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थाना-चौकी छोड़कर संगठन को मजबूत करें जिलाध्यक्ष : भूपेंद्र चौधरी?

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AIN NEWS 1: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने हाल ही में संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक में जिलाध्यक्षों को सख्त और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्षों का काम संगठन को मजबूत करना है, न कि थाने-चौकी या प्रशासनिक हस्तक्षेप में समय बर्बाद करना।

उनका यह बयान पार्टी संगठन की कार्यशैली और भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।

भाजपा की कैडर आधारित राजनीति की जड़ें

भाजपा हमेशा से ही खुद को “कैडर आधारित पार्टी” कहती रही है। इसका मतलब है कि यहां फैसले केवल नेताओं पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक ढांचे पर आधारित होते हैं।

बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पार्टी की संरचना मजबूत की गई है।

भाजपा की चुनावी सफलता का सबसे बड़ा राज यही संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ताओं की भागीदारी है।

भूपेंद्र चौधरी का यह बयान इसी कैडर-आधारित राजनीति की ओर जिलाध्यक्षों का ध्यान खींचता है।

भूपेंद्र चौधरी का साफ संदेश

बैठक में उन्होंने जिलाध्यक्षों से कहा –

“सरकारी व्यवस्था से जुड़े कार्य सांसद और विधायकों के लिए हैं। जिलाध्यक्षों को केवल संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।”

यह बयान न केवल संगठनात्मक दिशा को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी अब चाहती है कि जमीनी स्तर पर नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर सीधे संवाद स्थापित करें।

क्यों आया यह बयान?

पार्टी सूत्रों के अनुसार हाल ही में यह देखा गया कि कई जिलों के अध्यक्ष और पदाधिकारी जनता के कामकाज को लेकर थाने-चौकी या प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क में ज्यादा समय बिता रहे थे।

इससे संगठन के काम पीछे छूट रहे थे।

कार्यकर्ताओं और जनता के बीच संवाद कमजोर हो रहा था।

विपक्ष को यह कहने का मौका मिल रहा था कि भाजपा के संगठन के लोग भी “सत्ता-सुख” में व्यस्त हैं।

भूपेंद्र चौधरी ने इसी स्थिति को सुधारने के लिए यह सख्त निर्देश जारी किया।

संगठन को मजबूत करने की दिशा

उन्होंने जिलाध्यक्षों को कई बिंदुओं पर काम करने के निर्देश दिए:

1. बूथ समितियों को सक्रिय करें – हर बूथ पर कार्यकर्ताओं का सक्रिय नेटवर्क बने।

2. जनता से सीधे जुड़ें – जिलाध्यक्ष को गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं से संवाद करना होगा।

3. युवा और महिलाएं जोड़ें – नए वर्गों को पार्टी से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएं।

4. नियमित बैठकें और प्रशिक्षण शिविर – संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।

5. सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग – डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पार्टी की मौजूदगी मजबूत की जाए।

कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

भूपेंद्र चौधरी के इस बयान पर कार्यकर्ताओं ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी।

कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह सही दिशा में कदम है। “यदि जिलाध्यक्ष संगठनात्मक कामों में पूरी तरह से लगेंगे, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल और जनता से जुड़ाव दोनों बढ़ेंगे।”

वहीं कुछ जिलों के पदाधिकारी मानते हैं कि जनता अक्सर उनके पास थाने-चौकी या प्रशासनिक मदद के लिए आती है, ऐसे में उन्हें पूरी तरह से किनारा करना मुश्किल है।

हालांकि बहुमत यही मानता है कि यदि सांसद और विधायक प्रशासनिक काम संभालें और जिलाध्यक्ष संगठनात्मक जिम्मेदारी, तो पार्टी का ढांचा और मजबूत होगा।

चुनावी रणनीति से जुड़ा कदम

भाजपा उत्तर प्रदेश में लगातार चुनावी मोड में रहती है। पंचायत चुनावों से लेकर लोकसभा चुनाव तक संगठन की भूमिका सबसे अहम होती है।

पार्टी का मानना है कि संगठन की पकड़ बूथ स्तर पर मजबूत होगी तो कोई भी चुनाव जीतना आसान हो जाएगा।

विपक्ष लगातार भाजपा पर यह आरोप लगाता रहा है कि वह केवल सत्ता की राजनीति करती है।

चौधरी का यह बयान संगठन को यह संदेश देता है कि भाजपा केवल सत्ता तक सीमित नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के दम पर खड़ी पार्टी है।

विपक्ष पर तंज

भूपेंद्र चौधरी ने विपक्ष पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल केवल सत्ता के लिए काम करते हैं, उनके पास संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने का धैर्य और दृष्टि नहीं है।

उन्होंने कहा –

“भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत और संगठनात्मक ताकत से चुनाव जीतती है। जबकि विपक्ष केवल नेता-केन्द्रित राजनीति करता है।”

जनता के लिए क्या मायने?

जनता के नजरिए से यह बयान काफी अहम है।

अब जिलाध्यक्षों का ध्यान केवल संगठन और जनता से जुड़ाव पर होगा।

सांसद और विधायक प्रशासनिक कामों की जिम्मेदारी निभाएंगे।

इससे जनता को स्पष्ट पता रहेगा कि किस काम के लिए कहां जाना है।

जिलाध्यक्षों के लिए 5 स्पष्ट संदेश

1. थाने-चौकी और सरकारी कामों में हस्तक्षेप बंद करें।

2. जनता और कार्यकर्ताओं के बीच ज्यादा समय बिताएं।

3. बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और मजबूत करें।

4. अनुशासन और जवाबदेही का पालन करें।

5. संगठनात्मक काम को प्राथमिकता दें, व्यक्तिगत लाभ को नहीं।

भूपेंद्र चौधरी का यह बयान केवल नसीहत नहीं बल्कि भाजपा संगठन के लिए एक नई दिशा भी है। इससे पार्टी का संगठनात्मक ढांचा और अनुशासन मजबूत होगा।

यदि जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी इस दिशा में काम करते हैं तो भाजपा की पकड़ जनता के बीच और मजबूत होगी। यह कदम आने वाले चुनावों में भाजपा को बड़ा फायदा दिला सकता है।

BJP Uttar Pradesh President Bhupendra Chaudhary has firmly directed all district heads to stop interfering in police stations and administrative work, emphasizing that their core responsibility is to strengthen the party organization. He highlighted that MPs and MLAs should handle administrative responsibilities, while district heads must build connections with people at the grassroots level, activate booth committees, engage youth and women, and ensure organizational discipline. This directive is seen as a crucial part of BJP’s election strategy and cadre-based structure in Uttar Pradesh.

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