दिल्ली से वृंदावन तक सनातन एकता पदयात्रा: बागेश्वर धाम सरकार की पहल से हिंदू एकता का संदेश!

0
56

AIN NEWS 1 नई दिल्ली, 6 नवंबर 2025 — कल यानी 7 नवंबर से बागेश्वर धाम सरकार की ओर से शुरू हो रही “सनातन एकता पदयात्रा” की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। यह यात्रा दिल्ली के छतरपुर स्थित आध्या कात्यायनी मंदिर से आरंभ होकर वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर तक जाएगी। यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश देना है।

यात्रा का उद्देश्य: सनातन में एकता का संकल्प

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस यात्रा का आह्वान करते हुए कहा है कि यह केवल एक धार्मिक पदयात्रा नहीं, बल्कि एक “आध्यात्मिक जागरण” है।

उनके अनुसार, “आज के समय में हिंदू समाज को जोड़ना और सनातन धर्म के प्रति गर्व जगाना आवश्यक है। यह यात्रा उसी एकता की भावना को जगाने के लिए निकाली जा रही है।”

इस यात्रा का मुख्य संदेश है — “जहां सनातन है, वहीं शक्ति है। जहां एकता है, वहीं विजय है।”

यात्रा की रूपरेखा और मार्ग

पदयात्रा 7 नवंबर की सुबह 11 बजे दिल्ली के छतरपुर स्थित आध्या कात्यायनी मंदिर से प्रारंभ होगी। यात्रा का समापन 16 नवंबर को वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में होगा। लगभग 170 किलोमीटर की यह पदयात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मार्गों से गुज़रेगी।

संभावित रूट

छतरपुर (दिल्ली) → महरौली → बडारपुर → फरीदाबाद → बल्लभगढ़ → पलवल → कोसीकलां → मथुरा → वृंदावन

यह मार्ग धार्मिक रूप से भी अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि ब्रजभूमि के दर्शन के साथ यह यात्रा भक्ति और एकता का संगम बनती है।

यात्रा के दौरान क्या-क्या होगा

पदयात्रा के दौरान हर पड़ाव पर भजन-कीर्तन, हवन, संकीर्तन और आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन होगा। श्रद्धालु सुबह से शाम तक भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के नाम की कीर्तन यात्रा निकालेंगे।

रात के समय सामूहिक विश्राम और भंडारे की व्यवस्था की गई है। आयोजकों का कहना है कि इस यात्रा में शामिल हर व्यक्ति को धर्म, संस्कृति और मानवता की गहरी अनुभूति होगी।

श्रद्धालुओं के लिए निर्देश

1. आरामदायक जूते और हल्के कपड़े पहनें।

2. पानी की बोतल, टॉर्च और छोटा फर्स्ट-एड किट साथ रखें।

3. भक्ति भाव से चलें, धाम के नियमों का पालन करें।

4. किसी भी प्रकार का राजनीतिक या भड़काऊ नारा न लगाएं।

5. आयोजकों द्वारा बताए गए मार्ग और समय का पालन करें।

दिल्ली पुलिस ने भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। छतरपुर और महरौली क्षेत्र में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा।

यात्रा में भाग लेने का तरीका

अगर कोई व्यक्ति यात्रा में शामिल होना चाहता है, तो उसे धाम की आधिकारिक वेबसाइट bageshwardham.com या bageshwardham.co.in पर जाकर पंजीकरण करना होगा।

यात्रा में शामिल हर समूह को एक “सनातन झंडा” और पहचान पट्टी दी जाएगी, ताकि भीड़ में सुरक्षा और संगठन दोनों सुनिश्चित रह सकें।

सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव

बागेश्वर धाम की यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में धर्म और एकता का संतुलन स्थापित करने का प्रयास भी है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार, “आज सनातन धर्म पर जो प्रश्न उठाए जा रहे हैं, उनका उत्तर प्रेम, शांति और एकता से देना होगा। यह पदयात्रा उसी उत्तर का प्रतीक है।”

यात्रा से पहले देशभर के कई शहरों में “पीले अक्षत” और आमंत्रण पत्रों का वितरण किया गया था, जिसमें सभी सनातनियों को इस यात्रा में शामिल होने का अनुरोध किया गया।

यात्रा का समापन: वृंदावन में भव्य भक्ति कार्यक्रम

16 नवंबर को वृंदावन पहुंचने पर भक्तों का स्वागत पुष्पवृष्टि और भजन-संध्या से किया जाएगा। श्री बांके बिहारी मंदिर परिसर में “सनातन एकता महासभा” का आयोजन होगा, जिसमें देशभर से संत, धर्माचार्य और हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे।

यह समापन दिवस धार्मिक एकता, सामाजिक सद्भावना और सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना का प्रतीक माना जा रहा है।

“सनातन एकता पदयात्रा” केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि यह धर्म, संस्कृति और एकता की सजीव प्रतिमूर्ति है।

यह यात्रा भारत के हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो मानता है कि आस्था से बड़ा कोई धर्म नहीं और एकता से बड़ी कोई शक्ति नहीं।

The Bageshwar Dham Sanatan Ekta Padayatra 2025 is a spiritual movement led by Dhirendra Krishna Shastri, beginning from Chhatarpur Temple in Delhi and ending at Banke Bihari Temple in Vrindavan. The 170 km journey promotes Hindu unity, Sanatan Dharma awareness, and cultural harmony. Pilgrims will walk through Faridabad, Palwal, and Mathura, witnessing devotional songs, prayers, and spiritual discourses. This Delhi to Vrindavan yatra by Bageshwar Dham Sarkar symbolizes the strength of faith, unity, and the timeless essence of Sanatan Dharma.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here