। दूसरी ओर, जो चीजें समाज और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, उन पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने सख्त रुख दिखाया है।
व्यापार जगत के लिए यह सुधार कारोबार को आसान बनाएंगे और टैक्स सिस्टम पर भरोसा बढ़ाएंगे।



















