AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में चल रहे मिशन शक्ति फेज 5.0 के तहत साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में बागपत पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे संवेदनशील अपराध में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई NCMEC (National Center for Missing & Exploited Children) से प्राप्त साइबर टिपलाइन के आधार पर की गई, जिसे प्रदेश की साइबर पुलिस यूनिट ने गंभीरता से लिया।

DIG मेरठ रेंज श्री कलानिधि नैथानी ने अपने आधिकारिक बयान में इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, और इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए बागपत पुलिस ने समय पर और प्रभावी एक्शन लिया। DIG के मुताबिक, NCMEC से मिली रिपोर्ट में कुछ संदिग्ध अकाउंट्स और IP एड्रेस का उल्लेख था, जिसके बाद साइबर क्राइम पुलिस ने तहकीकात शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने पाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील और बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो अपलोड किए गए थे। यह अपराध न सिर्फ भारतीय कानूनों के अनुसार गंभीर है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और समाज के नैतिक ढांचे के लिए भी बेहद चिंताजनक है। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, IP ट्रैकिंग और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों की पहचान की और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
बागपत पुलिस ने भी अपने आधिकारिक X अकाउंट पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा की और बताया कि मामला POCSO Act (धारा 13) और आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत सख्त सजा का प्रावधान है, विशेष रूप से तब जब सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री प्रसारित की जाए। यह अपराध न सिर्फ कानूनन प्रतिबंधित है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए चिंताजनक है।
पुलिस की कार्रवाई में यह भी सामने आया कि आरोपी इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर इस तरह की सामग्री अपलोड और शेयर कर रहे थे। NCMEC की रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत थे कि ये गतिविधियाँ बच्चों के खिलाफ साइबर शोषण का हिस्सा हैं। रिपोर्ट मिलते ही बागपत की साइबर टीम ने इसे मिशन शक्ति के लक्ष्यों के तहत प्राथमिकता पर रखा और तुरंत कार्रवाई की।
इस मामले ने फिर से यह साबित किया है कि साइबर दुनिया में अपराध कितनी तेजी से फैलते हैं और इन्हें रोकने के लिए पुलिस विभाग को तकनीकी रूप से कितना सजग रहना पड़ता है। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान न सिर्फ डिजिटल साक्ष्य इकट्ठे किए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि आरोपी न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट में पेश हों। पुलिस के अनुसार, आगे की जांच यह पता लगाने के लिए भी जारी है कि क्या आरोपी किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े थे या यह एक व्यक्तिगत स्तर का अपराध था।
DIG कलानिधि नैथानी ने अपने बयान में यह भी कहा कि मिशन शक्ति के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हर प्रकार के अपराध को जड़ से खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अगर किसी को भी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर इस तरह की गतिविधि दिखे तो तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
बागपत पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही। कई उपयोगकर्ताओं ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की। Instagram और YouTube पर इस मामले से संबंधित वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें साइबर सेल की पूरी कार्रवाई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया दिखाई गई है। इससे पुलिस की पारदर्शिता और तत्परता का भी पता चलता है।
कुल मिलाकर, यह मामला इस बात का प्रमाण है कि मिशन शक्ति अभियान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसा अभियान है जो जमीनी स्तर पर प्रभाव डाल रहा है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस विभाग कितना संवेदनशील है, यह इस कार्रवाई से साफ झलकता है। इसके साथ ही यह संदेश भी जाता है कि इंटरनेट पर अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून से बचने का मौका नहीं दिया जाएगा।
यह घटना समाज को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को मिलकर जागरूक होने की जरूरत है। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके दुरुपयोग की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ रही हैं। ऐसे में हर व्यक्ति का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
Under Mission Shakti 5.0, the Baghpat Police took swift action after receiving an NCMEC cyber tipline report related to child pornography. The arrest of two accused individuals highlights the growing focus on cyber crime prevention in Uttar Pradesh. DIG Meerut Range Kalanidhi Naithani officially confirmed the operation, stating that strong legal action has been initiated under the POCSO Act and the IT Act. This case emphasizes the importance of cyber vigilance, child safety, and proactive policing in India.


















