AIN NEWS 1 | चीन ने अपनी नौसेना शक्ति में एक और बड़ा कदम उठाते हुए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ (Fujian) तैयार कर लिया है। यह जहाज चीन की पीएलए नेवी (People’s Liberation Army Navy) के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। शनिवार को चीन ने इसका ऑपरेशनल डेमो वीडियो जारी किया, जिससे साफ हो गया कि यह जहाज अब पूरी तरह सेवा के लिए तैयार है।
बीते हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में फुजियान की कमीशनिंग सेरेमनी आयोजित की गई थी। समारोह के दौरान इसे आधिकारिक तौर पर चीनी नौसेना में शामिल किया गया, जिससे यह देश के रक्षा इतिहास में तीसरा और अब तक का सबसे उन्नत विमानवाहक युद्धपोत बन गया।
‘फुजियान’ की खासियतें — तकनीक और क्षमता का संगम
चीन का नया एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक है। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट सिस्टम (EMALS) लगाया गया है — यह वही तकनीक है जो अब तक केवल अमेरिका के जेराल्ड आर. फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर्स में इस्तेमाल होती थी।
इस तकनीक की मदद से लड़ाकू विमान कम दूरी वाले डेक से ही टेकऑफ और लैंडिंग कर सकते हैं, जिससे लॉन्चिंग स्पीड बढ़ती है और ऑपरेशंस अधिक सटीक हो जाते हैं। पारंपरिक स्टीम कैटापुल्ट की तुलना में यह सिस्टम तेज, शांत और ऊर्जा-कुशल है।
फुजियान का डिस्प्लेसमेंट लगभग 80,000 टन है, जो इसे चीन का अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत बनाता है। यह आधुनिक रडार, एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और कई अत्याधुनिक फाइटर जेट्स से लैस है।
साउथ चाइना सी में बढ़ी हलचल
फुजियान की लॉन्चिंग ऐसे समय पर हुई है जब चीन और फिलीपींस के बीच साउथ चाइना सी में तनाव अपने चरम पर है। बीते दो वर्षों में दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई बार खतरनाक टकराव और हिंसक झड़पें हो चुकी हैं।
चीन का आरोप है कि अमेरिका की मदद से फिलीपींस, चीन को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। वहीं फिलीपींस और अमेरिका का कहना है कि वे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का पालन कर रहे हैं।
साउथ चाइना सी की यह तनातनी केवल दो देशों तक सीमित नहीं है — इसका असर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन का यह नया एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए नई रणनीतिक चुनौती लेकर आया है।
ताइवान पर चीन का आक्रामक रुख
फिलीपींस के अलावा चीन का रुख ताइवान को लेकर भी लगातार सख्त बना हुआ है।
हाल ही में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा।
हालांकि चीन के ताजा कदम और उसकी सैन्य गतिविधियां इस बयान से उलट संकेत देती हैं।
फुजियान जैसे आधुनिक युद्धपोत के शामिल होने से चीन की नौसैनिक क्षमता अब ताइवान के आसपास तेज और आक्रामक अभियान चलाने में सक्षम हो जाएगी।
इससे अमेरिका और जापान जैसे देशों की चिंताएं और बढ़ गई हैं, जो ताइवान की सुरक्षा के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
भारत के लिए भी बढ़ा खतरा
फुजियान की तैनाती भारत के लिए भी सामरिक चिंता का विषय है।
पिछले कुछ वर्षों से चीन हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है।
चीनी जंगी जहाज, पनडुब्बियां और सर्वे वेसल अक्सर इस क्षेत्र में देखे जाते हैं, जो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकते हैं।
भारत के वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ, वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन, ने हाल ही में कहा था कि
“भारतीय नौसेना हिंद महासागर में प्रवेश करने वाले हर चीनी जहाज पर निगरानी रखती है और उनकी गतिविधियों पर हमारी पैनी नजर रहती है।”
भारत की नौसैनिक ताकत और चुनौतियां
भारत के पास फिलहाल दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स हैं —
आईएनएस विक्रमादित्य
आईएनएस विक्रांत
भारतीय नौसेना लंबे समय से तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग कर रही है ताकि देश की समुद्री सीमाओं की निगरानी और प्रभाव बढ़ाया जा सके।
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से इस पर हरी झंडी नहीं मिली है।
कुछ साल पहले पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि
“अंडमान-निकोबार द्वीप समूह नौसेना के लिए स्थायी एयरक्राफ्ट कैरियर की भूमिका निभा सकता है।”
उनका मानना था कि इन द्वीपों की भौगोलिक स्थिति इतनी सामरिक है कि यहां से चीन की समुद्री गतिविधियों पर सीधे नजर रखी जा सकती है।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
‘फुजियान’ के सक्रिय होने के बाद चीन की नौसेना अब और ज्यादा आक्रामक रणनीति अपनाने में सक्षम हो जाएगी।
अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश पहले से ही क्वाड (QUAD) के तहत मिलकर चीन की विस्तारवादी नीतियों का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं।
कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री शक्ति संतुलन तेजी से बदल सकता है, और इसका सबसे बड़ा कारण चीन की यह नई रणनीतिक तैयारी होगी।
‘फुजियान’ से बदलेगा एशिया का पावर बैलेंस
चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि एक संदेश है —
एशिया में उसकी सैन्य और तकनीकी श्रेष्ठता का।
इसकी लॉन्चिंग के साथ चीन ने यह दिखा दिया है कि वह अमेरिका जैसी शक्तियों से तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है।
जहां एक ओर अमेरिका को इंडो-पैसिफिक में अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, वहीं भारत को भी हिंद महासागर में अपनी सुरक्षा नीति को और मजबूत करना होगा।
“फुजियान सिर्फ चीन की नौसैनिक ताकत का प्रतीक नहीं, बल्कि पूरे एशिया में शक्ति संतुलन को बदलने वाला मोड़ साबित हो सकता है।”



















