AIN NEWS 1: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष की तैयारी को लेकर एक विशाल सामाजिक अभियान की शुरुआत करने जा रहा है। संघ ने घोषणा की है कि देशभर में “गृह संपर्क अभियान” चलाया जाएगा और इसके साथ ही एक लाख से अधिक हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इस अभियान का उद्देश्य समाज में आपसी जुड़ाव बढ़ाना, सनातन संस्कृति के मूल्यों को सशक्त करना और युवाओं को राष्ट्रनिर्माण की दिशा में प्रेरित करना है।
यह निर्णय संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में लिया गया, जो मध्य प्रदेश के जबलपुर में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित की जा रही है। इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के शीर्ष पदाधिकारी—सरसंघचालक, सरकार्यवाह, सहकार्यवाह और देशभर से आए लगभग 407 वरिष्ठ कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं।
शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर मंथन
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह बैठक संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजनों की रूपरेखा तय करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बैठक में अब तक हुए आयोजनों की समीक्षा के साथ ही आने वाले वर्षों के कार्यक्रमों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण के रूप में मनाना चाहता है। इस दौरान हर प्रांत, बस्ती और मंडल स्तर पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समाज के हर वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
‘गृह संपर्क अभियान’ का उद्देश्य
सुनील आंबेकर के अनुसार, संघ का “गृह संपर्क अभियान” पूरे देश में एक व्यापक सामाजिक संवाद का माध्यम बनेगा। यह अभियान 25 से 40 दिनों तक चलेगा, जिसके दौरान संघ के स्वयंसेवक घर-घर जाकर परिवारों से संपर्क करेंगे।
इस अभियान का मकसद समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनाना और उन्हें राष्ट्र एवं संस्कृति से जोड़ना है। इस दौरान विशेष रूप से शिक्षित वर्ग, युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग संघ के कार्यों और विचारधारा से परिचित कराए जाएंगे।
विशेष साहित्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
गृह संपर्क अभियान के दौरान संघ विशेष साहित्य तैयार कर रहा है, जिसमें भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता से जुड़े विषय होंगे। इसके साथ ही कुछ ऐतिहासिक अवसरों को भी विशेष रूप से मनाने की योजना है।
गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष पर विशेष साहित्य प्रकाशित किया जाएगा और देशभर में कार्यक्रम होंगे।
भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती (15 नवंबर) के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाएंगे, जिनमें आदिवासी समाज की भूमिका और उनके बलिदान को प्रमुखता दी जाएगी।
इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में समानता, एकता और गर्व की भावना को जाग्रत करना है।
युवाओं को संघ से जोड़ने पर फोकस
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि आने वाले वर्षों में युवाओं को संघ के साथ जोड़ना प्रमुख लक्ष्य रहेगा। संघ मानता है कि भारत के भविष्य को सशक्त बनाने के लिए युवाओं की भागीदारी सबसे आवश्यक है।
सुनील आंबेकर ने कहा, “हम चाहते हैं कि देश के युवा अपने समाज, संस्कृति और कर्तव्यों को समझें। मातृभूमि को मां मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू है, और यही विचार हमारा आधार है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि “हिंदू” शब्द की व्याख्या केवल संघ ने नहीं की, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की परंपरा का हिस्सा है। जो व्यक्ति मातृभूमि, संस्कृति और सनातन धर्म का सम्मान करता है, वह स्वभावतः हिंदू है।
‘पंच परिवर्तन’ का सामाजिक संदेश
संघ इस अभियान के माध्यम से समाज में “पंच परिवर्तन” का संदेश भी फैलाएगा। यह पांच बिंदु समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में संघ की पहल हैं।
1. कुटुंब प्रबोधन: परिवार के सदस्यों में संवाद और एकता को बढ़ावा देना।
2. सामाजिक समरसता: जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर समानता की भावना को मजबूत करना।
3. पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली: प्रकृति के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में जनजागरूकता फैलाना।
4. अभिव्यक्ति का विषय: भारतीय दृष्टिकोण से समाज और राष्ट्र से जुड़ी अभिव्यक्तियों को प्रोत्साहित करना।
5. नागरिक कर्तव्य बोध: हर नागरिक को अपने दायित्वों और अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
इन पांचों बिंदुओं को केंद्र में रखकर देशभर में संवाद, बैठकें और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
प्रमुख सम्मेलन और सरसंघचालक का संवाद
बैठक में यह भी तय किया गया कि सरसंघचालक मोहन भागवत देश के विभिन्न हिस्सों में विशेष संवाद कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
8-9 नवंबर को बेंगलुरु में उनका विशेष संवाद होगा।
21 दिसंबर को कोलकाता में दूसरा प्रमुख आयोजन निर्धारित है।
7-8 फरवरी को मुंबई में भी एक बड़ा संवाद कार्यक्रम होगा।
इसके अलावा कई अन्य प्रांतों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन संवादों का उद्देश्य संघ के विचारों को व्यापक रूप से समाज तक पहुंचाना और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाना है।
समाज के हर वर्ग से संपर्क
RSS का यह अभियान केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता की दिशा में एक प्रयास है। संघ का मानना है कि भारत की आत्मा उसकी विविधता में है, और इसी विविधता को जोड़ने के लिए यह “गृह संपर्क अभियान” शुरू किया जा रहा है।
संघ के स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों से संवाद करेंगे, उन्हें संगठन की गतिविधियों से परिचित कराएंगे और समाज के उत्थान में योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे।
बैठक में शामिल प्रमुख विषय
तीन दिवसीय कार्यकारी मंडल बैठक में निम्नलिखित विषयों पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है—
शताब्दी वर्ष में अब तक हुए कार्यक्रमों की समीक्षा और आने वाले आयोजनों की योजना।
गृह संपर्क अभियान की रूपरेखा और क्रियान्वयन की रणनीति।
हिंदू सम्मेलन के लिए जिलों और प्रांतों में कार्य विभाजन।
युवाओं को जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की भूमिका।
समाज में पर्यावरण और समरसता को लेकर जनजागरण अभियान।
‘संघ’ की सोच: समरस भारत का निर्माण
RSS का यह अभियान केवल धार्मिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। संघ का कहना है कि यह एक सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन है, जिसका लक्ष्य “समरस भारत” का निर्माण है — एक ऐसा भारत, जहां हर नागरिक समान भाव से जुड़ा हो और अपनी मातृभूमि पर गर्व करे।
सुनील आंबेकर ने कहा, “हमारा लक्ष्य समाज में जागृति लाना है। जब हर परिवार समाज और राष्ट्र के हित में सोचेगा, तभी भारत आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह गृह संपर्क अभियान और हिंदू सम्मेलन श्रृंखला आने वाले वर्षों में देश के सामाजिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर संघ ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल संगठन का विस्तार नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और एकता की भावना को प्रबल करना है।
यह अभियान आने वाले महीनों में हर राज्य, हर जिले और हर गांव तक पहुंचेगा — जहां स्वयंसेवक संवाद, विचार-विमर्श और राष्ट्रनिर्माण की भावना को आगे बढ़ाएंगे।
The Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) has announced a nationwide “Ghar Sampark Abhiyan” along with over one lakh Hindu conferences as part of its centenary celebrations. The campaign will focus on social harmony, cultural values, and youth engagement. The three-day executive meeting in Jabalpur discussed plans for outreach, community building, and nationwide events involving Sangh Swayamsevaks. Through this massive movement, the RSS aims to strengthen Hindu unity, promote environmental awareness, and encourage a sense of civic duty among citizens.






