AIN NEWS 1 | उत्तर प्रदेश में संगठित अपराधों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार तेज़ी से जारी है। इसी कड़ी में प्रतापगढ़ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो लंबे समय से नशे के कारोबार में सक्रिय था। इस कार्रवाई में पुलिस ने लगभग 3 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी, गांजा और स्मैक बरामद की है।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री राजीव कृष्ण के निर्देश पर की गई। डीजीपी ने पूरे प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और संगठित अपराधों पर नकेल कसने के आदेश जारी किए थे। इन्हीं निर्देशों के तहत पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रतापगढ़ श्री दीपक भूकर के नेतृत्व में थाना मानिकपुर पुलिस ने यह निर्णायक अभियान चलाया।
छापेमारी से खुला नशे का काला कारोबार
शनिवार की सुबह करीब आठ बजे मानिकपुर पुलिस की एक टीम तस्कर राजेश मिश्रा के घर पहुंची। यह छापेमारी शुरू में एक अन्य केस की जांच के दौरान की गई थी, लेकिन पुलिस जब घर के अंदर पहुंची तो वहां का नज़ारा देखकर दंग रह गई। घर के अंदर लाखों रुपये की नकदी, गांजा और स्मैक के पैकेट रखे हुए थे।
पुलिस ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और गिनती की प्रक्रिया शुरू कराई। दो मशीनों की मदद से करीब 22 घंटे तक नकदी की गिनती चलती रही। रविवार सुबह छह बजे तक गिनती पूरी हुई और पुलिस ने कुल करीब 2 करोड़ रुपये नकद और एक करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ बरामद किए।
गिरोह की मुखिया थी रीना मिश्रा
छापेमारी के दौरान पुलिस ने पाया कि तस्कर राजेश मिश्रा जेल में रहते हुए भी पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसका पूरा परिवार इस अवैध धंधे में शामिल था।
पुलिस ने राजेश मिश्रा की पत्नी रीना मिश्रा, बेटा विनायक, बेटी कोमल, और परिवार के ही यश कुमार व अजीत को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि रीना मिश्रा ही इस पूरे गिरोह की मुखिया के रूप में काम कर रही थी और पति के निर्देशों पर कारोबार संभाल रही थी।
नकदी घर में क्यों रखी जाती थी?
पुलिस जांच में सामने आया कि यह पैसा मादक पदार्थों की बिक्री से प्राप्त हुआ था। लगातार पुलिस की कार्रवाई और गैंग्स्टर एक्ट में कुर्की के डर से परिवार ने बैंक में पैसा जमा करना बंद कर दिया था। नकदी घर में छिपाकर रखी जा रही थी ताकि पुलिस या अन्य एजेंसियों को भनक न लगे।
आरोपी पर दर्ज हैं 14 मुकदमे
मुख्य आरोपी राजेश मिश्रा, मुंदीपुर मानिकपुर का निवासी है। वह लंबे समय से गांजा और स्मैक की तस्करी में सक्रिय था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 14 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गैंग्स्टर एक्ट भी शामिल है।
राजेश फिलहाल जेल में बंद है, जबकि उसकी पत्नी रीना मिश्रा हाल ही में 15 दिन पहले जमानत पर रिहा हुई थी। उस पर भी छह मुकदमे दर्ज हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब पुलिस एक स्थानीय व्यक्ति राजेंद्र कुमार के दस्तावेजों के दुरुपयोग से संबंधित केस की जांच के लिए राजेश मिश्रा के घर पहुंची थी। पुलिस को उम्मीद नहीं थी कि वहां नशे के कारोबार का इतना बड़ा जाल मिलेगा। लेकिन जब तलाशी ली गई तो घर में भारी मात्रा में नकदी और नशीले पदार्थ बरामद हुए।
पुलिस की सतर्कता और भविष्य की कार्रवाई
एसपी दीपक भूकर ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्रवाई प्रतापगढ़ में मादक पदार्थों के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है। जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
इसके अलावा, संपत्ति जब्ती (कुर्की) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि अपराध से कमाई गई हर संपत्ति को कानून के दायरे में लाया जा सके।
पुलिस की सख्त चेतावनी
एसपी ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कहीं नशे का कारोबार दिखे या किसी व्यक्ति पर संदेह हो, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
समाज के लिए संदेश
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक गिरोह के पर्दाफाश का नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी भी है कि नशे का कारोबार न केवल कानून तोड़ता है बल्कि समाज को अंदर से खोखला करता है। पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि कानून-व्यवस्था मजबूत हो, तो संगठित अपराधों की जड़ें कहीं भी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकतीं।



















