AIN NEWS 1: राजस्थान के झालावाड़ जिले से पुलिस ने एक ऐसा मामला उजागर किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया। यहां एक पति-पत्नी ने अपने घर को ही नकली नोट छापने का अड्डा बना लिया। लैपटॉप, कलर प्रिंटर, कटर और विशेष स्याही की मदद से यह जोड़ी असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तैयार कर रही थी। पुलिस की छापेमारी में 12 लाख 20 हजार रुपये की फेक करेंसी बरामद की गई है।
कैसे हुआ खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब चंडीगढ़ पुलिस स्टेशन को सूचना मिली कि कुछ लोग असली करेंसी के बदले नकली नोट बेचने की कोशिश कर रहे हैं। जानकारी मिलते ही चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच ने छापेमारी की और जांच शुरू की।
सबसे पहले आरोपी गौरव से 500 रुपये के 1,646 नकली नोट बरामद किए गए। इनकी कुल कीमत लगभग 8 लाख 23 हजार रुपये थी। इसके बाद दूसरे आरोपी विक्रम से भी 500 रुपये के 392 नकली नोट मिले, जिनकी कीमत करीब 1 लाख 96 हजार रुपये निकली।
कोरियर से भेजे जाते थे नकली नोट
जांच में पता चला कि यह नकली नोट राजस्थान के झालावाड़ भेजे जाते थे। आरोपी गिरोह कोरियर के माध्यम से फेक करेंसी की सप्लाई करता था। दिलचस्प बात यह थी कि वे कंसाइनमेंट बुक करते समय फर्जी नाम, पता और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते थे। इससे पुलिस को उन्हें पकड़ना आसान नहीं होता था।
महिला आरोपी तक पहुंचने में लगी मशक्कत
पुलिस ने इस गिरोह के सरगना तक पहुंचने के लिए विशेष टीम का गठन किया। लगातार डेटा खंगाला गया, कोरियर ट्रैकिंग की गई और CCTV फुटेज की निगरानी की गई।
आखिरकार पता चला कि एक महिला आरोपी अपने पति के साथ पिछले 4-5 महीने से झालरापाटन के चंद्रावती ग्रोथ सेंटर में किराए के मकान में रह रही थी। महिला की पहचान करना आसान नहीं था क्योंकि वह कई बार नाम और पते बदलती थी। लेकिन 100 से ज्यादा CCTV कैमरों और ट्रैकिंग की मदद से पुलिस ने आखिर उसे ढूंढ निकाला।
घर से मिला नकली नोटों का जखीरा
चंडीगढ़ क्राइम टीम और झालावाड़ पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मकान पर छापा मारा। तलाशी के दौरान 12 लाख 20 हजार रुपये की नकली करेंसी बरामद की गई। इसके साथ ही पुलिस ने एक लैपटॉप, कलर प्रिंटर, कटर, स्याही और बड़ी संख्या में स्क्रीन फ्रेम इमेजर भी जब्त किए।
गिरफ्तार हुए पति-पत्नी
रेड के दौरान पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया – रजनी शा और जितेन्द्र शर्मा। दोनों अब पुलिस हिरासत में हैं और चंडीगढ़ क्राइम टीम उन्हें अपने साथ ले गई है।
जांच में सामने आया कि यह पति-पत्नी बेहद संगठित तरीके से नकली नोट छापते और उन्हें बाजार में पहुंचाते थे। उनके द्वारा बनाए गए नोट इतने असली जैसे लगते थे कि आम आदमी आसानी से धोखा खा सकता था।
पुलिस की चुनौतियां और सफलता
झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि आरोपियों को पकड़ना आसान नहीं था। टीम ने लगातार घंटों मेहनत की, कोरियर बुकिंग की जांच की, CCTV फुटेज खंगाले और गुप्त सूचनाओं पर काम किया। इन्हीं प्रयासों से महिला आरोपी की पहचान हुई और गिरोह तक पहुंचना संभव हो पाया।
आगे की जांच
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने कितने और मामलों में नकली करेंसी छापकर बाजार में सप्लाई की है। संभावना जताई जा रही है कि इनके तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं।
समाज पर असर
नकली नोट का कारोबार न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है बल्कि आम जनता के विश्वास को भी तोड़ देता है। कोई भी व्यक्ति जो इन नोटों को अनजाने में ले लेता है, वह नुकसान झेलता है और कई बार कानूनी परेशानियों में भी फंस सकता है। यही कारण है कि ऐसे अपराधों पर कड़ी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
झालावाड़ से सामने आई यह घटना इस बात का सबूत है कि आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल करके अपराधी किस हद तक जा सकते हैं। एक साधारण घर के अंदर छिपा हुआ नकली नोटों का यह कारखाना दिखाता है कि अपराधी किस तरह चालाकी से कानून को चकमा देने की कोशिश करते हैं। लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी निगरानी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी संगठित क्यों न हो, अंततः कानून के हाथों से बच नहीं सकता।
In a major crackdown, Rajasthan police busted a fake currency racket in Jhalawar where a couple was caught printing counterfeit notes worth over ₹12 lakh using a laptop, color printer, and cutters. The fake notes were distributed via courier to different markets, making it a well-planned operation. This counterfeit currency case in India highlights the rising misuse of technology in financial crimes and the crucial role of police surveillance and investigation in tracking down such organized rackets.



















