AIN NEWS 1: बरेली शहर इन दिनों तनावपूर्ण हालातों का सामना कर रहा है। बीते दिनों हुए बवाल के बाद प्रशासन और समाज के जिम्मेदार लोगों की निगाहें शुक्रवार की जुमे की नमाज पर टिकी हुई हैं। इसी कड़ी में खानकाहों, दरगाहों और उलेमाओं ने लोगों से खास अपील की है कि नमाज पूरी शांति और सुकून के साथ अदा की जाए और नमाज के बाद सभी लोग सीधे अपने घर लौटें।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की तैयारी
बरेली जिले में कुल 1360 मस्जिदें हैं। इनमें से 765 मस्जिदें विशेष समुदाय की बहुलता वाले इलाकों में स्थित हैं, जबकि 595 मस्जिदें मिश्रित आबादी वाले इलाकों में हैं। प्रशासन ने इन सभी मस्जिदों पर विशेष निगरानी का इंतजाम किया है। खासकर संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
इमामों को यह स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे अपनी तकरीरों (खुतबा) में किसी भी तरह का विवादित बयान न दें और बरेली बवाल से जुड़े मुद्दों का जिक्र कतई न करें। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि किसी भी अफवाह या उकसाने वाली बात को फैलने से रोकने के लिए सोशल मीडिया पर भी सख्त नजर रखी जा रही है।
उलेमाओं और धार्मिक संगठनों की अपील
जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां ने जनता से साफ शब्दों में कहा कि वे नमाज के बाद बेवजह बाहर न रुकें और सीधे घर लौट जाएं। उन्होंने कहा कि “शहर हमारा है और इसकी फिजा को महफूज़ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। किसी भी तरह की अफवाह या नफरत फैलाने वाली बात को दरकिनार करना ही समझदारी है।”
इसी तरह, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भी संयम की अपील करते हुए कहा कि “सच्चा मुसलमान वही है जो पैगंबर-ए-इस्लाम की तालीम पर अमल करे। पैगंबर साहब ने कभी टकराव या नफरत का रास्ता नहीं चुना बल्कि हमेशा बातचीत और समझौते से मसले हल किए।” उन्होंने कहा कि “नमाज अदा करने के बाद घर लौटना ही इस्लाम की असली तालीम और जिम्मेदार मुसलमान का किरदार है।”
पैगंबर से मोहब्बत का असली तरीका
मौलाना शहाबुद्दीन ने यह भी कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम से सच्ची मोहब्बत केवल नारों, पोस्टरों या बैनरों से जाहिर नहीं होती। असली मोहब्बत उनकी तालीम पर अमल करने और समाज में अमन-शांति कायम करने से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को इस्लाम की उस शिक्षा को अपनाना चाहिए जो मेलजोल, भाईचारे और इंसाफ पर आधारित है।
समाज में सकारात्मक प्रतिक्रिया
इन अपीलों को न सिर्फ मुस्लिम समाज बल्कि शहर के अन्य वर्गों ने भी सराहा है। लोगों का मानना है कि ऐसी अपीलों से समाज में शांति और आपसी भाईचारे का संदेश जाता है। कई स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मौजूदा हालात में उलेमाओं और धार्मिक संगठनों की यह पहल बेहद अहम है, क्योंकि इससे तनाव कम होगा और लोग अफवाहों से दूर रहेंगे।
प्रशासन की सतर्कता
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। मस्जिदों के आसपास पैरा मिलिट्री फोर्स और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से नजर रखी जा रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक खबर पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
नतीजा
बरेली जैसे बड़े और धार्मिक रूप से संवेदनशील शहर में अमन-चैन कायम रखना बेहद जरूरी है। खानकाहों और उलेमाओं की अपील से साफ संदेश है कि समाज का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और शांति कायम रखने में सहयोग करे। जुमे की नमाज इबादत का दिन है, इसे विवाद या तनाव का कारण नहीं बनाना चाहिए।
आज जब अफवाहें और भड़काऊ बातें बहुत तेजी से फैलती हैं, ऐसे में उलेमाओं की यह अपील बेहद मायने रखती है। अगर लोग संयम बरतेंगे और शांति से घर लौटेंगे, तो न सिर्फ शहर में अमन कायम रहेगा बल्कि समाज में आपसी भरोसा और भाईचारा भी मजबूत होगा।
Bareilly news today highlights a crucial appeal from Ulema and Khanqahs before Friday Namaz. With 1360 mosques in Bareilly under strict security, religious leaders urged people to pray peacefully and return home directly after Jumma Namaz. The Ulema emphasized avoiding rumors, maintaining communal harmony, and following the teachings of Islam that promote peace, unity, and brotherhood.


















